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जाँच कमेटी और शिक्षा अधिकारी पर गोलमाल का आरोप, : निजी स्कूलों की लूट : हरिरामानी करेंगे भूख हड़ताल

तिल्दा-नेवरा। निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर फीस, किताबों और अन्य मदों में भारी-भरकम अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता और रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री विजय हरिरामानी ने आवाज उठाई है। उनकी शिकायत के बाद शासन ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से तीन प्राचार्यों की एक कमेटी बनाकर जाँच का आदेश दिया था।

जाँच कमेटी के समक्ष हरिरामानी ने लगभग 15 से 20 निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों से विभिन्न पहलुओं पर रचनात्मक चर्चा की। स्कूलों के प्रतिनिधियों ने कहीं भी शिकायतों को गलत नहीं ठहराया। यह सामने आया कि छत्तीसगढ़ बोर्ड के तहत पंजीकृत स्कूल छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम की मुफ्त किताबों के बजाय 5 से 6 हजार रुपये की निजी प्रकाशन की किताबें चला रहे हैं। इसी तरह, सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले स्कूलों में एनसीईआरटी की 1000 रुपये की किताबों के स्थान पर सेटिंग वाले प्रकाशन की 6000 रुपये की किताबें चलाई जा रही हैं। कुछ स्कूलों द्वारा तो खुद के अधिकृत व्यक्ति द्वारा किताबें बेची जा रही हैं, जिसकी जानकारी प्राचार्य कमेटी को भी है। इसके अतिरिक्त, अनावश्यक प्रोजेक्ट और असाइनमेंट के नाम पर हजारों रुपये खर्च करने और अप्रैल-जून महीने में कुछ दिन स्कूल लगाकर पूरे महीने की फीस व बस किराया वसूलने जैसे मुद्दे भी उठाए गए, जिन्हें स्कूल प्रतिनिधियों ने स्वीकार भी किया।

प्राचार्यों की कमेटी ने स्कूल वालों से खानापूर्ति के लिए विभिन्न जानकारी मंगवाई और हरिरामानी से लिखित में सभी शिकायतें ले लीं।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री दास ने हरिरामानी को आश्वासन दिया था कि किताबों से संबंधित शिकायत बिल्कुल जायज है और इसका समाधान तुरंत होगा। जिला शिक्षा अधिकारी विजय खंडेलवाल ने भी फोन पर कहा था कि किताबें छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम और एनसीईआरटी की ही चलेंगी, और इस आशय का पत्र शीघ्र ही जारी करने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि पुस्तकों की बिक्री में स्कूल के कोई बिचौलिए नहीं रहेंगे और अन्य मुद्दों का भी संयमपूर्वक समाधान किया जाएगा।

हालांकि, बीईओ ने जाँच कमेटी की रिपोर्ट के बारे में कहा कि निजी स्कूलों के खिलाफ कोई खास बात नहीं लिखी गई है, मगर बेजा वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हरिरामानी और जनजागरण समिति के सदस्यों ने जिला अधिकारी से बात की कि अन्य जिलों में यह पत्र जारी हो चुका है, तो उन्होंने पत्र की कॉपी भेजने पर तुरंत अपने क्षेत्र के लिए पत्र जारी करने का आश्वासन दिया। मगर गरियाबंद जिले के शिक्षा अधिकारी के पत्र की कॉपी उपलब्ध करवाने के बाद भी विजय खंडेलवाल द्वारा पत्र जारी नहीं किया गया है। अब ऑफिस जाने पर उनसे मुलाकात नहीं हो रही है और उनके द्वारा फोन अटेंड नहीं किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, जाँच कमेटी के प्राचार्यों ने स्कूलों के दबाव में या निजी स्वार्थ के चलते रिपोर्ट में कुछ मुद्दों पर स्कूलों के मैनेज-मेंट को सही ठहराया है, तो कुछ बड़े मुद्दों का जिक्र ही नहीं किया है। ऐसे में अभिभावकों में इन प्राचार्यों के प्रति काफी रोष व्याप्त है, और खुद उनकी जाँच की माँग उठने लगी है।

जनजागरण समिति के सदस्यों सुनील सोनी, कैलाश गाँधी, लाला शर्मा, मनोहर भोजवानी, अनूप रवानी, संजय वाधवानी, राजेश कोटवानी और कई अभिभावकों ने किताबों के बारे में आदेश तुरंत जारी करने तथा निजी स्कूलों की लूट पर रोक लगाने की अपील की है। हरिरामानी ने कहा है कि अगर जनता और अभिभावकों को न्याय नहीं मिला, तो वह उनके पक्ष में भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

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