: दलित, आदिवासी वोटर तय करेंगे मुख्यमंत्री!
Fri, Oct 13, 2023
रायपुर.
देश में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में सभी सियासी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वैसे तो यह ताकत सभी विधानसभा क्षेत्रों में लगाई जा रही है, लेकिन सभी सियासी दलों को अंदाजा है कि इन पांच राज्यों में अगर दलित और आदिवासियों को अपने पक्ष में कर लिया गया, तो सत्ता उनके पास ही होगी। दरअसल राजनीतिक दलों के पास ऐसा सोचने और इस समुदाय के लोगों को अपने पक्ष में करने के पीछे सबसे बड़ा कारण बीते चुनावों के नतीजे हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2018 में जिस राज्य में दलित और आदिवासी का बंपर वोट जिस राजनीतिक दल को मिला, सत्ता की चाबी उसको ही मिली। 2013 के नतीजे इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह ट्रेंड सत्ता पाने के लिए बना रहना बेहद जरूरी है। क्योंकि 2013 में सत्ता पाने वाली भाजपा ने 2018 के चुनाव में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इस समुदाय पर अपना अधिकार खो दिया था।
सियासी आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में अगर दलित और आदिवासी समुदाय को अपने पक्ष में कर लिया गया, तो राज्य में सत्ता एक तरह से उसी की हो जाती है। आंकड़ों के मुताबिक पांच राज्यों में विधानसभा की 679 सीटें हैं। इन सभी सीटों में 240 सीटें ऐसी हैं, जो दलित और आदिवासियों के लिए सुरक्षित सीटें हैं। आंकड़ों के मुताबिक पांचों राज्यों की तकरीबन ऐसी 35 फ़ीसदी सीटें आरक्षित कोटे में आती हैं। राजनीतिक विश्लेषक बृजेश शुक्ला का कहना है कि 2018 के चुनाव में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इन सभी सुरक्षित सीटों पर तकरीबन दो तिहाई कब्जा कर कांग्रेस ने सत्ता की चाबी पाई थी। यही वजह है कि 2022 के विधानसभा चुनावों में सभी राजनीतिक दलों का पूरा फोकस दलित और आदिवासियों पर ही ज्यादा से ज्यादा केंद्रित है। क्योंकि यही सुरक्षित सीटें विधानसभा के चुनाव की दशा और दिशा पूरी तरह से बदल देती हैं।
राजस्थान में सुरक्षित सीटों पर जीत से मिलती है सत्ता
राजस्थान में कुल 200 विधानसभा की सीटें हैं। इसमें तकरीबन तीस फीसदी सीटें यानी 59 सीटें सुरक्षित कैटेगरी में आती हैं। राजस्थान की आबादी में 17 फीसदी दलित और 13 फीसदी आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हैं। इसी आधार पर सुरक्षित की गई यहां की 34 सीटें एससी और 25 सीटें एसटी कोटे में सुरक्षित हैं। 2013 के चुनावी परिणाम के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी ने इन 59 सीटों में से 45 सीटें अपने खाते में जीत के तौर पर दर्ज की थीं। जबकि इसी चुनावी साल में कांग्रेस को इन सुरक्षित सीटों पर महज 7 सीटें ही जीत पाई थी। चुनावी परिणाम बताते हैं कि 2018 में जब चुनाव हुए, तो कांग्रेस ने 59 सीटों में से 34 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता पर कब्जा जमा लिया। जबकि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ इक्कीस सुरक्षित सीटें ही जीत सकी।
: मानसून जाते जाते करेगा गर्मी से बेहाल
Fri, Oct 13, 2023
रायपुर.
छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। आज गुरुवार को सुबह से ही बादल छाए हुए हैं। इससे उमस की गर्मी से लोग काफी परेशान है। प्रदेश में मौसम की विदाई हो चुकी है। बारिश थम गई है। इससे अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान बढ़ रहा है। बीते दिनों दोपहर की तेज धूप की वजह से बीते कुछ दिनों से उमस बढ़ने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान में कोई बदलाव की संभावना नहीं है।
आगे चार से पांच दिनों तक मौसम ऐसे ही रहने की संभावना है। इसके बाद मौसम में बदलाव हो सकती है और अक्टूबर के आखरी सप्ताह में ठंड शुरू हो सकती है। राजधानी रायपुर में बीते दिनों बुधवार को अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस रहा, यह सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। वहीं प्रदेश में अधिकतम तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में मौसम शुष्क रहेगा।
अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई विशेष बदलाव की संभावना नहीं है। राजधानी रायपुर में आज अधितम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। प्रदेशभर में लोग गर्मी से काफी परेशान है। ऐसे मौसम से अधिकतर लोग बीमार पड़ रहे हैं। प्रदेश में कही ठंडी तो कई इलाकों में गर्मी है।
: CG के सौरभ चंद्राकर ने दाऊद के भाई से मिलाया हाथ, सट्टेबाजी का एक और एप लॉन्च किया
Fri, Oct 13, 2023
रायपुर
महादेव बेटिंग ऐप केस
(Mahadev Betting App) में बड़ा खुलासा हुआ है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) के इनवेस्टिगेशन में सामने आया है कि महादेव ऐप प्लेटफॉर्म के सरगना सौरभ चंद्राकर (Saurabh Chandrakar) ने अब अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई मुश्तकीम से हाथ मिला लिया है. सौरभ और मुश्तकीम ने मिलकर गेम एप लांच किया है. इसमें एक एप है 'खेलोयार' जो भारत और पाकिस्तान में चलाया जा रहा है.
खेलोयार भी एक बेटिंग एप है, जिसके माध्यम से सौरभ चंद्राकर और दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) का भाई मुश्तकीम करोड़ों की कमाई कर रहे हैं. मुश्तकीम ने सौरभ को अपनी सिक्योरिटी भी दी है. दुबई से दोनों मिलकर लगातार बेटिंग एप चला रहे हैं, जिससे रोज करोड़ों का मुनाफा हो रहा है.
बता दें कि छत्तीसगढ़ का रहने वाला सौरभ चंद्राकर ने दुबई पहुंचकर ऑनलाइन सट्टेबाजी का एप शुरू किया था. इस एप का नाम 'महादेव गेमिंग-बेटिंग ऐप' था. इस मामले में प्रवर्तन निदेशायल (ED) की कार्रवाई अभी चल रही है. कई राज्यों में छापेमारी भी हो चुकी है.
महादेव बुक ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की शादी संयुक्त अरब अमीरात में फरवरी में हुई थी. इस शादी में शानदार इवेंट रखा गया था, जिसमें कई फिल्मी सितारों और गायकों ने परफॉर्म किया था. आरोप लग रहा है कि शादी में परफॉर्म करने वाले फिल्मी कलाकारों को हवाला के माध्यम से 200 करोड़ रुपये से भी ज्यादा दिए गए थे. वहीं फैमिली मेंबर्स को नागपुर से UAE तक ले जाने के लिए किराए पर प्राइवेट जेट लिए गए थे.
इसी मामले में ईडी ने मुंबई, भोपाल और कोलकाता में छापेमारी की. जांच के दौरान पता चला कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल नाम के आरोपियों ने UAE में अरबों का साम्राज्य खड़ा कर लिया है. दोनों अवैध तरीके से कमाई गई दौलत का प्रदर्शन कर रहे हैं.
कौन है सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल?
छत्तीसगढ़ में साधारण परिवार में जन्मे सौरभ चंद्राकर (saurabh chandrakar) ने 2018 तक भिलाई में महादेव जूस सेंटर चलाया. इसके बाद वह ऑनलाइन सट्टेबाजी कराने वाले ऐप्स पर दांव लगाने लगा. सौरभ इसमें करीब 15 लाख रुपये हार चुका था. उसका दोस्त रवि उप्पल भी साधारण पृष्ठभूमि से है, वह छोटे-मोटे काम करता था. रवि ने भी कुछ एप में सट्टेबाजी की थी और 10 लाख से ज्यादा गंवा दिए थे.
सट्टेबाजी सिंडिकेट से वसूली का दबाव पड़ा तो सौरभ और रवि भिलाई से किसी तरह दुबई भाग गए. दुबई पहुंचकर पहले तो दोनों ने छोटे-मोटे काम किए, इसके बाद महादेव बुक एप नाम से सट्टेबाजी एप लॉन्च कर दिया. इसके लिए दोनों ने पैसे भी जुटा लिए.
इस एप का नाम सौरभ ने भिलाई में अपने जूस सेंटर से लिया था, एप को यूरोप स्थित कुछ सॉफ्टवेयर कोडर्स ने बनाया था, जिसे साल 2020 में कोविड लॉकडाउन के समय लॉन्च किया गया था. इसके बाद से एप के माध्यम से सौरभ और रवि ने अरबों रुपये कमा लिए. इनका नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला था. महादेव बुक एप के खिलाफ आत्महत्या के लिए लोगों को उकसाने के केस भी दर्ज हुए.