: सुबह हो या शाम इनके रग-रग में समाए हैं राम-राम
Tue, Jan 23, 2024
जयपुर.
सुबह हो या शाम, इनके रग-रग में समाए हैं राम-राम...राम-राम... जी हां भगवान राम की भक्ति में दिन-रात लीन रहने वाले छत्तीसगढ़ के रामनामी अपने शरीर को ही मंदिर मानते हैं। वो अपने शरीर पर गोदना से राम-राम नाम गोदवाए सबको राम राज का संदेश देते हैं। समरसता का संदेश देते हैं। ये रामनामी हैं और न सिर्फ इनका चोला... शरीर का हर हिस्सा राम...राम...राम...के अक्षरों से नस-नस में विद्यमान है।
शरीर पर श्वेत परिधानों के साथ मोह, माया, लोभ, काम, क्रोध और व्यसनों को त्याग कर सबको भाई-चारे के साथ बिना किसी भेदभाव के शांतिपूर्ण तरीके से जीवनयापन का संदेश भी देते हैं। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सक्ती के जैजैपुर विकासखंड में रामनामी समुदाय का तीन दिवसीय बड़े भजन का मेला नई पीढ़ी और पहली बार देखने वालों के लिए जहां कौतूहल का केंद्र बना है। वहीं इसके विषय में पहले से जानने और समझने वालों के लिए यह सम्मान और गौरव से कम नहीं...। अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा से राममय हुए माहौल के बीच रामनामी समुदाय का बड़े भजन का यह मेला भी सद्भावना और मानवता का संदेश दे रहा है।
राम के प्रति अथाह प्रेम और अटूट आस्था की गाथा हैं रामनामी
अपने राम के प्रति अगाध,अथाह प्रेम और अटूट आस्था की यह गाथा हकीकत में कही विराजमान है, तो वह छत्तीसगढ़ के रामनामी समुदाय ही हैं। भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में रामनामी समुदाय का पादुर्भाव कई उपेक्षाओं, तिरस्कारो और संघर्षों की दास्तान है, जो 160 वर्ष से अधिक समय पहले अपनी आस्था पर पहुंची चोट के साथ इस रूप में जन्मी कि आने वाले काल में इन्हें अपनाने और मानने वालों की संख्या बढ़ती चली गई। वह दौर भी आया जब रामनामी समुदाय अपनी तपस्या और सादगी को अपनी उपासना के बलबूते साबित करने में सफल हुए।
नहीं करते हैं अपने शरीर पर राम... राम लिखवाने से परहेज
इनका मानना है कि उनका राम तो हर जगह मौजूद है। वे अपने राम को कही ढूंढते भी नहीं.. न ही अपने शरीर पर राम... राम लिखवाने से परहेज करते हैं। रामनामी समाज के गुलाराम रामनामी बताते हैं कि उनका यह आयोजन सन 1910 से होता आ रहा है। जैजैपुर का आयोजन 115वां वर्ष है। साल में एक बार यह आयोजन बड़े भजन मेला के रूप में निरंतर किया जाता है। उन्होंने बताया कि रामनामी को कोई भी समाज और धर्म के लोग अपना सकते हैं,लेकिन उन्हें सदाचारी, शाकाहारी और नशे आदि से दूर रहते हुए मानवता के प्रति प्रेम को अपनाना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि रामनामी अपने शरीर पर राम...राम लिखवाने के साथ ही कभी सिर पर केश नहीं रखते, महिला हाथों में चूड़ी या गले में माला भी नहीं पहनती। शरीर पर राम ही राम धारण होता है और यह प्राण त्यागने के बाद भी मिट्टी में दफन होते तक आत्मसात रहता है।
राम को अपने जीवन और शरीर में किए हैं आत्मसात
82 साल के रामनामी तिहारुराम ने बताया कि उनकी पत्नी फिरतीन बाई और उन्होंने चार दशक पहले ही राम को अपने जीवन और शरीर में आत्मसात किया है। एक साल पहले वे अयोध्या भी गए थे, इस बार रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रण आया था। यहां से रामनामी गए हैं और खुशी व्यक्त करते हुए कहते हैं कि सभी की कामना है कि जाति-पाति, ऊंच-नीच खत्म हो, समाज में भाईचारे के साथ सद्भावना का विकास हो। रामनामी समाज में महिला और पुरूष में कोई भेदभाव नहीं होने की बात कहते हुए तिहारु राम बताते हैं कि वे लोग मूर्तिपूजा नहीं करते, रामायण का पाठ करते हैं और अपने राम का जाप करते हुए मानवता का संदेश देते हैं। लगभग 80 साल के रामभगत, 75 साल की सेतबाई ने भी शरीर पर राम..राम गुदवाया है। वे कहते हैं कि यहीं राम उनकी आस्था और प्रेरणा भी...। यह अमिट लिखावट उन्हें कभी भी किसी के प्रति दुराचार या गलत आचरण की ओर नहीं ले जाती।
कलश यात्रा के साथ श्वेत ध्वज चढ़ाकर मेले की शुरुआत
ऐतिहासिक और गौरवान्वित करने वाला रामनामी मेला,बड़े भजन का मेला किसी पहचान का मोहताज नहीं है। आज 115वां मेला का शुभारंभ सक्ती जिले के जैजैपुर ब्लॉक मुख्यालय में हुआ। इस दौरान आसपास सहित दूरदराज गांवों से बड़ी संख्या में रामनामी समाज के लोग और ग्रामीण पहुंचे। गांव के मदन खांडे के निवास से पूजा अर्चना के पश्चात धान से राम..राम लिखकर कलश यात्रा निकाली गई, जो कि गाँव के प्रमुख गलियों से होकर मेला स्थल बरछा में छतदार जैतखाम तक पहुंची। यहां ध्वज चढ़ाने के साथ ही भजन-आरती की गई। सिर पर मोरपंख के साथ मुकुट धारण किए रामनामी को अपने आराधना और आराध्य देव राम के भक्ति भावना में लीन होकर चलते हुए देखकर लोगों के मन में राम के प्रति श्रद्धा और विश्वास और भी कायम होता नजर आया।
खींचे चले आते हैं मेले में और फिर दोबारा आने की मंशा
रामनामी मेला हर साल किसी न किसी गाव में होता आ रहा है। इस मेले में एक बार आने वाले समय मिलते ही दोबारा जरूर आते हैं। अब तक आठ बार रामनामी मेले में आ चुकी वृद्धा कचरा बाई कहती है कि मुझे यहां आकर बहुत ही खुशी की अनुभूति महसूस होती है। कौशल्या चौहान बताती है कि वह तीसरी बार इस मेले में आई है। दिल्ली से आये सरजू राम ने बताया कि वह कई मेले में शामिल हो चुका है। यह मेला सभी समाज को जोड़ने और मानवता को बढ़ावा देने के संदेश को विकसित करता है। मेला समिति के अध्यक्ष केदारनाथ खांडे ने बताया कि दूरदराज से आए ग्रामीण मेला में पूरे तीन दिन तक ठहरते भी हैं, यहाँ लगातार भंडारा भी चलता रहता है। इस दौरान राम...राम..राम की आस्था उन्हें दोबारा आने के लिए उत्सुक भी करती है।
गांव के दंपति ने दानभूमि में बनाया है छतदार जैतखाम
भगवान राम के लिए अपनी जीवन समर्पित करने वाले रामनामी समुदाय का यह मेला वास्तव में समाज को जोड़ने और मानवता को विकसित करने वाला होता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि गाँव के अनेक लोग जो अन्य समाज के है उन्होंने अपनी कीमती भूमि छतदार जैतखाम के निर्माण के लिए दान की। गांव के पंचराम चंद्रा और श्रीमती लकेश्वरी चंद्रा ने मेला स्थल पर भूमि दान की है वहीं अन्य ग्रामीण भी है,जिन्होंने निःस्वार्थ अपनी कीमती जमीन दान की है।
वर्ष 1910 में पिरदा में पहली बार लगा था मेला
रामनामी बड़े भजन का मेला,संत समागम का आयोजन वर्ष 1910 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। पौष शुक्ल पक्ष एकादशी से त्रयोदशी तक 3 दिवस चलने वाले इस मेले में भजन और 24 घण्टे राम नाम जाप किया जाता है। पैरों में घुँघरू के साथ राम..राम लय में गाते हुए नृत्य करते हैं और मेले की शोभा को बढ़ाते हुए रामनाम के संदेश को सभी के मन में समाहित करने कामयाब भी होते हैं।
: श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा : राममय हुआ छत्तीसगढ़
Tue, Jan 23, 2024
रायपुर.
