: छत्तीसगढ़ में 19 महिलाएं पहुंचीं विधानसभा
Mon, Dec 4, 2023
रायपुर.
छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में केवल 19 महिलाएं ही चुनकर सदन तक पहुंची हैं। राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने 15 और 18 महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाया था। इनमें से 54 सीटें जीतकर सत्ता हासिल करने वाली भाजपा से आठ और 35 सीटें जीतकर सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस से 11 महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है।
रविवार को हुई मतगणना के अनुसार, भाजपा की महिला उम्मीदवार, केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने भरतपुर सोनहत सीट से, लक्ष्मी राजवाड़े ने भटगांव सीट से, शकुंतला सिंह पोर्ते ने प्रतापपुर सीट से, उद्देश्वरी पैकरा ने सामरी सीट से, रायमुनी भगत ने जशपुर सीट से, सांसद गोमती साय ने पत्थलगांव सीट से, भावना बोहरा ने पंडरिया सीट से तथा पूर्व मंत्री लता उसेंडी ने कोंडागांव सीट से जीत हासिल की है।
वहीं कांग्रेस की महिला उम्मीदवारों में विद्यावती सिदार ने लैलुंगा सीट से, उत्तरी जांगड़े ने सारंगढ़ सीट से, शेषराज हरबंश ने पामगढ़ सीट से, चतुरी नंद ने सरायपाली सीट से, कविता प्राण लहरे ने बिलाईगढ़ सीट से, अंबिका मरकाम ने सिहावा से, संगीता सिन्हा ने संजारी बालोद से, मंत्री अनिला भेड़िया ने डौंडी लोहारा से, यशोदा निलांबर वर्मा ने खैरागढ़ से, हर्षिता स्वामी बघेल ने डोंगरगढ़ से और सावित्री मनोज मंडावी ने भानुप्रतापपुर से जीत हासिल की है। इनमें से उत्तरी जांगड़े, संगीता सिन्हा और सावित्री मंडावी मौजूदा विधायक हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है। राज्य में 20393160 मतदाताओं में से 10256865 महिला मतदाता तथा 10135543 पुरुष मतदाता हैं। इनमें से 7812631 महिला मतदाताओं ने और 7748612 पुरुष मतदाताओं ने इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। राज्य की कुल 90 सीटों में से 50 सीटें ऐसी हैं जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है। राज्य में चुनाव लड़ने वाले अन्य राजनीतिक दलों में से जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने 11 महिलाओं को, बहुजन समाज पार्टी ने सात महिलाओं को ओर आम आदमी पार्टी ने पांच महिलाओं को टिकट दिया था।
: अमित शाह की स्ट्रेटेजी इस बार फिर से रंग लायी, जाने
Mon, Dec 4, 2023
भाजपा इस चुनाव में बड़ी जीत का ही टारगेट शुरू से लेकर चली थी, यह टारगेट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने फॉर्मूले के जरिए प्रदेश भाजपा के संगठन को दिया था। जिस पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेतृत्व में माइक्रो मैनेजमेंट कर इसे अमल में लाया गया। शाह के 15 बिंदुओं के फॉर्मूले को सिलसिलेवार जमीन पर उतारा जाना था। संगठन के नेताओं ने इस पर गंभीरता से जुट कर न सिर्फ काम किया बल्कि इसे अमल में ला दिया। नतीजे में भाजपा ने मेरा बूथ सबसे मजबूत अभियान कोअधिकांश बूथ पर सफलता दिलाई और वोट शेयर में उसकी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत को लगभग टच कर गई। अमित शाह ने जब एमपी का रूख किया तो उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश प्रभारी शिवप्रकाश, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को बूथ प्रबंधन के लिए 15 बिंदुओं का टारगेट दिया। इसमें सबसे कठिन टास्क था हर बूथ पर 50 प्रतिशत वोट भाजपा के हिस्से में लाने का। लेकिन हकीकत में यह एक ऐसा टारगेट था, जिसे पूरा करने पर भाजपा की जो जीत सामने आई है, वही परिणाम आते।
अमित शाह के इन रास्तों से पहुंचे टारगेट तक
बूथ विस्तारक अभियान: 2 को मार्च महीने में प्रदेश भर में चलाया गया। शक्ति केंद्र टोली, शक्ति केंद्र प्रभारी,संयोजक, सोशल मीडिया प्रभारियों का गठन किया गया। इसके साथ ही पन्ना प्रमुख भी बनाए गए। इस अभियान में 10 हजार 916 शक्ति केंद्रों पर पार्टी की टोली बनाई गई थी और पन्ना प्रमुख नियुक्त किए गए।
