: 'छत्तीसगढ़ की ट्रेनों को अडानी के लिए रद्द कर रही BJP : कांग्रेस
Tue, Oct 17, 2023
राजनांदगांव.
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने बीजेपी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अमित शाह ने राजनांदगांव में साम्प्रदायिक तनाव भड़काने के लिए योजनाबद्ध तरीके से भाषण दिया है। हम चुनाव आयोग से शिकायत करेंगे कि वो इस मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करे। राजीव भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अमित शाह छत्तीसगढ़ आये थे।
ईडी के रट्टू तोते की भांति एक बार फिर से ईडी की लिखी पटकथा के आधार पर कांग्रेस पर झूठे आरोप लगा कर गये। पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ प्रवक्ता आरपी सिंह, धनंजय सिंह ठाकुर, घनश्याम राजू तिवारी, सुरेन्द्र वर्मा, संयुक्त महामंत्री अजय साहू, प्रवक्ता अजय गंगवानी, सत्यप्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे।
शुक्ला ने कहा कि शाह बड़ी बेशर्मी से देश की सबसे ईमानदार सरकार जिसकी योजनाओं का शत प्रतिशत हिस्सा सीधे हितग्राहियों के खाते में जाता है पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटकना की बात शाह का जुमला है, दरअसल भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के राष्ट्रीय संरक्षक तो अमित शाह ही है।
कांग्रेस ने पूछे सवाल
- छत्तीसगढ़ के नान घोटाले, पनामा पेपर, चिटफंड घोटाले, झलकी घोटाले, इंदिरा प्रियदर्शिनी घोटाले, आंखफोडवा कांड, नकली दवा कांड सभी के आरोपियों को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया इस पर अमित शाह क्यों मौन थे?
- छत्तीसगढ़ के चावल का कोटा केन्द्र 86 लाख से घटाकर 61 लाख क्यों किया इस पर अमित शाह कुछ नहीं बोले? बताये
छत्तीसगढ़ का कोटा क्यों घटाया?
- भ्रष्टाचार पर बड़ी-बड़ी बाते करने वाले अमित शाह हमारी सरकार पर मनगढ़त आरोप लगाने वाले अमित शाह ने यह नहीं बताया अडानी की सेल कंपनियों में 20 हजार करोड़ किसके लगे हैं?
- रमन और उनके मंत्री मंडल के सदस्यो के 1 लाख करोड़ के भ्रष्टाचार पर अमित शाह की बोलती क्यों बंद हैं?
- अमित शाह छत्तीसगढ़ की जनता पर एहसान जता कर गये कि केन्द्र ने 9 साल में छत्तीसगढ़ को 3 लाख करोड़ दिया यह नहीं बताया कि छत्तीसगढ़ से केन्द्र ने पिछले 9 साल में 5 लाख करोड़ वसूला है। अभी भी छत्तीसगढ़ को अपने हिस्से का केन्द्र से 55 हजार करोड़ लेना है।
- छत्तीसगढ़ की ट्रेनो को केन्द्र क्यों रद्द कर रही है इस पर अमित शाह क्यों चुप रहे?
- अमित शाह आज़ की सभा में शायद रमन सिंह के भ्रष्टाचार की चैन और अमन एटीएम याद कर रहे थे। डॉक्टर साहब, मैडम सीएम और ऐश्वर्या रेसीडेंसी का पता जो नान मामले में जप्त डायरी में दर्ज़ था।
- चाऊर वाले बाबा का मुखौटा लगाकर छत्तीसगढ़ के लाखों गरीब जनता के नाम पर फर्जी राशन कार्ड बनाकर 36 हजार करोड़ के नान घोटाले का पैसा नागपुर, लखनऊ और दिल्ली तक पहुंचा। रमन सिंह के करप्शन का पाप अमित शाह याद कर रहे थे।
- छत्तीसगढ़ का कोयला अडानी के लिये ढोने माल वाहक ट्रेने चला रहे हमारी यात्री सुविधाओं को रद्द कर रहे। छत्तीसगढ़ की जनता के साथ अन्याय करने वाले भाजपा के नेता किस नैतिकता से छत्तीसगढ़ की जनता से वोट मांग रहे। भ्रष्टाचार पर बाते करने वाले अमित शाह 15 सालो में 1 लाख करोड़ का घोटाला करने वाले रमन सिंह के साथ मंच पर थे यदि भाजपा भ्रष्टाचार पर ईमानदार होती तो नान, चिटफंड, पनामा पेपर की जांच ईडी कर रही होती।
: बीजेपी कार्यालय के बाहर आदिवासियों का धरना
Tue, Oct 17, 2023
जशपुर.
भाजपा ने 85 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। चुनाव प्रचार के लिए पूरी ताकत झौंक दी है। दूसरी ओर प्रत्याशी बदलने की मांग को लेकर जशपुर से रायपुर आए आदिवासियों का तीसरे दिन भी धरना प्रदर्शन जारी है। डूमरतराई स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में जशपुर बीजेपी कार्यकर्ता प्रत्याशी बदलने की मांग पर अड़े हुए हैं। शुरुआती तौर पर बीजेपी के अन्य नेताओं ने उन्हें भरपूर समझाने की कोशिश की पर वो नहीं माने। इसके बाद सोमवार 16 अक्टूबर को उनसे मिलने प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव पहुंचे। साव ने हाथ जोड़कर सभी को घर जाने के लिए कहा।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि वो हाईकमान से बात करेंगे, लेकिन कार्यकताओं का कहना है कि पहले बात करिए फिर मानेंगे। ठोस आश्वासन के बाद ही धरने से हटने की बात कही है। इस दौरान कई कार्यकर्ता साव से बातें करते हुए रो पड़े। बीजेपी ने जशपुर से रायमुनि भगत को प्रत्याशी घोषित किया है, जबकि कार्यकर्ता पूर्व मंत्री गणेशराम भगत को टिकट देने की मांग कर रहे हैं। वो पिछले 3 दिन से बीजेपी कार्यालय के बाहर धरने पर डटे हुए हैं। उनका कहना की रायमुनि भगत के समर्थन में कोई भी कार्यकर्ता प्रचार-प्रसार नहीं कर रहा है। साव ने आश्वासन दिया है कि उनकी बातें हाईकमान तक पहुंचा दी जाएगी और भगत समेत सभी कार्यकर्ताओं का पार्टी सम्मान करती है।
'गणेशराम को लेकर भ्रम फैलाया गया'
बीजेपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जशपुर विधानसभा क्षेत्र में गणेशराम को लेकर भ्रम फैलाया गया था। उनके बारे में कहा गया कि वो अब बुजुर्ग हो चुके हैं। चल फिर नहीं सकते। उनका पैर टूट गया है और वो व्हीलचेयर पर चलते हैं। जबकि पूरा देश जानता है कि सच्चाई क्या है। एक साल में 120 आंदोलन गणेशाराम ने किया है। अगर वह चल फिर सकते तो फिर आंदोलन कैसे किए। इसे लेकर रिपोर्ट भी आई है। अफवाह फैलाई गई कि वो बीजेपी के विरोध में काम कर रहे हैं। नाराज कार्यकर्ताओं ने कहा कि 2013 से 2023 तक विधानसभा को खड़े करने का काम गणेशराम भगत ने किया है। रात में आदिवासी कार्यकर्ता बीेजेपी दफ्तर के बाहर गेट के सामने सोकर अपना विरोध जारी रखे हुए हैं।
गणेशराम भगत के रोने का वीडियो हुआ था वायरल
बीजेपी की लिस्ट जारी होने पर गणेशराम भगत का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसमें वो टिकट नहीं मिलने पर भावुक होकर फूट-फूट कर रो रहे थे। वायरल वीडियो में भगत जनजातीय सुरक्षा मंच के कार्यकर्ताओं की बैठक में जशपुर सीट से टिकट नहीं मिलने पर लोगों को सांत्वना दे रहे थे। भाजपा नेताओं के आश्वासन के बाद भी टिकट नहीं मिलने पर वो भावुकर होकर रो पड़े थे।
: CG में शाह के मंच पर दिखा वो शख्स जो बदल सकता है 12 प्रतिशत वोट का गणित
Tue, Oct 17, 2023
रायपुर
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. सात नवंबर को पहले चरण में जिन 20 सीटों के लिए वोट डाले जाने हैं, उन सीटों से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के साथ अलग-अलग राजनीतिक दलों के उम्मीदवार, निर्दलीय नामांकन कर रहे हैं. बीजेपी की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने भी सोमवार को राजनांदगांव विधानसभा सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है.
डॉक्टर रमन के नामांकन में गृह मंत्री अमित शाह भी पहुंचे. नामांकन के बाद अमित शाह ने जनसभा को भी संबोधित किया, छत्तीसगढ़ सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने भ्रष्टाचार को लेकर भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार को जमकर घेरा और कहा कि छत्तीसगढ़ के भ्रष्टाचार के चर्चे दिल्ली तक हैं. मुख्यमंत्री के कार्यालय में काम करने वाले अधिकारी पकड़े जा रहे हैं.
अमित शाह ने भ्रष्टाचार को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार पर निशाना साधा लेकिन एक बात और थी जिसे लेकर अब चर्चे शुरू हो गए हैं. अमित शाह का ये कार्यक्रम था तो राजनांदगांव में लेकिन मंच पर शाजापुर के बीजेपी उम्मीदवार ईश्वर साहू भी नजर आए. ईश्वर साहू का शाह के मंच पर होना किस बात का संकेत है? इसके सियासी मायने क्या हैं? ये सवाल छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारे में तेजी से तैर रहा है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि ईश्वर कोई बड़ा राजनीतिक नाम नहीं हैं.