अयोध्या में आज सोमवार को श्रीरामलला मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर भगवान राम के ननिहाल और मामा के घर छत्तीसगढ़ में रामोत्सव पर जश्न का माहौल है। सभी भगवान श्रीराम के आगमन पर उनका स्वागत कर रहे हैं। रायपुर समेत प्रदेश के सभी मंदिरों में राम नाम की गूंज सुनाई दे रही है। गली-मोहल्लों और चौक-चौराहों पर जय श्रीराम... जय सियाराम... जय सीताराम... के जयघोष लग रहे हैं।
पूरा प्रदेश रामनाम के जयकारे से गूंजयमान हो रहा है। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। लोग लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। राजधानी रायपुर के महादेव मंदिर हटकेश्वनाथ, श्रीराम मंदिर वीआईपी चौक, जैतूसाव मठ पुरानी बस्ती, दूधाधारी मठ, गुढ़ियारी श्रीराम मंदिर, जगन्नाथ मंदिर शंकर नगर, सर्वधर्म मंदिर रेलवे स्टेशन में लोग पहुंचकर प्रभु राम की पूजा अर्चना कर रहे हैं। आरती उतार रहे हैं। मंदिरों में घंटी, शंख, घंटा और घड़ियाल की आवाज से पूरा वातावतरण भक्तिमय हो गया है। हर तरफ श्रीराम के जयकारें लग रहे हैं। पूरा रायपुर राममय हो गया है। मंदिरों, गलियों, कस्बों, बाजार, चौक-चौराहों, धार्मिक स्थलों, सरकारी इमारतों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी भवनों को आकर्षक तरीके से संजाया गया है। तोरण और झंडे से पूरा शहर दुल्हन की तरह सज गया है।
: Korba: अयोध्यापुरी में सीता का हुआ जन्म, परिवार में खुशी का माहौल
Tue, Jan 23, 2024
कोरबा.
भारत सहित विश्व के 57 देशों में भगवान श्रीरामचंद्र के प्राण प्रतिष्ठा दिवस को धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसे रामोत्सव का नाम दिया गया है। इधर कोरबा जिले के अयोध्यापुरी में इसी दिन सीता का अवतरण हुआ। इससे परिवार में खुशी का वातावरण है।
खास दिवस को धरती पर जन्म लेने वाले शिशु के नामकरण को लेकर परिजन करते हैं। इस बीच श्री रामचंद्र के अयोध्या में नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर कोरबा जिले के अयोध्यापुरी में रवि शंकर और मीना साहू सहित परिवार की खुशियां बढ़ गई जब उनके यहां एक नई सदस्य का आगमन हुआ।
पहले से इस परिवार में दो बेटियां हैं। खास दिन नई बेटी के जन्म लेने पर उसका नाम सीता रखा गया। सीएसईबी में काम करने वाले रवि शंकर साहू ने बताया कि यह दिन उनके लिए बेहद विशेष हो गया। दर्री अयोध्यापुरी निवासी रवि शंकर ने बताया कि वह सीएसईबी कर्मी है उसके दो बेटियां हैं और आज जो जन्म ली है वह तीसरी है। अयोध्या में जिस तरह से राम मंदिर का निर्माण हो रहा है इस शुभ दिन में उसकी बेटी का इस संसार में आना और उन्हें सेवा का जो मौका मिला है उसे वह कभी नहीं भूल सकता उसने पहले से ही सोच रखा था कि इस पवित्र दिन में अगर लड़का होता है तो उसका नाम राम रखेगा वहीं लड़की होती है तो सीता रखेगा। वहीं उसका सपना पूरा हुआ की साक्षात उसके घर मैया सीता ने जन्म लिया है और वह बेहद खुश है।
इसके अलावा जिला मेडिकल कॉलेज में जन्म लिए शिशु के माता-पिता ने भी यही कहा कि आज उनके घर जन्म हुए बच्चे का नाम भगवान राम और मैया सीता के तर्ज पर ही रखेंगे आज उनके लिए भी बड़ा सौभाग्य के दिन है। जिला मेडिकल कॉलेज परिसर के प्रवेश द्वार पर भी गणेश जी के मूर्ति पर दीप प्रज्वलित कर श्री राम के नाम का रंगोली बनाया गया था ताकि यहां पहुंच कर प्रभु राम के दर्शन कर सारी परेशानियां उनकी दूर हो सके। जिला मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आदित्य सिसोदिया ने बताया कि आज दिन भर में नव प्रश व जिला मेडिकल कॉलेज में कराया गया जहां जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।