: बस्तर में धान की कटाई के बाद दियारी त्यौहार मनाने का सिलसिला हुआ शुरू
Mon, Nov 20, 2023
जगदलपुर.
बस्तर में दीपावली एवं धान की कटाई के बाद से दियारी त्यौहार मनाने का सिलसिला शुरू हो गया है। धान की फसल घरों में पहुंचने के बाद यह दियारी त्यौहार हिंदू कलेंडर के पूस माह से लेकर माघ पूर्णिमा तक मनाया जाता है। दियारी मनाने का दिन गांव के पुजारी की अनुमति से आहूत ग्राम मुखियों-प्रमुखों की बैठक में सुनिश्चत किया जाता है। इसमें माटी पूजा का महत्व होता है और यह अन्न, पशुधन धोरई तथा चरवाहा पे केंद्रित होता है।
सप्ताह भर में अलग-अलग दिन अलग-अलग गांवों में यह त्यौहार मनाया जाता है। बस्तर में अधिकतर गांवों में मंगलवार, बुधवार और शुक्रवार के दिन ही तय किया जाता है। हालांकि अब धोराई नहीं मिलने के कारण दियारी त्यौहार की परंपरा का निर्वहन मात्र किया जा रहा है, बावजूद इसके कुछ गांवों में अब भी दियारी त्यौहार की पूरी परम्परा के साथ भव्य रूप में मनाया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि बस्तर में हरियाली, नवाखानी व दियारी त्यौहार प्रमुख त्यौहारों में शुमार हैं। ग्रामीण अपने देवी देवताओं की पूजा-अर्चना कर इन त्यौहार को धूम-धाम के साथ मनाते हैं। दियारी त्यौहार के निर्धाारित प्रथम दिवस में रात को गाय-बैल को जेठा बांधते हैं और दियारी के दिन मवेशियों को घर में ही पकवान व खिचड़ी बनाकर खिलाया जाता है। मवेशियों को खिलाने के बाद ग्रामीण ग्रहण करते हैं। दूसरे दिन गोड़धन होता है, उस दिन पूरे गांव के लोग एक जगह एकत्रित होकर पूजा-पाठ करने के बाद मनोरंजन भी करते हैं। प्रत्येक घरों से बैल के सिंग में कपड़ा बांधकर ले जाया जाता है, जिसे धोराई निकालता है। इस दिन गांव में मेला सा माहौल रहता है।
दियारी त्यौहार में आस-पास के गांवों के लोगों के साथ-साथ रिश्तेदार भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। दियारी त्यौहार के दिन रात्रि में ओडिया नाट का आयोजन किया जाता है। वही गोड़धन के दिन प्रत्येक गांव में मुर्गा बाजार का भी आयोजन किया जाता है। कई गांवों में तो मुर्गा बाजार तीन से चार दिन तक लगातार चलता है। हालांकि पिछले कुछ सालों में यह देखने को मिल रहा है कि गोड़धन का भव्यता कम होते जा रहा है और मुर्गा बाजार का चलन बढ़ता जा रहा है।
: सीमावर्ती क्षेत्र में 28 से 30 नवंबर तक शुष्क दिवस घोषित
Mon, Nov 20, 2023
सुकमा.
कलेक्टर हरिस एस. द्वारा छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, पड़ोसी राज्य में जिला भद्राद्रि कोथागुडम तेलंगाना में विधानसभा निर्वाचन हेतु मतदान तिथि 30 नवंबर को मतदान समाप्ति के नियत समय के 48 घंटे पूर्व की अवधि अर्थात 28 नवंबर को अपरान्ह समय 4 बजे से 30 नवंबर को मतदान समाप्ति तक जिला भद्राद्रि कोथागुडम के सीमावर्ती क्षेत्र से 5 किलोमीटर क्षेत्र अंतर्गत लगे हुए एफएल 7 कैंटीन, 212 पैहागुडम को बंद रखें जाने हेतु शुष्क अवधि, शुष्क दिवस घोषित किया जाता है। जिला सुकमा के एफ.एल.-7 कैंटीन, 212 पैहागुडम मदिरा का संव्यवहार प्रतिबंधित रहेगा।
: राज्यपाल ने नृत्य रहस्य पुस्तक का किया विमोचन
Mon, Nov 20, 2023
रायपुर.
राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने प्रसिद्ध ओडिशी नृत्यांगना श्रीमती पूर्णराऊत द्वारा लिखित पुस्तक नृत्य रहस्य द सेक्रेड मिस्टिक्स आॅफ डांस का राजभवन में विमोचन किया। संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा प्रकाशित यह नृत्य विधा पर श्रीमती राउत द्वारा लिखी गई चौथी पुस्तक है। इस पुस्तक के माध्यम से बताया गया है कि नृत्य के माध्यम से स्वस्थ रहा जा सकता है और बड़ी-बड़ी से बिमारियों को दूर किया जा सकता है। नृत्य प्राचीनतम योग कला का एक स्वरूप है। यह शारीरिक तंत्र क्रिया, कुंडलिनी जागरण, आत्मा को परमात्मा से जोड?े का एक माध्यम है।
भारतीय शास्त्रीय नृत्य एक ऐसी विधा है जिससे शरीर के अंग में हल-चल होती है और ऊर्जा जागृत होती है तथा आध्यात्मिक अनुभूति का भाव पैदा करती है। इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर सरगुजा तक के ऐतिहासिक मंदिरों में अंकित नृत्य मुद्राओं का उल्लेख किया गया है। राज्यपाल हरिचंदन ने पुस्तक प्रकाशन के लिए श्रीमती राऊत को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। पुस्तक विमोचन के अवसर पर राज्यपाल के सचिव अमृत खलखो, संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी, संचालक विवेक आचार्य, रेडक्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ के सीईओ एम. के. राऊत, रेडक्रॉस छत्तीसगढ़ सोसाइटी के अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल उपस्थित थे।