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पिछले 12 वर्षों की गौसेवा के सफर का बताया अनुभव : गौसेवा के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ रही है:सिमरन

Ramesh Batra

Sun, May 4, 2025

तिल्दा-नेवरा!

लगभग एक दशक से गोवंश सेवा और उसकी जागरूकता के प्रयास में कोई महिला लगी हैं, जो बेजुबान जीव के दर्द का अनुभव करती है, यह जानकारी मिलने पर हमने सिमरन खूबचंदानी से मुलाकात की और गाय माता की सेवा से संबंधित बातचीत की।

पिछले कुछ वर्षों से यह परंपरा कुछ ज्यादा ही हो गयी है, कि गाय जब दूध देना बंद कर देती है, तो उसे सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। ऐसे में सड़कों पर दुर्घटनाओं की संख्या काफी बढ़ती जा रही है । एक तरफ गोवंश गंभीर रूप से घायल होते हैं, दूसरी तरफ वाहन चालक भी चोटिल होते हैं। कई बार गायों को ट्रक में कुचलते देखा गया है। इन्हीं घटनाओं का संज्ञान लेकर सिमरन ने गौसेवा का संकल्प लिया। गोवंश की चोट का इलाज करवाना, ज्यादा खून बहने से उन्हें हॉस्पिटल भेजना इस सेवा की दिनचर्या है। कई बार ऐसा भी होता है, कि तिल्दा में इलाज न होने पर अन्य संस्थाओं व व्यक्तियों के सहयोग से जिला अस्पताल रायपुर में शिफ्ट करवाया जाता है।

गौसेवा के लिए समाज में जागरूकता पैदा करने पर जोर देते हुए सिमरन ने कहा कि गाय के प्रारंभिक इलाज के लिए जरूरी इंजेक्शन, स्प्रे व ड्रेसिंग का सामान रखना जरूरी है। साथ ही आपसी सामंजस्य से यह काम काफी आसान हो जाता है। कई लोगों और संस्थाओं का सहयोग निरंतर मिलता रहा है।

गौवंश की सेवा के लिए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने सिमरन खूबचंदानी को सम्मानित किया है। आगे वह सेवा का सफर कब तक जारी रखती हैं, पता नहीं। मगर उनका प्रयास है कि समाज में आ रही जागरूकता कायम रहे और गोवंश की देखभाल जारी रहे।

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