बूथ विजय संकल्प अभियान- 4 से 14 मई तक इस अभियान के तहत दो शक्ति केंद्रों के कार्यकर्ताओं का एक साथ मिलना, खेलना, साथ में खाना खाने के साथ ही भाजपा की जीत का उद्देश्य पर चर्चा करना।
मेरा बूथ सबसे मजबूत- हर मंडल पर यह अभियान चलाया गया। इसमें प्रदेश के बाहर से आए विस्तारक भी शामिल हुए। इन सभी ने हर बूथ पर जाकर पार्टी के कार्यक्रम करवाए और उसमें हिस्सेदारी की।
विधानसभा सम्मेलन- 20 से 31 जुलाई तक शक्ति केंद्र और बूथ समितियों के कार्यकर्ता एक साथ विधानसभा सम्मेलनों में शामिल हुए। इस कार्यक्रम से कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार हुआ और भाजपा के पक्ष में काम करने की हिस्सेदारी कार्यकर्ताओं की बढ़ गई। इस सम्मेलन के बाद शक्ति केंद्र कार्यशाला और बूथ समिति सम्मेलन आयोजित हुए।
आक्रमकता के लिए आशीष अग्रवाल की रणनीति भी कारगर
सरकार में रहते हुए विपक्ष पर कैसे हमला करना है, इसकी जिम्मेदारी प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल के जिम्मे थी। अग्रवाल ने इसे एक चुनौती की तरह लिया और उन्होंने इस पर वे खरे भी साबित हुए। उन्होंने कांग्रेस पर हमले करने की रणनीति बनाई। जिसके तहत उन्होंने न सिर्फ कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने का तय किया, बल्कि कांग्रेस पर हमलावर होते हुए उस पर ताकत और प्रमाणों के साथ पलटवार भी किया। प्रदेश भाजपा मीडिया सेंटर जहां हर संभाग में बनाए गए। इसी शुरूआत भोपाल में 24 सितंबर को हुई। पूरे चुनाव में इन सेंटर के जरिए 42 बड़ी पत्रकार वार्ता हुई। हर दिन किस बड़े नेता की पत्रकार वार्ता यहां से लगातार होती रही। मीडिया सेंटर ने पूरे चुनाव में 710 प्रेस विज्ञप्ति जारी की। जिसमें नेताओं की सभाओं और उनके बयान भी शामिल रहे।
: परिणाम आने के बाद भाजपा और कांग्रेस आगे की अपनी-अपनी तैयारी में जुटे
Mon, Dec 4, 2023
भोपाल
विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद भाजपा और कांग्रेस आगे की अपनी-अपनी तैयारी में जुट गए हैं। भाजपा जहां जल्द ही विधायक दल की बैठक बुलाकर नेता का चयन करने की तैयारी में हैं। वहीं कांग्रेस अपनी करारी हार को लेकर मंगलवार को सभी प्रत्याशियों के उनकी हार का कारण जानने का प्रयास करेगी। इन सब के बीच आज से शुरू हुए लोकसभा सत्र के लिए वे सांसद भी दिल्ली रवाना होने वाले हैं, जो विधानसभा चुनाव लड़े थे।
भाजपा विधायक दल की बैठक कब की जाएगी फिलहाल यह तय नहीं हैं। सोमवार को अधिकांश विधायक अपने क्षेत्रों में ही रहेंगे। इसी बीच दिल्ली और मध्य प्रदेश भाजपा के नेताओं के समंवय से विधायक दल की बैठक कब की जाना है यह तय किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि एक-दो दिन में भाजपा विधायक दल की बैठक बुला सकती है। इस बैठक में सर्वसम्मति से नेता का चुना जाएगा। इससे पहले केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, सांसद राकेश सिंह, राव उदय प्रताप सिंह, रीति पाठक विधानसभा चुनाव जीतने के बाद लोकसभा सत्र में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। वहीं विधानसभा का चुनाव हारे केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते और सांसद गणेश सिंह भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। इन सभी के अलावा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा भी रात तक दिल्ली पहुंचेंगे।
कल होगी समीक्षा
इधर कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद पीसीसी चीफ कमलनाथ ने हार की समीक्षा शुरू कर दी है। उन्होंने कांग्रेस के सभी 230 प्रत्याशियों को मंगलवार को भोपाल तलब किया है। कमलनाथ ने कहा कि मंगलवार सभी हारे हुए प्रत्याशी और कांग्रेस के विधायकों के साथ इस बात की समीक्षा करुंगा कि आखिर वह क्या वजह रही जो हम अपनी बात प्रदेश के मतदाता को समझा नहीं सके।