: CAA को लागू होने से कोई नहीं रोक सकता: शाह
Wed, Dec 27, 2023
नई दिल्ली.
CAA यानी नागरिकता संशोधन कानून को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सरकार के इरादे साफ कर दिए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बताया कि इसे लागू होने से कोई भी नहीं रोक सकता। उन्होंने इसे देश का कानून बताया है। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी घेरा।
खास बात है कि टीएमसी सीएए का विरोध कर रही है, जिसे 2019 में संसद द्वारा पारित किया गया था। शाह ने यहां नेशनल लाइब्रेरी में प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के सोशल मीडिया और आईटी इकाई के सदस्यों को संबोधित किया। बंद कमरे में एक बैठक को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि सीएए को लागू करना पार्टी की प्रतिबद्धता है। शाह ने विश्वास जताया कि BJP राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 35 से अधिक सीटें हासिल करेगी। 2019 के लोकसभा चुनाव में, भाजपा ने 18 सीट पर जीत दर्ज की थी।
बंगाल भाजपा की मीडिया इकाई ने बंद कमरे में आयोजित कार्यक्रम में शाह के भाषण के बिंदुओं की एक सूची साझा की। बाद में शाम को इसने शाह के भाषण की कुछ वीडियो क्लिप भी साझा कीं। उन्होंने पार्टी कार्यक्रम में कहा, 'हमें अगले विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनाने के लिए काम करना है। भाजपा सरकार का मतलब घुसपैठ, गौ तस्करी का अंत और सीएए के माध्यम से धार्मिक आधार पर सताये गए लोगों को नागरिकता प्रदान करना होगा।' इसका एक वीडियो क्लिप भाजपा की मीडिया इकाई ने साझा किया।
शाह ने सीएए के मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने के लिए बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी, वह लोगों, शरणार्थियों को गुमराह करने की कोशिश करती हैं कि क्या सीएए देश में लागू होगा या नहीं। मैं यह स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि सीएए देश का कानून है और कोई भी इसके क्रियान्वयन को रोक नहीं सकता है। यह हमारी पार्टी की प्रतिबद्धता है।'
: अब भारत न्याय यात्रा पर निकलेंगे राहुल गांधी, मणिपुर से होगी शुरुआत
Wed, Dec 27, 2023
नई दिल्ली.
राहुल गांधी अब आम चुनाव से पहले एक और यात्रा पर निकलने वाले हैं। वह 14 जनवरी से मणिपुर से मुंबई तक की यात्रा पर निकलेंगे, जो 20 मार्च तक चलेगी। 14 राज्यों से गुजरने वाली यह यात्रा पूर्वोत्तर भारत से देश के पश्चिमी हिस्से को जोड़ेगी। लंबे समय से चर्चा थी कि राहुल गांधी एक और यात्रा पर निकलने वाले हैं, जिसका अब ऐलान हुआ है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि रणनीति के तहत इसकी शुरुआत मणिपुर से करने का फैसला हुआ है, जहां भीषण दंगे हुए थे। इससे कांग्रेस दंगों के मामले में भाजपा को घेरने की कोशिश करेगी। इसके अलावा महाराष्ट्र तक जाने का प्लान है।
खबर है कि यह यात्रा पूरी तरह से पैदल नहीं होगी बल्कि हाइब्रिड मोड में होगी। इस यात्रा पर निकले राहुल गांधी आम लोगों से मुलाकात करेंगे और सामाजिक संगठनों के लोगों से भी बातचीत करेंगे। इससे पहले बीते साल भी राहुल गांधी ने 5 महीने लंबी यात्रा निकाली थी। यह यात्रा कन्याकुमारी से शुरू होकर श्रीनगर गई थी। इस यात्रा के तहत 150 दिनों में 4500 किलोमीटर का सफर तय किया गया था। हालांकि इस यात्रा में कई अहम राज्य छूट गए थे। अब कांग्रेस पार्टी उन राज्यों को कवर करने का प्रयास करेगी। बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस इस यात्रा को अपनी ताकत बढ़ाने के अवसर के तौर पर देख रही है।
बता दें कि 21 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग थी। इस मीटिंग में पार्टी नेताओं ने मांग की थी कि राहुल गांधी को अगली यात्रा पर निकलना चाहिए। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि 14 जनवरी को मल्लिकार्जुन खरगे इम्फाल में यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे। जयराम रमेश ने कहा कि यह गरीबों के साथ हुए आर्थिक, सामाजिक अन्याय पर फोकस यात्रा होगी। वेणुगोपाल ने यात्रा के रूट की पूरी जानकारी देते हुए कहा कि यह 14 राज्यों के 85 जिलों से होकर गुजरेगी।
UP-बिहार समेत इन राज्यों से होकर गुजरेगी राहुल गांधी की यात्रा
यात्रा के तहत राहुल गांधी और उनकी टीम मणिपुर से शुरुआत कर नागालैंड होते हुए असम, मेघालय के रास्ते बंगाल आएगी। फिर बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, यूपी और एमपी का रूट बनेगा। यही नहीं मध्य प्रदेश से निकलकर यात्रा राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जाएगी। इस तरह पूर्वोत्तर भारत से निकली यात्रा मध्य, उत्तर भारत से होते हुए पश्चिमी राज्यों तक जाएगी। इससे पहले पार्टी ने अरुणाचल से गुजरात के पोरबंदर तक का प्लान बनाया था, लेकिन मणिपुर में हुई हिंसा के बाद योजना बदल गई।
: नीतीश कुमार को संयोजक बनाने के लिए INDIA ने कर ली थी तैयारी
Wed, Dec 27, 2023
नई दिल्ली.
नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की हाल ही में संपन्न हुई बैठक के बाद से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उनकी पार्टी के अधिकांश नेता भी इस मामले पर कुछ भी खुलकर बोलने से परहेज कर रहे हैं। इस बीच सियासी गलियारों में चर्चा है कि इंडिया गठबंधन के घटक दल जेडीयू नेता के लिए बड़ी जिम्मेदारी को लेकर लगभग मन बना चुके थे, लेकिन हिंदी और हिन्दुस्तान को लेकर वे सभी पीछ हट गए।
इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार उस समय भड़क गए थे, जब डीएमके नेता टीआर बालू ने आरजेडी सांसद मनोज झा से नीतीश कुमार के भाषण का अंग्रेजी में अनुवाद करने के लिए कहा।
सूत्रों का कहना है कि इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के बीच नीतीश कुमार की जिम्मेदारी को लेकर एक सहमति बन चुकी थी। ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री पद के लिए मल्लिकार्जुन खरगे का नाम आगे बढ़ाया। इसके बाद नीतीश कुमार के लिए संयोजक पद का ऐलान होना था, लेकिन उससे पहले बैठक में अपने भाषण के दौरान वह हिंदी के मुद्दे पर डीएमके नेता टीआर बालू पर भड़क गए। नीतीश कुमार ने यहां तक कह दिया कि हिन्दुस्तान में जो भी है उसे हिंदी आनी चाहिए। उनके इस बयान से बैठक में शामिल नेता हैरान हो गए। इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल कुछ नेताओं का मानना था कि नीतीश कुमार को संयोजक पद की जिम्मेदारी देनी चहिए। लेकिन हिन्दुस्तान और हिंदी को लेकर नीतीश कुमार के द्वारा दिए गए बयान के बाद सभी ने चुप्पी साध ली। सूत्रों का यह भी कहना है कि नीतीश कुमार कांग्रेस पार्टी के द्वारा उनके और टीआर बालू के बीच हुई बातचीत को लीक करने को लेकर काफी नाराज हैं।
ललन सिंह के इस्तीफे की अटकलें
मंगलवार को बिहार की राजनीति उस समय गरमा गई जब जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह के इस्तीफे को लेकर कयासबाजी होने लगी। हालांकि, जेडीयू ने इसका खंडन किया है। इस बीच नई दिल्ली में 28 दिसंबर को जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद की महत्वपूर्ण बैठक भी बुलाई गई है। इस बैठक की घोषणा इंडिया गठबंधन की बैठक के तुंरत बाद की गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि इसमें ललन सिंह इस्तीफा दे सकते हैं और पार्टी की कमान फिर एकबार नीतीश कुमार के हाथों जा सकती है।