: साजा के जीत की गूंज दिल्ली तक सुनाई पड़ रही
Tue, Dec 5, 2023
रायपुर
वैसे तो प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के कई सूरमा हार गए लेकिन साजा में कांग्रेस के कद्दावर नेता रविन्द्र चौबे जो कि अपनी परम्परागत सीट हार गए वह भी एक गैर राजनीतिक व्यक्ति ईश्वर साहू से इस जीत की गूंज छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक सुनाई पड़ रही। भाजपा के चाल में फंस गए चौबेजी और सहानुभूति की लहर असर कर गया। हालांकि मतदान के बाद कांग्रेस के लोगों को रूझान समझ आ गया था फिर भी वे कहते रहे जीतेंगे तो जरूर भले ही 5 हजार से और यह अनुमान उनके लिए फिट बैठ गया जब वे इतने ही मतों से चुनाव हार गए।
दरअसल बिरनपुर हत्याकांड मामले को भाजपा ने चुनावी रणनीति में अघोषित रूप से शामिल कर लिया और इसका असर साजा बेमेतरा व कवर्धा की तीन सीट खोकर कांग्रेस को चुकानी पड़ी है। कांग्रेस ने हल्के में ले लिया इस घटनाक्रम को शायद यही लगते रहा। ईश्वर साहू व उनके परिवार ने मतदाताओं के बीच जाकर सिर्फ इतना ही कहते रहे हमने अपना बेटा खोया है और नहीं चाहते किसी और के बेटे के साथ ऐसा हो। साजा में कांग्रेस की हार के पीछे के कुछ प्रमुख कारण जो वहां के स्थानीय लोग अब गिना रहे हैं-साहू और लोधी समाज के लोग पूरी तरह लामबंद हो गए कि इस बार नहीं तो कभी नहीं। बिरनपुर में जिस युवक की हत्या हुई थे उसके पिता ईश्वर साहू व उनकी माता के आंखों मे आंसू देखकर ग्रामीण मतदाताओं ने सहानुभूति उड़ेल दिया। अति उत्साही कांग्रेसियों की यह बात कि .. अरे वो छेरी चरवाहा ल कहां विधायक बनाहूं..? भाजपा ने जमकर प्रचारित किया।
रही-सही कसर चुनाव प्रचार खत्म होने के अंतिम क्षण में हुई अमित शाह की आखिरी सभा जैसा कि वहां के लोग बताते हैं साजा व बेमेतरा को एक कर दिया था,भाजपा के कार्यकतार्ओं और मतदाताओं से उन्होने दो टूक कहा कि वे इन दोनों सीटों से जीत मांगते हैं,आगे की जिम्मेदारी उनकी रहेगी। एक और अंतिम कारण साजा की सीट को कांग्रेसी निश्चित जीत वाली सीट में गिनते रहे और अभी तक यह रहा भी है,अति आत्मविश्वास भी यहीं चूक कर गया। खैर..जनता का फैसला अंतिम अब ईश्वर साहू ने तो यहां इतिहास रच दिया। स्वस्थ व संस्कारित राजनीति तो यही कहती है कि हार को भी स्वीकारें और रचनात्मक भूमिका विपक्ष की निभायें।
: साजा के जीत की गूंज दिल्ली तक सुनाई पड़ रही
Tue, Dec 5, 2023
रायपुर
वैसे तो प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के कई सूरमा हार गए लेकिन साजा में कांग्रेस के कद्दावर नेता रविन्द्र चौबे जो कि अपनी परम्परागत सीट हार गए वह भी एक गैर राजनीतिक व्यक्ति ईश्वर साहू से इस जीत की गूंज छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक सुनाई पड़ रही। भाजपा के चाल में फंस गए चौबेजी और सहानुभूति की लहर असर कर गया। हालांकि मतदान के बाद कांग्रेस के लोगों को रूझान समझ आ गया था फिर भी वे कहते रहे जीतेंगे तो जरूर भले ही 5 हजार से और यह अनुमान उनके लिए फिट बैठ गया जब वे इतने ही मतों से चुनाव हार गए।
दरअसल बिरनपुर हत्याकांड मामले को भाजपा ने चुनावी रणनीति में अघोषित रूप से शामिल कर लिया और इसका असर साजा बेमेतरा व कवर्धा की तीन सीट खोकर कांग्रेस को चुकानी पड़ी है। कांग्रेस ने हल्के में ले लिया इस घटनाक्रम को शायद यही लगते रहा। ईश्वर साहू व उनके परिवार ने मतदाताओं के बीच जाकर सिर्फ इतना ही कहते रहे हमने अपना बेटा खोया है और नहीं चाहते किसी और के बेटे के साथ ऐसा हो। साजा में कांग्रेस की हार के पीछे के कुछ प्रमुख कारण जो वहां के स्थानीय लोग अब गिना रहे हैं-साहू और लोधी समाज के लोग पूरी तरह लामबंद हो गए कि इस बार नहीं तो कभी नहीं। बिरनपुर में जिस युवक की हत्या हुई थे उसके पिता ईश्वर साहू व उनकी माता के आंखों मे आंसू देखकर ग्रामीण मतदाताओं ने सहानुभूति उड़ेल दिया। अति उत्साही कांग्रेसियों की यह बात कि .. अरे वो छेरी चरवाहा ल कहां विधायक बनाहूं..? भाजपा ने जमकर प्रचारित किया।
