: रूस ने इजरायल के खिलाफ उठाया कदम, चीन और यूएई ने दिया साथ
Tue, Oct 17, 2023
मॉस्को
इजरायल-हमास की लड़ाई के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सोमवार देर रात रूस का एक प्रस्ताव खारिज हो गया है. रूसी प्रस्ताव में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष में नागरिकों के खिलाफ हिंसा और आतंकवाद की निंदा की गई थी, लेकिन हमास का कोई उल्लेख नहीं किया गया था. हमास के इजरायल पर अचानक हमले में 1,300 से अधिक इजरायली मारे गए थे जो द्वितीय विश्व युद्ध के नाजी नरसंहार के बाद सबसे गंभीर यहूदी नरसंहार था.
15 सदस्यों वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में रूसी प्रस्ताव पर चार देशों- चीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) मोजाम्बिक और गैबॉन ने अपनी सहमति जताई जबकि चार सदस्यों देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान ने रूसी प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया. अन्य 6 सदस्य मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में किसी भी प्रस्ताव के पारित होने के लिए कम से कम 9 देशों के समर्थन की जरूरत होती है.
सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र का सबसे शक्तिशाली निकाय है जिस पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी है. लेकिन यह 7 अक्टूबर के हमास के हमले और जवाबी कार्रवाई में इजरायल के गाजा पर ताबड़तोड़ हमले को रोकने में असमर्थ रहा है. हमास के नियंत्रण वाले गाजा पर इजरायली हमले में अब तक 2,750 से अधिक लोगों की जान गई है.
इजरायल पर हमले को अनदेखा करना बेशर्मी
संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन की दूत बारबरा वुडवर्ड ने रूसी प्रस्ताव खारिज होने के बाद रूस पर निशाना साधते हुए कहा कि परिषद का इजरायल पर हमले को अनदेखा करना बेशर्मी है. उन्होंने कहा कि ब्राजील इजरायल-हमास हमले को लेकर जो प्रस्ताव UNSC में लेकर आया है, उस पर बातचीत जारी रहेगी.
बारबरा ने कहा कि ब्राजील का प्रस्ताव जहां 'नागरिकों के खिलाफ सभी तरह की हिंसा और आतंकवाद के सभी कृत्यों की दृढ़ता से निंदा करता है, साथ ही प्रस्ताव 7 अक्टूबर के हमास के जघन्य आतंकी हमले को स्पष्ट रूप से खारिज करता है और उसकी निंदा करता है.'
'सुरक्षा परिषद पश्चिम के जाल में फंस गया है'
रूसी प्रस्ताव पर मतदान से पहले यूएन में रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने प्रस्ताव के लिए समर्थन का आग्रह करते हुए कहा, 'यह प्रस्ताव मौजूदा संकट में भारी बढ़ोतरी का जवाब है. संघर्ष में हर घंटे मरने वालों और घायलों की संख्या बढ़ रही है.' रूसी राजदूत ने दोनों पक्षों के बीच संघर्ष में नागरिकों की मौत की निंदा की.
प्रस्ताव गिरने के बाद रूसी राजदूत नेबेंजिया ने कहा, 'एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि सुरक्षा परिषद पश्चिमी देशों के स्वार्थी इरादों के जाल में फंस गया है. परिषद दशकों में सबसे गंभीर हिंसा को रोकने के लिए एक सामूहिक संदेश भेजने में विफल रही है.'
हमास के हमले की निंदा न करने पर अमेरिकी राजदूत ने रूस को घेरा
रूसी राजदूत के बयान पर यूएन में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने कहा कि हमास, जिसका मकसद इजरायल को खत्म करना और यहूदियों को मारना है, उसने इजरायल में आतंक फैलाया. लेकिन रूसी प्रस्ताव में गाजा को नियंत्रित करने वाले आतंकवादी समूह का उल्लेख नहीं किया गया.
उन्होंने कहा, 'हमास की निंदा ना करके रूस एक आतंकवादी समूह को बढ़ावा दे रहा है जो निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार करता है. हमास के हमले के कारण गाजा के लोगों के सामने गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है.'
