: शिव महापुराण कथा : उमड़ा जनसैलाब
Sun, Aug 6, 2023
रमेश बत्रातिल्दा नेवरा | छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के तिल्दा नेवरा में चल रहे शिव महापुराण कथा के छठवें दिन कथा को सुनने जनसैलाब उमड़ रहा है। नजारा ऐसा था मानो कथा नहीं मेला लगा हो। सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने लाखों श्रद्धालु तिल्दा नेवरा स्थित दशहरा मैदान पहुंचे थे। जिस स्थल पर कथा हो रही है, वह मैदान भक्तों से जनसैलाब उमड़ा आया। कहीं छत पर तो कहीं पेड़ जहां नजर जा रही थी वहां श्रद्धालुओं की भीड़ ही नजर आ रही थी | पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा का ही असर है कि घर-घर में सोमवार को शिव जी की पूजा की जा रही है। उनका एक लोटा जल सभी समस्याओं का हल इस सरल मूल मंत्र को लोग अपनाते जा रहे हैं। कल का कथा का समय सुबह 8 बजे से 11 बजे तक रखा गया है |
पंडित मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव त्रिकालदर्शी है जो संपूर्ण विश्व का कल्याण करने वाले हैं | जिनके नाम मात्र केवल उच्चारण कर लेने पर सभी दुख कट जाते हैं | घनश्याम अग्रवाल सावन मास में भी अधिक मास का पावन पर्व पर श्री कांवड़ शिव महापुराण कथा का आयोजन करके छत्तीसगढ़ का ही नहीं अपितु संपूर्ण देशवासियों को आनंद की अनुभूति कराई है | यह शिव महापुराण की कथा हमें संसार सागर में जागने का मार्ग बताती है | हम जब विषम परिस्थितियों में पड़ जाते हैं तो हम उस परिस्थिति से भागते हैं | पर शिव महापुराण की कथा कहती है भाग जाना किसी परिस्थिति का हल नहीं है | हमें उस परिस्थिति का सामना करना चाहिए | हमें किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए |एक बार पशुपति का व्रत जरूर करना चाहिए | प्रत्येक प्रदोष व्रत पर महादेव के मंदिर में और घर के दरवाजे में दीप प्रज्वलित करना चाहिए | मासिक शिवरात्रि के दिन महादेव के मंदिर ,बेलपत्र के वृक्ष ,आंवले के वृक्ष और घर के दरवाजे पर दीप प्रज्वलित करना चाहिए |कथा के छठवे दिन एक ऐसा वाकया भी सामने आया जब पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा बताए गए उपाय को अपनाकर गले का छाला समाप्त हो गया | किरना जिला रायपुर निवासी देवकी रानी ध्रुव के भेजे गए पत्र को पढ़कर पंडित मिश्रा सुनाया कि मेरी तबीयत 2022 में खराब हो गई थी | मेरी गले में छाला हो गया था | बहुत डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने कहा ऑपरेशन करने से ही ठीक हो पाएगा | जिसके बाद मैंने महादेव पर चढ़ा हुआ जल पीना शुरू किया एवं बेल पत्र खाना शुरू किया | इसके बाद मेरी सारी रिपोर्ट नॉर्मल आ गई और ऑपरेशन करने का जरूरत ही नहीं पड़ा |
: शिव महापुराण : शिव की कृपा से मनुष्य को सतमार्ग की प्राप्ति होती है - पं. प्रदीप मिश्रा
Sat, Aug 5, 2023
रमेश बत्रा
तिल्दा नेवरा | पांचवे दिन की कथा सुनने उमड़ा जनसैलाब | वही कल छठवे दिन की कथा दोपहर 1 से 4 बजे तक रखा गया है | पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि तिल्दा नेवरा छत्तीसगढ़ पावन भूमि पर भगवान शिव की कृपा से स्व्. शंकरलाल अग्रवाल एवं अनीता देवी अग्रवाल की स्मृति में घनश्याम अग्रवाल के द्वारा आयोजित श्री कांवड़ शिव महापुराण कथा श्रवण करने का सौभाग्य आप सभी को प्राप्त हुआ है |https://youtu.be/2yFRduc5wVEपंडित मिश्रा ने कहा कि शिव की कृपा से मनुष्य सतमार्ग की ओर चल पाते हैं | बिना शिव की कृपा से भगवान की अविरल भक्ति तक पहुंच पाना संभव नहीं है | शक्कर और संत का काम एक ही होता है | जिस तरह शक्कर किसी भी चीज को मीठा बना देता है उसी प्रकार संत जनमानस को भगवान की भक्ति की मिठास में घोल देते हैं | संत, गुरु और संन्यासी जहां भी जाते हैं वहां भक्ति का मिठास छोड़ देते हैं | भगवान शिव का भजन कीर्तन मनुष्य को उस मंजिल में ले जाता है जिसका मनुष्य कल्पना भी नहीं कर सकता | भक्ति कीर्तन विश्वास का बल बढ़ने से परमात्मा के दर्शन का आनंद प्राप्त होता है | जिस जगह पर संत ग्रंथ और सत्संग का समावेश होता है वह जगह ऊर्जा ,आनंद से परिपूर्ण होता है |https://youtu.be/euZMxoWITuMपंडित प्रदीप मिश्रा ने छोटी बच्ची को गोद में लेकर दिया आशीर्वाद
कथा के चौथे दिन एक ऐसा वाकया भी सामने आया जब पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा बताए गए उपाय को अपनाकर 3 वर्ष की बच्ची का कैंसर समाप्त हो गया और आंख की रोशनी वापस आ गई | अकलतरा जिला जांजगीर चांपा निवासी सनत कुमार और उसकी पत्नी पूनम के भेजे गए पत्र को पढ़कर पंडित मिश्रा ने इस बच्ची को मंच पर बुलाकर बच्ची को गोद में लिया और अपना आशीर्वाद दिया |https://youtu.be/AA-GTRCtzWU
: शिव महापुराण कथा : तिल्दा नेवरा मे शिव महापुराण की भक्ति रसधारा
Fri, Aug 4, 2023
रमेश बत्रा
तिल्दा नेवरा | छत्तीसगढ़ के तिल्दा नेवरा मे 1 अगस्त 7 अगस्त तक आयोजित शिव महापुराण कथा मे अंतराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के द्वारा जनमानस को कथा का श्रवण कराया जा रहा है | चार दिनो से हो रही बारिश के बाद भी श्रद्धालु आज चौथे दिन की कथा सुनने बड़ी संख्या में तिल्दा नेवरा पहुच रहे है | नजारा ऐसा है मानो कथा नहीं मेला लगा हो।