: छत्तीसगढ़ से 12 तक मानसून की विदाई, तापमान गिरेगा
Thu, Oct 5, 2023
रायपुर.
छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज अब बदल गया है और 12 अक्टूबर के आसपास प्रदेश से मानसून की विदाई संभावित है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले पांच दिनों तक प्रदेश के अधिकतम तापमान में विशेष बदलाव नहीं होगा, लेकिन न्यूनतम तापमान में गिरावट आएगी। आने वाले दिनों में अब वर्षा की गतिविधि भी घटेगी। हालांकि गुरुवार को प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा संभावित है।
बीते कुछ दिनों से बारिश कम होने से अब तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी होने लगी है। बुधवार को रायपुर का अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। इसी प्रकार न्यूनतम तापमान 24.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य रहा। प्रदेश में मौसम का मिजाज अभी ऐसा ही रहेगा। एक जून से लेकर 30 सितंबर तक प्रदेश में 1036 मिमी से ज्यादा बारिश हो चुकी है। रायपुर जिले में भी 1000 मिमी से ज्यादा बारिश हुई है।
मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि एक निम्न दाब का क्षेत्र गंगेटिक पश्चिम बंगाल और उससे लगे झारखंड के उपर स्थित है।इसके साथ ही ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण 7.6 किमी ऊंचाई तक है। इसके प्रभाव से गुरुवार को प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा के आसार है।साथ ही अब अधिकतम तापमान बढ़ेगा और न्यूनतम तापमान में गिरावट आएगी।
: धान बोनस के अटके 3,700 करोड़, सीएम भूपेश ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
Thu, Oct 5, 2023
रायपुर.
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर किसानों के बोनस पर लगे प्रतिबंध को हटाने का अनुरोध किया है। उन्होंने 3,700 करोड़ अटके बोनस को लेकर पत्र लिखकर कहा कि किसानों के बोनस की राशि उनका न्यायोचित हक है। वर्ष 2014-15 और वर्ष 2015-16 के दो वर्षों की बोनस राशि किसानों को मिलनी थी, जो केंद्र सरकार द्वारा बोनस पर प्रतिबंध के चलते अटका हुआ है। किसानों से वर्ष 2013 में वादा किया गया था कि उनका एक-एक दाना खरीदा जाएगा, 2100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा और 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। वर्ष 2014 में केंद्र सरकार द्वारा कृषि उपजों पर बोनस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके चलते किसानों को बोनस अप्राप्त है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि वर्ष 2013-14 में पूर्ववर्ती सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य जो कि 1350 रुपये प्रति क्विंटल था, पर धान की खरीदी की। मई 2014 में केंद्र में सरकार बनते ही केंद्र द्वारा कृषि उपजों पर दिए जाने वाले बोनस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
: 2018 में कांग्रेस ने बिलासपुर की 24 में से अधिकांश पर बदला था चेहरा
Thu, Oct 5, 2023
रायपुर.
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में वर्ष-2018 में जब प्रदेशभर में कांग्रेस के पक्ष में लहर चल रही थी, उस दौर में कांग्रेस के रणनीतिकारों ने राजनीतिक दृष्टिकोण से सफल प्रयोग किया था। उम्मीदवारों के चेहरे बदल दिए गए थे। नए चेहरों के दम पर राजनीतिक बिसात बिछाई और काफी हद तक सफल भी रहे। जिन चेहरों पर कांग्रेस ने दांव खेला, उन लोगों ने भी निराश नहीं
किया। कांग्रेस के पक्ष में चल रही लहर और अपनी ऊर्जा का पूरा-पूरा उपयोग उम्मीदवारों ने किया। नतीजा हम सबके सामने है। इसका फायदा कांग्रेस को मिला।
नए उम्मीदवार होने के कारण व्यक्तिगत रूप से नकारात्मक छवि प्रत्याशी की नहीं रही। दूसरी तरफ राज्य की सत्ता पर बीते 15 वर्षों से काबिज भाजपा ने उन्हीं चेहरों पर दांव खेला जो विधायक पद पर थे या फिर वर्ष 2013 का चुनाव हार गए थे। नए चेहरों पर दांव खेलना और चुनाव मैदान में उतारने के अपने फैसले के चलते राजनीतिक रूप से कांग्रेस फायदे में रही।
भाजपा के लिए राहत वाली बात यह रही कि बिलासपुर व जांजगीर-चांपा जिले में कांग्रेस के पक्ष में लहर के बाद भी संतोषजनक स्थिति में रही। जांजगीर-चांपा जिले में बसपाई रणनीतिकारों ने भी चेहरा बदलने का राजनीतिक रूप से जोखिम उठाया था। हालांकि उनको लाभ ही मिला। परंपरागत सीट पर कब्जा जमाने में बसपाई रणनीतिकार सफल रहे।
जांजगीर-चांपा जिले की ऐसी चली थी राजनीति
पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से वर्ष-2013 में कांग्रेस ने शेषराज हरबंश को टिकट दिया था। वहीं भाजपा ने अंबेश जांगड़े को चुनाव मैदान में उतारा था। जांगड़े चुनाव जीतने में सफल रहे। बसपा के गढ़ पर भाजपा ने कब्जा किया। वर्ष-2018 में भाजपा ने जांगड़े पर फिर भरोसा जताया। वहीं कांग्रेस ने हरबंश की जगह गोरेलाल बर्मन को चुनाव मैदान में उतारा। बसपा ने दूजराम बौद्ध की जगह इंदू बंजारे को टिकट दिया। नए चेहरे का असर ऐसा हुआ कि बसपा अपने गढ़ पर कब्जा जमाने में सफल रही। अकलतरा विधानसभा क्षेत्र में उम्मीदवार का चेहरा वही था पर पार्टी बदली हुई थी। वर्ष-2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने अकलतरा से सौरभ सिंह को उम्मीदवार बनाया था। वे चुनाव जीते। पांच साल के भीतर विधानसभा की राजनीति तेजी के साथ घूमी और सौरभ सिंह बसपा से भाजपा में शामिल हो गए। टिकट मिल गया और विधायक भी बन गए। सक्ती विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस व भाजपा दोनों ने प्रयोग किया। कांग्रेस ने डा चरणदास महंत को टिकट दी और जीत गए।
बिलासपुर में भाजपा मजबूत
बिलासपुर जिले की राजनीति पर नजर डालें तो यहां भाजपा की स्थिति मजबूत है। हालांकि चेहरा बदलने का लाभ कांग्रेस को मिला। कांग्रेस ने जिले की छह में से पांच सीटों पर नए चेहरे को चुनाव मैदान में उतारा था। बिलासपुर से शैलेष पांडेय, बिल्हा से राजेंद्र शुक्ला, तखतपुर से रश्मि सिंह, बेलतरा से राजेंद्र साहू, कोटा से विभोर सिंह व मस्तूरी से दिलीप लहरिया को टिकट दिया था। छह में से पांच नए चेहरे थे। इनमें से तखतपुर से रश्मि सिंह और बिलासपुर से शैलेष पांडेय ही चुनाव जीतने में सफल रहे।
ननकी और जयसिंह के इर्द-गिर्द कोरबा की राजनीति
कोरबा जिले की राजनीति भाजपा व कांग्रेस के दो दिग्गज नेता ननकीराम कंवर और जयसिंह अग्रवाल के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। कोरबा से जयसिंह अग्रवाल और रामपुर विधानसभा से ननकीराम कंवर लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं। कोरबा विधानसभा में भाजपा लगातार चेहरा बदल दे रही है, उसके बाद भी जीत दर्ज नहीं कर पाई है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के सुप्रीमो हीरा सिंह मरकाम के चलते पाली तानाखार विधानसभा क्षेत्र की अपनी अलग पहचान बनी। रामदयाल उइके लगातार दो बार विधायक निर्वाचित हुए। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद परिस्थितियां बदली और वे चुनाव हार गए।
मुंगेली में खाता नहीं खोल पाई कांग्रेस
बिलासपुर संभाग के ही मुंगेली जिले में लोरमी और मुंगेली दो विधानसभा क्षेत्र को शामिल किया गया है। प्रदेशभर में चली लहर के बाद भी कांग्रेस के प्रत्याशियों ने अपना खाता भी नहीं खोल पाए। मुंगेली विधानसभा से भाजपा के पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले और लोरमी से जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के धर्मजीत सिंह चुनाव जीते।
अकलतरा की तरह चंद्रपुर में भी बदली तस्वीर
अकलतरा विधानसभा की तरह चंद्रपुर विधानसभा में भी राजनीतिक तस्वीर उसी अंदाज में बदली। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने रामकुमार यादव को प्रत्याशी बनाया था। भाजपा ने युद्धवीर सिंह की जगह उनकी पत्नी संयोगिता सिंह को टिकट दिया था। रामकुमार यादव चुनाव जीत गए। वर्ष 2018 में चंद्रपुर विधानसभा में चेहरा वही था, पार्टी बदल गई थी। रामकुमार यादव बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतारा। दूसरी बार वे चुनाव जीते।