ईश्वर साहू को शाह के मंच पर जगह देना बीजेपी की एक तीर से तीन शिकार करने की रणनीति मानी जा रही है. एक ईश्वर जिस साहू समाज से आते हैं वह छत्तीसगढ़ की सबसे प्रभावी ओबीसी जातियों में से एक है. दूसरा, ईश्वर साहू का न तो कोई राजनीतिक बैकग्राउंड है और ना ही वे कभी राजनीति में सक्रिय ही रहे हैं. वे जातिगत समीकरण के साथ ही जातिगत जनगणना के दांव की काट के लिए गरीब कार्ड के सांचे में भी फिट बैठते हैं.
ईश्वर साहू बिरनपुर में सांप्रदायिक झड़प के दौरान जान गंवाने वाले भुवनेश्वर साहू के पिता हैं. इसी साल 6 अप्रैल को बेमेतरा जिले के बिरनपुर गांव में सांप्रदायिक झड़प की घटना में भुवनेश्वर की मौत हो गई थी. इस तरह वे हिंदुत्व को धार देने की रणनीति में भी फिट हैं. ईश्वर साहू ने टिकट मिलने के बाद कहा कि मेरे बेटे को न्याय मिले, इसके लिए हर हिंदू के घर जाकर न्याय की गुहार लगाऊंगा. बेटे की हत्या के समय सभी हिंदुओं ने मेरा समर्थन किया था. उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि बीजेपी ने एक गरीब को अपना सदस्य बनने का मौका दिया, इसके लिए पार्टी को धन्यवाद. हिंदुत्व को धार देने के संकेत और गरीब कार्ड, दोनों की झलक ईश्वर के इस बयान में भी है.
साहू कितने प्रभावशाली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2019 में प्रचार के दौरान कहा था कि छत्तीसगढ़ में जो साहू समाज के लोग हैं, इसी समाज को गुजरात में मोदी कहा जाता है. बीजेपी छत्तीसगढ़ की सत्ता गंवाने के बाद लोकसभा चुनाव में सूबे की 11 में से नौ सीटें जीतने में सफल रही तो इसके पीछे मोदी के इस बयान से बने माहौल को भी श्रेय दिया गया.
अनुमानों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में साहू समाज की आबादी करीब 12 फीसदी है. कई सीटों पर जीत और हार तय करने में समाज के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. यही वजह है कि बीजेपी हो या कांग्रेस, दोनों ही दल साहू समाज के अधिक उम्मीदवारों पर दांव लगाते रहे हैं.
2018 चुनाव में जीते थे 6 साहू
साल 2018 के चुनाव में बीजेपी ने सूबे की 51 सामान्य सीटों में से 14 पर साहू समाज के नेताओं को उम्मीदवार बनाया था. कांग्रेस ने समाज के आठ नेताओं पर दांव लगाया था. हालांकि, बीजेपी से केवल एक साहू चेहरे रंजना साहू को जीत मिली थी. वहीं, कांग्रेस के आठ में से पांच साहू नेता चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने में सफल रहे थे जिनमें कसडोल सीट से शकुंतला साहू, अभनपुर सीट से धनेंद्र साहू, दुर्ग ग्रामीण से ताम्रध्वज साहू, डोंगरगांव से दलेश्वर साहू और खुज्जी से चन्नी चंदू साहू शामिल हैं.
2013 में 9 साहू पहुंचे थे विधानसभा
साल 2013 के चुनाव में बीजेपी से 12 और कांग्रेस से साहू जाति के आठ उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. बीजेपी के टिकट पर पांच और कांग्रेस के आठ में से चार उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने में सफल रहे थे. तब 90 सदस्यों वाली विधानसभा में नौ विधायक साहू समाज के थे जो आंकड़ों के लिहाज से देखें तो करीब 10 फीसदी पहुंचता है. पिछले चुनाव में बीजेपी के टिकट पर साहू समाज से आने वाले केवल एक उम्मीदवार को ही जीत मिल सकी थी. बीजेपी 15 साल बाद छत्तीसगढ़ की सत्ता से बाहर हुई तो इसके पीछे भी साहू समाज के छिटके वोट को प्रमुख वजह बताया गया.
बीजेपी ने इसबार साहू समाज को साधने के साथ ही ईश्वर के सहारे गरीब और हिंदुत्व का कार्ड चल दिया है. राजनांदगांव में शाह और रमन जैसे नेताओं के साथ मंच पर ईश्वर को जगह देकर बीजेपी ने बड़ा संदेश देने की कोशिश की है. अब ये रणनीति कितनी कारगर साबित होती है, ये तीन दिसंबर को चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा.