: जो नकारात्मक सोचेगा उसका अंत भी वैसा ही होगा
Thu, Dec 21, 2023
रायपुर
अपने आप को जान लेना ही भगवान को जान लेना है। जो लोग यह कहते है कि भरत की वाणी कठिन है तो ऐसे लोगों ने न तो अपने को जाना है और न राम को जाना है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसके जीवन में प्रतिकूल परिस्थिति न आया हो। प्रेम में अनुबंध होता ही नहीं, प्रेम में तो केवल संबंध होता है, जिस दिन अपने में दोष और अपूर्णता और भगवान में पूर्णता देखना सीख लिया तो जीवन धन्य हो जाएगा।
मैक कॉलेज आॅडिटोरियम में श्रीराम कथा प्रसंग में भरत चरित्र की व्याख्या को आगे बढ़ाते हुए मैथिलीशरण भाई जी ने कहा कि भगवान के प्रति भक्तिभाव का जो लोग समीक्षा करते है वह स्वार्थ है, परमार्थ नहीं। मानस में बताया गया है कि प्रतिकूल परिस्थितियां भगवान के भक्त भरत और विभीषण पर कैसे आई? संसार में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं होता जिसके जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियां न आई हो, फिर भी हर स्थिति में भगवान की स्मृति न खोने वाला सच्चा भक्त है। इतिहास जो होता है वो पोस्टमार्टम करता है, पुराण आॅपरेशन करते है और कथा भूत को वर्तमान बना देता है। कथा जीवन में हमारा परम सत्य है और जिस दिन लक्ष्य की प्राप्ति हो गई तो समझो कथा में प्रवेश हो गया।
प्रेम में अनुबंध नहीं होता, केवल संबंध होता है। लकड़ी की पादुका पाकर भी भरत जी प्रसन्न हो गए इतना कि पादुका में साक्षात भगवान को अनुभव कर रहे है। अहम से मुक्त व्यक्ति अपनी बात मनवाने के लिए न धरना देते है, न आग्रह और न प्राण देने की बात कहते है। भरत जी ने भी चित्रकूट में भगवान राम से अयोध्या लौटने के लिए ऐसी कोई बात नहीं कही। जहां श्रद्धा और समर्पण रहता है ऐसे लोग अपनी मान्यता को भी 10 इंच पीछे छोड़ देते है।
भाईजी ने भरत को भगवान राम की बांसुरी बताया है। जो राम बोलवायेंगे वही भरत बोलेगा। लक्ष्मण, केंवट, भरत जैसे पात्र प्रेम के साक्षात स्वरुप है। ज्ञान धर्म ग्रंथों से पढ़ा जाता है, पढ़ाया जाता है, उससे भी ऊपर उठ जाए तो यह परम बल है। जो नकारात्मक सोचेगा उसका अंत भी वैसा ही होगा, जो सकारात्मक है उस व्यक्ति के अंदर नकारात्मकता कभी नहीं आएगा। गुण-दोष आंखों से पता चल जाता है, जब कोई प्रेम के अनुबंध में अपने आप को श्रेष्ठ दिखाने की चेष्टा करता है तो विवेक को सावधान कर दीजिए, आज्ञा देने वाला माता, पिता या गुरु अपने किसी पूर्व संस्कार का वसीभूत तो नहीं है। आपके दोष या कमी को जो सार्वजनिक तौर पर बताएगा व आपका हितैषी या शुभचिंतक नहीं है।
भाईजी ने बताया कि पंचतत्व के आधार पर अपना जीवन यापन करें। सबके प्रति हमारा दायित्व है सूर्य की तरह प्रकाश, चंद्रमा की तरह शीतलता और वायु की तरह हवा प्रदान करें। परिवार में सबका ध्यान रखो। राम की तरह मुखिया होगा तो राम राज्य बनेगा और धृतराष्ट्र की तरह होगा तो महाभारत होगा।
: भारत संकल्प यात्रा की मोबाईल वैन के माध्यम से बनाया जा रहे आयुष्मान कार्ड
Thu, Dec 21, 2023
राजनांदगांव
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत सरकार की योजनाओं से नागरिकों को जागरूक करने एवं शासन की योजनाओं से लाभान्वित करने के उद्देश्य से विकसित भारत संकल्प यात्रा की मोबाईल वैन के माध्यम से आयुष्मान कार्ड बनाया जा रहा है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब हितग्राही अपना एवं अपने परिवार का आयुष्मान कार्ड मोबाईल एप के माध्यम से स्वयं नि:शुल्क बना सकते हैं। इसके लिए राशन कार्ड एवं आधार कार्ड दस्तावेज की आवश्यकता होगी।
आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सर्वप्रथम प्ले स्टोर से आयुष्मान ऐप एवं आधार फेस आईडी एप को डाउनलोड कर लें। इसके बाद आयुष्मान ऐप में लॉगिन पर जायें और बेनिफिसरी विकल्प को चुने। फिर अपना मोबाईल नंबर दर्ज करें एवं ओटीपी डालकर लॉगिन करें। स्टेट छत्तीसगढ़ व स्कीम राशन कार्ड विकल्प का ही चयन करें। सर्च बाय में डिस्ट्रिक में अपना जिला चुने और फैमिली आईडी में राशन कार्ड नंबर दर्ज कर सर्च करें।
परिवार के सदस्यों की जानकारी प्रदर्शित होगी, जिन सदस्यों का नाम हरा रंग में होगा, उनका आयुष्मान कार्ड बन चुका है एवं जिन सदस्यों का नाम नारंगी रंग में होगा उनका कार्ड बनाना होगा। उनके नाम के सामने डू ई-केवाईसी विकल्प प्रदर्शित होगा। डू ई-केवाईसी विकल्प का चयन करें आगे आधार प्रमाणीकरण व सत्यापन हेतु 4 विकल्प आधार ओटीपी, फिंगर प्रिंट, ईरिस स्कैन व फेस एयेंटिफिकेशन प्रदर्शित होंगे। यदि आधार कार्ड से लिंक मोबाईल नंबर उपलब्ध हैं, तो आधार ओटीपी विकल्प का चयन करें और यदि आधार से लिंक मोबाईल नंबर उपलब्ध नहीं हो तो फेस एयेंटिफिकेशन विकल्प का चयन करें। यदि आपके पास फिंगर प्रिंट बायोमेट्रिक डिवाइस उपलब्ध हैं, तो फिंगर प्रिंट विकल्प का चयन कर आधार प्रमाणीकरण पूर्ण कर ले। आधार प्रमाणीकरण के बाद कैप्चर फोटो विकल्प पर जाकर अपना क्लोजअप फोटो कैप्चर करना होगा। इसके पश्चात पता व मोबाईल नंबर की जानकारी भर कर सबमिट बटन पर क्लिक करें। इस प्रकार सबमिट करते ही आपका केवाईसी पूर्ण हो जाएगा। केवाईसी एयेंटिफिकेशन अप्रूवल हो सकता है।
एयेंटिफिकेशन अप्रूवल होने पर कार्ड डाउनलोड करें। एयेंटिफिकेशन अप्रूवल नहीं होने पर अप्रूवल होने की प्रतीक्षा करें। अप्रूवल हो जाने के बाद अपना आयुष्मान कार्ड डाउनलोड कर सकते है। आयुष्मान कार्ड के संबंध में शिकायत एवं सुझाव टोल फ्री नंबर 104, 14555 पर दी जा सकती है। राजनांदगांव के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके बसोड़ ने बताया कि जिले में अब तक इस योजनांतर्गत 8 लाख 7 हजार 22 नागरिकों का आयुष्मान कार्ड बन गया है।
: अपने आप को जान लेना ही भगवान को जान लेना है : मैथिलीशरण भाईजी
Thu, Dec 21, 2023
रायपुर
अपने आप को जान लेना ही भगवान को जान लेना है। जो लोग यह कहते है कि भरत की वाणी कठिन है तो ऐसे लोगों ने न तो अपने को जाना है और न राम को जाना है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसके जीवन में प्रतिकूल परिस्थिति न आया हो। प्रेम में अनुबंध होता ही नहीं, प्रेम में तो केवल संबंध होता है, जिस दिन अपने में दोष और अपूर्णता और भगवान में पूर्णता देखना सीख लिया तो जीवन धन्य हो जाएगा।
मैक कॉलेज आॅडिटोरियम में श्रीराम कथा प्रसंग में भरत चरित्र की व्याख्या को आगे बढ़ाते हुए मैथिलीशरण भाई जी ने कहा कि भगवान के प्रति भक्तिभाव का जो लोग समीक्षा करते है वह स्वार्थ है, परमार्थ नहीं। मानस में बताया गया है कि प्रतिकूल परिस्थितियां भगवान के भक्त भरत और विभीषण पर कैसे आई? संसार में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं होता जिसके जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियां न आई हो, फिर भी हर स्थिति में भगवान की स्मृति न खोने वाला सच्चा भक्त है। इतिहास जो होता है वो पोस्टमार्टम करता है, पुराण आॅपरेशन करते है और कथा भूत को वर्तमान बना देता है। कथा जीवन में हमारा परम सत्य है और जिस दिन लक्ष्य की प्राप्ति हो गई तो समझो कथा में प्रवेश हो गया।
प्रेम में अनुबंध नहीं होता, केवल संबंध होता है। लकड़ी की पादुका पाकर भी भरत जी प्रसन्न हो गए इतना कि पादुका में साक्षात भगवान को अनुभव कर रहे है। अहम से मुक्त व्यक्ति अपनी बात मनवाने के लिए न धरना देते है, न आग्रह और न प्राण देने की बात कहते है। भरत जी ने भी चित्रकूट में भगवान राम से अयोध्या लौटने के लिए ऐसी कोई बात नहीं कही। जहां श्रद्धा और समर्पण रहता है ऐसे लोग अपनी मान्यता को भी 10 इंच पीछे छोड़ देते है।
भाईजी ने भरत को भगवान राम की बांसुरी बताया है। जो राम बोलवायेंगे वही भरत बोलेगा। लक्ष्मण, केंवट, भरत जैसे पात्र प्रेम के साक्षात स्वरुप है। ज्ञान धर्म ग्रंथों से पढ़ा जाता है, पढ़ाया जाता है, उससे भी ऊपर उठ जाए तो यह परम बल है। जो नकारात्मक सोचेगा उसका अंत भी वैसा ही होगा, जो सकारात्मक है उस व्यक्ति के अंदर नकारात्मकता कभी नहीं आएगा। गुण-दोष आंखों से पता चल जाता है, जब कोई प्रेम के अनुबंध में अपने आप को श्रेष्ठ दिखाने की चेष्टा करता है तो विवेक को सावधान कर दीजिए, आज्ञा देने वाला माता, पिता या गुरु अपने किसी पूर्व संस्कार का वसीभूत तो नहीं है। आपके दोष या कमी को जो सार्वजनिक तौर पर बताएगा व आपका हितैषी या शुभचिंतक नहीं है।
भाईजी ने बताया कि पंचतत्व के आधार पर अपना जीवन यापन करें। सबके प्रति हमारा दायित्व है सूर्य की तरह प्रकाश, चंद्रमा की तरह शीतलता और वायु की तरह हवा प्रदान करें। परिवार में सबका ध्यान रखो। राम की तरह मुखिया होगा तो राम राज्य बनेगा और धृतराष्ट्र की तरह होगा तो महाभारत होगा।