: CM चौहान के साथ जन-प्रतिनिधियों ने रोपे पौधे
Thu, Jul 6, 2023
मुख्यमंत्री ने लगाए आम, नीम और केसिया के पौधे
भोपाल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्यामला हिल्स स्थित उद्यान में आम, नीम और केसिया के पौधे रोपे। मुख्यमंत्री के साथ छिंदवाड़ा, टीकमगढ़, रेहटी और बुधनी से आए जन-प्रतिनिधियों ने भी पौधे रोपे।मुख्यमंत्री के साथ सर्वरणवीर सिंह चंद्रवंशी, राजेश सिंह और कुमारी तोस्ती सराठे ने अपने जन्म-दिवस पर पौध-रोपण किया। पौध-रोपण में छिंदवाड़ा के सर्वगणेश प्रसाद, शेखर सोनी, दिलीप गुप्ता, सुकिरण खातरकर, टीकमगढ़ के सर्वअभय प्रताप सिंह यादव, योग रंजन, प्रवीण चौधरी, अंकित तिवारी, शिवम विश्वकर्मा, अशोक राय, बृजेंद्र लोधी, शैलेंद्र घोष, रहटी के सर्वसुमित चौहान, विनोद नागर और नरेंद्र लोवंशी भी शामिल हुए।
: पहले युवाओं को प्रशिक्षण दें फिर रीपा से जोड़ें-CM
Thu, Jul 6, 2023
रायपुर
CM भूपेश बघेल अपने निवास कार्यालय में महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क(रीपा) के गतिविधियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि पहले युवाओं को प्रशिक्षण दें फिर रीपा से जोड़ें ताकि राज्य में उद्यमशीलता बढ़े। उन्होंने कहा कि कुछ बातों को ध्यान में रखनी जरूरी है। जो उद्यम आ रहे हैं, उनकी फिजिबिलिटी भी देखें ताकि पूरी तरह से सफलता उद्यमियों को मिल सकें।मुख्यमंत्री ने कहा कि रीपा में अनेकों तरह की गतिविधि संचालित हो रही है, बेकरी एवं खाद्य उत्पाद, मिलेट, परिधान, निर्माण आदि क्षेत्रों में अच्छा काम हो रहा है और भी उद्यमी आगे आ रहे है।बैठक मे मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी उत्पादों ऑनलाइन आपूर्ति की व्यवस्था हो, सीमार्ट में इनकी उपलब्धता हो। अधिकारियों ने बताया कि अन्य शॉपिंग मॉल में भी इनकी उपलब्धता पर बात की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्पादनकर्ता को बाजार से जोड़ना बेहद जरूरी है। इससे उद्यमशीलता को बढ़ावा मिलता है।गोबर पेंट के निर्माण और बिक्री के संबंध में चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय भवनों में रंगरोगन के लिए गोबर पेंट का उपयोग हो रहा है। निजी क्षेत्रों में भी इसकी बिक्री बढ़ाएं। बड़े निर्माण कार्यों जैसे हाउसिंग बोर्ड के प्रोजेक्ट में इसे उपयोग किया जा सकता है। रीपा की समीक्षा कर रहे मुख्यमंत्री बघेल को अधिकारियों ने उन्हें हुए जानकारी देते हुए बताया कि 90 प्रतिशत रीपा में वाईफाई सुविधा उपलब्ध है। वाईफाई जोन का बड़ा लाभ हुआ है।वाई-फाई की सुविधा होने से 12 रीपा केंद्रों में रेस्टोरेंट अच्छे से संचालित है। रीपा में डिजिटल कनेक्टिविटी अच्छी होने के कारण युवा भी लाभ उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटली जुडने से इसका बड़ा लाभ सबको मिलेगा। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को इस बात से भी अवगत कराया कि संभाग स्तरीय मिलेट कार्निवाल के लिए योजना तैयार हो रही है। गोबर पेंट के उपभोक्ताओं से भी फीडबैक लिए जा रहे हैं।रीपा के लिए तकनीकी सहायता हेतु सीएफटीआरआई में एक दल भ्रमण के लिए जाएगा। चूंकि ग्रामीण विकास मंत्रालय का संस्था से अनुबंध है, अतएव तकनीकी सहायता वहां से भी मिल सकेगी।तमनार के प्रभात पटनायक का उदाहरण मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया। 18 लाख रुपये से प्रभात ने फेब्रिकेशन का काम रीपा में आरम्भ किया। इससे 4 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। आरंग का उदाहरण भी बताया गया कि कैसे हरेली को देखते हुए यहां पूजा किट तैयार की गई।इसमे गेड़ी निर्माण किया जा रहा है।
: BU में 50 क्विंटल से अधिक कबाड़ इकठ्ठा, हादसे के इंतजार में प्रबंधन
Thu, Jul 6, 2023
भोपाल
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में बड़ी मात्रा में कबाड़ पड़ा हुआ है। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। विभागों से निकलने वाले खराब कंप्यूटर, कूलर, ब्रेंच, टेबल, कुर्सी, प्लास्टिक, बॉटल, टायर, पेपर आदि का विवि में ढेर लगा है, जिसे सालों से बेंचा नहीं गया है। यह कबाड़ बीयू के विभिन्न डिपार्टमेंट में सालों से पड़ा जंग खा रहा है।बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में कबाड़ के जमा होने से यहां कभी भी कोई दुर्घटना घट जाए इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। कुछ दिन पहले सतपुड़ा भवन में आग लगने का कारण भी पुराना कबाड़ ही बताया जा रहा है। हर डिपार्टमेंट में 4 से 6 क्विंटल कबाड़ कर्मचारी और प्रोफेसर्स के अनुसार विवि के हर डिपार्टमेंट में 2 से 3 क्विंटल कबाड़ पड़ा हुआ है। इसके अलावा 15 से 20 क्विंटल कबाड़ बाहर खुले में पड़ा है। इसमें ई-कचरा भी शामिल है, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है।बीयू में कॉपी-किताबों की तरह कबाड़ को भी डिस्पोज करने के लिए कमेटी बनाई जाती है। डिपार्टमेंट के एचओडी के पत्र के बाद कमेटी द्वारा इसे डिस्पोज करने का निर्णय लिया जाता है, लेकिन करीब 15 सालों से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। स्थिति यह है कि इतना सालों में करीब 50 क्विंटल कबाड़ बीयू में इकट्ठा हो गया है।
खुले में ई-कचरा
बीयू में बड़ी मात्रा में ई-कचरा भी पड़ा है। इसमें खराब कंप्यूटर भी शामिल हैं। कंप्यूटरों में आमतौर पर तांबा, इस्पात, एल्युमिनियम, पीतल, सीसा, कैडमियम तथा चांदी के अलावा कांच और प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनसे क्लोरीन एवं ब्रोमीन युक्त पदार्थ, विषैली गैसें, फोटो एक्टिव और जैविक सक्रियता वाले पदार्थ अम्ल और प्लास्टिक आदि होता है।कबाड़ से पार्क, खेल ग्राउंड एवं विवि की सड़क किनारे रखने के लिए कुर्सी एवं ब्रेंच तैयार होंगी। जो कचरा उपयोग में नहीं आ सकता उसे डिस्पोज किया जाएगा।
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सुरेश कुमार जैन
, कुलपति, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय