नई दिल्ली. शनिवार तड़के जब हमास ने इजरायल पर हमला किया तब इसके कुछ घंटों बाद ही प्रधानमंत्री मोदी ने हमास के हमले को आतंकी हमला करार देते हुए कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में भारत इजरायल के साथ खड़ा है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी से फोन पर बात की. इस बातचीत में पीएम मोदी ने एक बार फिर से दोहराया कि भारत इजरायल के साथ है और आतंकवाद के हर रूप की घोर निंदा करता है.
मध्य-पूर्व के इस्लामिक देश फिलिस्तीन के साथ मजबूती से खड़े दिखते हैं और वो फिलिस्तीनियों के लिए अलग राष्ट्र की मांग करते रहे हैं. हालांकि, यूएई, बहरीन, मोरक्को जैसे कुछ इस्लामिक देशों का रुख अब इजरायल को लेकर बदल रहा है. यूएई, बहरीन ने तो हमले के लिए हमास की निंदा भी की है. भारत में भी इस मामले पर सियासी चर्चा तेज हो गई है क्योंकि भारत परंपरागत रूप से फिलीस्तीन का समर्थन करता आ रहा है लेकिन मोदी सरकार खुलकर इजरायल के साथ खड़ी दिख रही है.
हमास का हमला और पीएम मोदी का ट्वीट
हमास के हमले के कुछ घंटों बाद ही पीएम मोदी ने एक्स (ट्टिटर) पर किए गए एक ट्वीट में कहा, 'इस मुश्किल घड़ी में हम इजरायल के साथ एकजुटता से खड़े हैं.'
आमतौर पर ऐसे मामलों में भारत का विदेश मंत्रालय बयान जारी करता है लेकिन पीएम मोदी ने ऐसा न करते हुए तुरंत ट्वीट कर कहा, 'इजरायल पर आतंकी हमलों से गहरा सदमा लगा है. हमारी प्रार्थनाएं निर्दोष पीड़ितों और उनके परिवार वालों के साथ है.' प्रधानमंत्री के इस ट्वीट को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी रीट्वीट किया.
पीएम मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर बातचीत को लेकर भी एक ट्वीट किया है. मंगलवार को किए ट्वीट में पीएम मोदी ने लिखा, 'प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मुझे फोन कर स्थिति की ताजा जानकारी दी जिसे लेकर मैं उनका धन्यवाद करता हूं. इस मुश्किल घड़ी में भारत के लोग मजबूती से इजरायल के साथ खड़े हैं. भारत आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी और स्पष्ट रूप से निंदा करता है.'
भारत ने मामले पर जितनी जल्दी प्रतिक्रिया दी और इजरायल का पक्ष लिया, उसे कई विश्लेषक मोदी सरकार की इजरायल-फिलीस्तीन पर बदली नीति के रूप में देख रहे हैं. भारत इस तरह के संकट में किसी एक देश का पक्ष लेने के लिए नहीं जाना जाता लेकिन इस बार भारत ने तुरंत इजरायल का पक्ष लिया है. भारत ने इससे पहले फिलिस्तीन की तरफ से किसी हमले को आतंकी हमला कहकर भी संबोधित नहीं किया था.
फिलिस्तीन के साथ खड़ा भारत क्यों करने लगा इजरायल का समर्थन?
पीएम मोदी के बयान दिखाते हैं कि भारत और इजरायल कितने करीब आ गए हैं. एक वक्त था जब भारत इजरायल से दूरी बनाकर रखता था. 1948 में बने इजरायल से भारत ने चार दशकों से भी ज्यादा समय तक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए थे. भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू समेत उस दौर के सभी नेताओं का मानना था कि धर्म के आधार पर किसी भी देश का निर्माण नहीं होना चाहिए. और यहूदी बहुल इजरायल धर्म के आधार पर ही बना था. हालांकि, भारत ने सितंबर 1950 में इजरायल को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता दे दी थी.
1956 में जब स्वेज नहर का विवाद हुआ तब भारत इजरायल के खिलाफ मिस्र के साथ खड़ा था. 1967 में जब इजरायल और फिलिस्तीन के बीच 6 दिनों का युद्ध हुआ तब भी भारत ने फिलिस्तीन का साथ दिया था. भारत ने कहा था कि वो फिलिस्तीनियों के वैध अधिकारों का समर्थन करता है. भारत ने साल 1992 में इजरायल के साथ आधिकारिक रूप से पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए.
इसके बाद भी भारत ने इजरायल की कई बार आलोचना की. 2006 के लेबनान युद्ध में भारत ने इजरायल से आग्रह किया था कि वो गैर-जिम्मेदाराना तरीके से बल प्रयोग बंद करे. इसके बाद साल 2014 के गाजा युद्ध में भारत ने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच बातचीत की वकालत की. भारत ने तब फिलिस्तीनियों के लिए अलग राष्ट्र की बात कही थी.
पीएम मोदी के आने से इजरायल-भारत संबंधों में मजबूती
भारत-इजरायल संबंधों में ऐतिहासिक बदलाव तब आया जब साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए. भाजपा हमेशा से यह तर्क देती रही है कि भारत और इजरायल स्वाभाविक सहयोगी हैं. इसके उलट, पहले की गैर-भाजपा सरकारें तर्क देती रही थीं कि भारत को अपनी मुस्लिम आबादी के कारण इस्लामिक देशों का साथ देना पड़ा.
पीएम मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के व्यक्तिगत संबंध काफी मजबूत माने जाते हैं. पीएम मोदी से पहले किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजरायल की यात्रा तक नहीं की थी. साल 2017 में पीएम मोदी इजरायल के दौरे पर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने.
दोनों देशों ने व्यापार, कृषि, संस्कृति और रक्षा के क्षेत्रों में अपने सहयोग को बहुत अधिक बढ़ाया है.
पिछले कुछ सालों में, भारत और इजरायल ने मिलकर कई संयुक्त सैन्य अभ्यास किए हैं. 2018 में नेतन्याहू भारत के दौरे पर आए थे. इस दौरे के बाद भारत-इजरायल ने अंतरिक्ष, सूचना और आतंकवाद के क्षेत्र में भी अपने सहयोग को बढ़ाया. इजरायल और भारत 2021 में बने I2U2 समूह का हिस्सा हैं और भारत इजरायल के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के कई प्रस्तावों से भी परहेज करता रहा है.
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