रही-सही कसर चुनाव प्रचार खत्म होने के अंतिम क्षण में हुई अमित शाह की आखिरी सभा जैसा कि वहां के लोग बताते हैं साजा व बेमेतरा को एक कर दिया था,भाजपा के कार्यकतार्ओं और मतदाताओं से उन्होने दो टूक कहा कि वे इन दोनों सीटों से जीत मांगते हैं,आगे की जिम्मेदारी उनकी रहेगी। एक और अंतिम कारण साजा की सीट को कांग्रेसी निश्चित जीत वाली सीट में गिनते रहे और अभी तक यह रहा भी है,अति आत्मविश्वास भी यहीं चूक कर गया। खैर..जनता का फैसला अंतिम अब ईश्वर साहू ने तो यहां इतिहास रच दिया। स्वस्थ व संस्कारित राजनीति तो यही कहती है कि हार को भी स्वीकारें और रचनात्मक भूमिका विपक्ष की निभायें।
: MP Weather News: अरब सागर से आ रही नमी से छाए बादल, बढ़ेगी सर्दी
Tue, Dec 5, 2023
भोपाल
बंगाल की खाड़ी में बने तूफान 'मिचोंग' के असर से प्रदेश के पूर्वी और अरब सागर में बने चक्रवात से आ रही नमी के असर से प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में बादल छाए हुए हैं। इसके अतिरिक्त राजस्थान पर द्रोणिका के रूप में बना पश्चिमी विक्षोभ भी असर दिखा रहा है। बादलों के कंबल के असर से रात का तापमान बढ़ा हुआ है और सर्दी तीखा रुख नहीं अपना पा रही है। वहीं यही बादल सूरज को ढंककर दिनों को सर्द बनाए हुए हैं।
मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों तक प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव नहीं आएगा। गंभीर चक्रवातीय तूफान और मौसम प्रणालियों का असर कम होने के बाद बादल छंटेगे और तब तापमान में तेजी से गिरावट आएगी।
मौसम विज्ञानी ने बताया कि बंगाल की खा़ड़ी से आगे बढ़ रहा तूफान मिचोंग गंभीर चक्रवाती तूफान बन चुका है। यह दक्षिण आंध्र प्रदेश और उत्तर तमिलनाडु के तट पर दक्षिण पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर स्थित है। वर्तमान में यह चेन्नई से 100 किमी की दूरी पर है। मिचोंग पांच दिसंबर को आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट से टकराएगा। बेहद ताकतवर तूफान के असर से छत्तीसगढ़ के साथ पूर्वी मध्यप्रदेश में भी ऊंचाई पर बादल छाए हुए हैं।
इस दौरान दिन के तापमान में गिरावट आएगी। वहीं एक अन्य मौसम प्रणाली अरब सागर में ऊपरी हवा के चक्रवात के रूप में बनी हुई है, जिससे नमी आ रही है। इसके असर से उत्तरी मध्य प्रदेश विशेष तौर पर ग्वालियर-चंबल संभाग में बादल छाए रहने की संभावना है।
पश्चिमी विक्षोभ का भी प्रभाव
एक पश्चिमी विक्षोभ हरियाणा के दक्षिणी भाग पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात के रूप में बना हुआ है। इससे एक द्रोणिका भी संबद्ध बनी हुई है। इसका असर भी प्रदेश पर दिख रहा है। तीन प्रणालियों का संयुक्त प्रभाव प्रदेश को बादलों के आगोश में समेटे हुए है। बादलों के चलते रात में अपेक्षित सर्दी नहीं पड़ रही है। अधिकतर शहरों में रात का तापमान 15 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। बीते चौबीस घंटों के दौरान प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान हिल स्टेशन पचमढ़ी में 13.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि मैदानी इलाकों में खरगौन में 14.2 डिग्री सेल्सियस, खंडवा में 15 तो बैतूल में 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।