थॉमस-ग्रीनफील्ड ने सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गाजा के मानवीय संकट को दूर करने में मदद करने, हमास की निंदा करने और इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को समर्थन देने का आग्रह किया.
उन्होंने कहा, 'सबसे जरूरी बात यह है कि अगर आप हमास के खिलाफ पूरी तरह से खड़े नहीं हैं तो आप फिलिस्तीनियों और उनकी वैध अधिकारों के साथ खड़े होने का दावा नहीं कर सकते.'
: लड़ाई के बीच मलेशिया ने खुलकर हमास का समर्थन किया
Tue, Oct 17, 2023
कुआलालंपुर
इस्लामिक देश मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने हमास के साथ अपने रिश्तों की खुलकर वकालत की है. उन्होंने कहा है कि हमास को गाजा के लोगों ने चुना है और मलेशिया हमास के साथ अपने संबंधों को कायम रखेगा. मलेशियाई प्रधानमंत्री ने कहा है कि वो पश्चिमी देशों के दबाव में आकर हमास की निंदा नहीं करेंगे.
अनवर इब्राहिम ने मलेशिया की संसद में कहा कि बैठकों में पश्चिम के अधिकारी बार बार मलेशिया से हमास के हमले की निंदा करने के लिए कह रहे हैं लेकिन उनकी सरकार पश्चिम के रवैये से 'सहमत नहीं' है.इजरायल पर हमले को लेकर जहां इस्लामिक देश भी हमास के साथ खड़े होने से बच रहे हैं. वहीं, मलेशिया खुलकर हमास के साथ खड़ा है.
मलेशियाई पीएम अनवर ने कहा, 'मैंने उनसे (पश्चिमी देशों से) कहा है कि हमास के साथ हमारा रिश्ता हमारी नीति रही है और यह रिश्ता आगे भी कायम रहेगा. इस तरह हम उनके (पश्चिमी देशों के) दबाव वाले रवैये से सहमत नहीं हैं, क्योंकि हमास गाजा में जनता की तरफ से चुनकर आया है और गाजा के लोगों ने उन्हें नेतृत्व करने के लिए चुना है.'
7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर बड़े पैमाने पर हमला कर दिया था. यह दशकों में इजरायल पर पहला बड़ा हमला था. पश्चिमी देशों ने हमास के इस हमले कड़ी निंदा की है और दूसरे देशों से भी आग्रह किया है कि वो इजरायल का समर्थन करें.
इजरायली अधिकारियों के अनुसार, हमास लड़ाकों ने इजरायल पर हवा, जमीन और समुद्र के जरिए हमला कर करीब 1,400 लोगों को मार दिया जिनमें अधिकतर आम नागरिक थे.वहीं, फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार, गाजा पर इजरायल की बमबारी में कम से कम 2,750 लोग मारे गए है और लगभग 10,000 लोग घायल हुए हैं.
मलेशिया और इजरायल के बीच नहीं हैं राजनयिक संबंध
60 फीसद मुस्लिम आबादी वाला देश मलेशिया फिलिस्तीनी अधिकारों का मुखर समर्थक है और इजरायल के साथ उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं.पिछले हफ्ते, अनवर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना करते हुए कहा था कि इजरायल-हमास संघर्ष पर दुनिया का रुख एकतरफा है.
उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर किए गए एक ट्वीट में कहा, 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय फिलिस्तीनी लोगों के प्रति सभी प्रकार की क्रूरता और उत्पीड़न को लेकर एकतरफा रुख बनाए हुए है. फिलिस्तीनियों की जमीन और संपत्ति पर लगातार इजरायल कब्जा करता जा रहा है. इस अन्याय की वजह से सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान गई है. मलेशिया फिलिस्तीनी लोगों के संघर्ष के साथ एकजुटता से खड़ा है.'
इससे पहले मलेशियाई विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से युद्धविराम का आह्वान करने का आग्रह किया था.
राजधानी कुआलालंपुर में लगभग 1,000 मुसलमानों ने रैली कर फिलिस्तीनियों के प्रति अपना समर्थन जताया था. इस दौरान फिलिस्तीन की आजादी के नारे लगाए गए और इजरायली झंडे को जलाया गया.
: लड़ाई के बीच मलेशिया ने खुलकर हमास का समर्थन किया
Tue, Oct 17, 2023
कुआलालंपुर
इस्लामिक देश मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने हमास के साथ अपने रिश्तों की खुलकर वकालत की है. उन्होंने कहा है कि हमास को गाजा के लोगों ने चुना है और मलेशिया हमास के साथ अपने संबंधों को कायम रखेगा. मलेशियाई प्रधानमंत्री ने कहा है कि वो पश्चिमी देशों के दबाव में आकर हमास की निंदा नहीं करेंगे.
अनवर इब्राहिम ने मलेशिया की संसद में कहा कि बैठकों में पश्चिम के अधिकारी बार बार मलेशिया से हमास के हमले की निंदा करने के लिए कह रहे हैं लेकिन उनकी सरकार पश्चिम के रवैये से 'सहमत नहीं' है.इजरायल पर हमले को लेकर जहां इस्लामिक देश भी हमास के साथ खड़े होने से बच रहे हैं. वहीं, मलेशिया खुलकर हमास के साथ खड़ा है.
मलेशियाई पीएम अनवर ने कहा, 'मैंने उनसे (पश्चिमी देशों से) कहा है कि हमास के साथ हमारा रिश्ता हमारी नीति रही है और यह रिश्ता आगे भी कायम रहेगा. इस तरह हम उनके (पश्चिमी देशों के) दबाव वाले रवैये से सहमत नहीं हैं, क्योंकि हमास गाजा में जनता की तरफ से चुनकर आया है और गाजा के लोगों ने उन्हें नेतृत्व करने के लिए चुना है.'
7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर बड़े पैमाने पर हमला कर दिया था. यह दशकों में इजरायल पर पहला बड़ा हमला था. पश्चिमी देशों ने हमास के इस हमले कड़ी निंदा की है और दूसरे देशों से भी आग्रह किया है कि वो इजरायल का समर्थन करें.
इजरायली अधिकारियों के अनुसार, हमास लड़ाकों ने इजरायल पर हवा, जमीन और समुद्र के जरिए हमला कर करीब 1,400 लोगों को मार दिया जिनमें अधिकतर आम नागरिक थे.वहीं, फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार, गाजा पर इजरायल की बमबारी में कम से कम 2,750 लोग मारे गए है और लगभग 10,000 लोग घायल हुए हैं.
मलेशिया और इजरायल के बीच नहीं हैं राजनयिक संबंध
60 फीसद मुस्लिम आबादी वाला देश मलेशिया फिलिस्तीनी अधिकारों का मुखर समर्थक है और इजरायल के साथ उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं.पिछले हफ्ते, अनवर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना करते हुए कहा था कि इजरायल-हमास संघर्ष पर दुनिया का रुख एकतरफा है.
उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर किए गए एक ट्वीट में कहा, 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय फिलिस्तीनी लोगों के प्रति सभी प्रकार की क्रूरता और उत्पीड़न को लेकर एकतरफा रुख बनाए हुए है. फिलिस्तीनियों की जमीन और संपत्ति पर लगातार इजरायल कब्जा करता जा रहा है. इस अन्याय की वजह से सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान गई है. मलेशिया फिलिस्तीनी लोगों के संघर्ष के साथ एकजुटता से खड़ा है.'
इससे पहले मलेशियाई विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से युद्धविराम का आह्वान करने का आग्रह किया था.
राजधानी कुआलालंपुर में लगभग 1,000 मुसलमानों ने रैली कर फिलिस्तीनियों के प्रति अपना समर्थन जताया था. इस दौरान फिलिस्तीन की आजादी के नारे लगाए गए और इजरायली झंडे को जलाया गया.