: साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला त्रिपुरा की कवयित्री को
Sun, Dec 24, 2023
अगरतला.
त्रिपुरा की प्रमुख मणिपुरी कवयित्री सोरोखैबम गंभिनी को मणिपुरी में उनकी सराहनीय कविता रचना के लिए इस वर्ष के प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। गंभिनी को नये वर्ष की शुरुआत में नई दिल्ली में आयोजित मेगा कार्यक्रम में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भारतीय भाषाओं के अन्य विजेताओं के साथ सम्मानित किया जाएगा। वह संस्कृत में स्नातकोत्तर हैं और त्रिपुरा के धलाई जिले के बारा सूरमा नामक एक दूरदराज गांव की रहने वाली हैं। वह अपनी स्कूली दिनों से ही साहित्यिक गतिविधियों में शामिल रही हैं।
त्रिपुरा विश्वविद्यालय की छात्रावास में वार्डन के रूप में कार्यरत मध्यम उम्र की गंभिनी ने आधे दशक के लंबे शोध के बाद कविता-पुस्तक 'याचांगबा नांग हेलो' की रचना की, जो दर्शन, जीवन और मानवता से संबंधित है और 2018 में त्रिपुरा के एक प्रकाशक द्वारा प्रकाशित की गई थी। गंभिनी ने मीडिया से कहा, “हालांकि साहित्य अकादमी ने मेरी मणिपुरी साहित्य रचना को मान्यता देने पर विचार किया है, लेकिन मैंने बंगाली में भी कई रचनाएं की हैं और हिंदी साहित्यिक गतिविधियों में भी शामिल रही हूं।”
उनकी उपलब्धियों पर बधाई देते हुए त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ माणिक साहा ने कहा कि यह त्रिपुरा के लोगों के लिए गर्व की बात है कि गंभिनी को मणिपुरी रचना के लिए प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी का पुरस्कार प्राप्त हुआ है, जो अन्य लोगों की तरह अल्पसंख्यक भाषाओं को बढ़ावा देने में हमारी कोशिशों की सफलता को दर्शाता देता है। साहित्य अकादमी ने 24 भाषाओं (भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं सहित अंग्रेजी और राजस्थानी) में रचनाओं के लिए अपने वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा की है, जिसमें कविता की कई किताबें, छह उपन्यास, पांच लघु कथाएं, तीन निबंध और एक साहित्यिक अध्ययन शामिल हैं।
: कश्मीर में बढ़ी कड़ाके की ठंड
Sun, Dec 24, 2023
श्रीनगर.
कश्मीर घाटी में तापमान में गिरावट आने के बाद कड़ाके की ठंड बढ़ गयी है। मौसम विज्ञान केंद्र ने रविवार को बताया कि श्रीनगर में आज न्यूनतम तापमान शून्य से कम 2.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि शनिवार रात को 1.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो सामान्य से 0.1 डिग्री सेल्सियस कम है।
यहां अधिकतम तापमान सामान्य 8.6 डिग्री सेल्सियस से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक था, जबकि पिछले दिन श्रीनगर में 9.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। उत्तरी कश्मीर में गुलमर्ग को छोड़कर घाटी के अन्य हिस्सों में भी शनिवार को दिन का तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया था।
श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर काजीगुंड में तापमान पिछली रात के 1.4 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले शून्य से कम 2.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि कोकेरनाग में न्यूनतम तापमान शून्य से कम 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले तापमान 1.2 डिग्री सेल्सियस था। पहलगाम का पर्यटन स्थल कश्मीर घाटी में रविवार को शून्य से कम 3.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले यह 0.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो सामान्य से 1.1 डिग्री सेल्सियस अधिक है।
पिछली रात दर्ज किए गए शून्य से कम 1.5 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले गुलमर्ग का न्यूनतम तापमान शून्य से कम 3.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री सेल्सियस अधिक है। कुपवाड़ा में रविवार को तापमान शून्य से कम 2.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि शनिवार को तापमान 1.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.1 डिग्री सेल्सियस कम रहा। मौसम विभाग ने कहा कि 26 दिसंबर तक मौसम आमतौर पर शुष्क रहने और बादल छाए रहने के आसार हैं।
: सोनम वांगचुक बोले - जलवायु परिवर्तन मानव जाति के लिए विश्व युद्धों से भी बड़ा खतरा
Sun, Dec 24, 2023
कोकराझार (असम).
रमन मैगसायसाय पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक ने शनिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन मानव जाति के लिए विश्व युद्धों से भी बड़ा खतरा है। वांगचुक ने पर्यावरण की रक्षा में आदिवासी समुदायों की भूमिका को रेखांकित किया और आधुनिक शहरों के निवासियों से, प्रकृति के करीब रहने वाले लोगों से जीवन जीने का तरीका सीखने का आग्रह किया।
वांगचुक को यहां शैक्षणिक सुधारों, सतत परिवर्तन और पर्यावरण के संरक्षण में उनके योगदान के लिए 20वां उपेन्द्र नाथ ब्रह्मा 'सोल्जर ऑफ ह्यूमैनिटी' पुरस्कार 2023 प्रदान किया गया। यह पुरस्कार 'यूएन ब्रह्मा ट्रस्ट' द्वारा दिया जाता है। अपने नवाचारों के लिए मशहूर वांगचुक ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास होने चाहिए क्योंकि जलवायु परिवर्तन विश्व युद्धों से भी अधिक खतरनाक साबित होगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 'ग्लोबल वार्मिंग' की चुनौतियों का सामना करने और जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने में दुनिया भर में आदिवासी समुदायों को मजबूत रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''आदिवासी समुदाय के लोगों का ज्ञान और उनकी समझ औद्योगीकरण और तथाकथित आधुनिक जीवन शैली की तुलना में लंबे वक्त के लिए अधिक लाभ प्रदान करने वाला है।''
वांगचुक ने आगाह किया कि ''पांच सितारा शहरों के रूप में दिल्ली या मुंबई या न्यूयॉर्क की संस्कृति'' धरती को नहीं बचाएगी। यह आदिवासी संस्कृति और परंपरा है जो प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करती है।'' उन्होंने कहा कि असम के बोडोलैंड क्षेत्र या लद्दाख के लोगों की पारंपरिक संस्कृति में देश की समृद्धि में योगदान देने की अधिक क्षमता है।