: वीरों का गांव: हर घर से एक बेटा कर रहा देश की सेवा
Thu, Jan 25, 2024
बालोद/रायपुर.
बालोद जिला मुख्यालय से महज नौ किलोमीटर की दूरी पर एक गांव स्थित है, जिसका नाम नेवारीखुर्द है। इस गांव को लोग सैनिक ग्राम से भी जानते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस गांव से लगभग 70 से 80 लोग देश की सेवा के लिए सैनिक बने। वर्तमान में 61 जवान बीएसएफ, एसटीएफ, कोबरा, पुलिस सहित आर्मी में अपनी सेवा दे रहे हैं।
खास बात तो यह है कि जितने जवान इस गांव से देश की सेवा के लिए चयनित हुए हैं, वह खुद से अभ्यास कर इस मुकाम तक पहुंचे हैं। शारीरिक अभ्यास के लिए हर रोज सुबह-शाम 40 से 50 युवक नदी के किनारे अभ्यास के लिए पहुंचते हैं। साथ ही लिखित परीक्षा की तैयारी के लिए समूह में बैठकर और इंटरनेट के माध्यम से जानकारी जुटाते हुए तैयारी करते हैं।
शुरुआत में गांव के पास ही स्कूल में पढ़ाने वाले गांव के एक व्यक्ति ने लोगों का समूह तैयार किया।
वह कबड्डी और खो-खो जैसे खेल का अभ्यास करवाते रहे। परिणाम यह रहा कि गांव की कबड्डी टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहराया। इसे देखते हुए गांव के और भी युवा खेल के क्षेत्र में रूचि रखने लगे। इसके बाद धीरे-धीरे कई लोग शिक्षक के साथ जुड़ने लगे। इसी बीच गांव के रामरतन उइके की नौकरी होमगार्ड में लगी, फिर एसएफ और सीएम सुरक्षा गार्ड के रूप में भी उन्होंने नौकरी की। वहीं, से युवाओं का देश प्रेम के प्रति जज्बा शुरू हुआ। राम रतन ने गांव के युवाओं को प्रेरणा देना शुरू की और देखते ही देखते आज कारवां 70 से 80 लोगों तक पहुंच गया। आज भले ही वह दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें आज भी युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए प्रेरणादायक हैं।
छोटी सी बस्ती वाले गांव में न केवल देश सेवा करने वाले जवान हैं, बल्कि शुरुआत से ही यह गांव शिक्षा के क्षेत्र में आगे रहा है। यही वजह है कि शुरुआत से ही देश की सेवा के लिए प्रयास करने वाले जवानों को भी पढ़ाई में किसी तरह की दिक्कत नहीं आई। आज भी उन्हीं 61 जवानों को देश की सेवा करते देख और कई युवा देश सेवा करने की तैयारी में जुटे हुए हैं। खास बात तो यह है कि जो युवा अभी सेना में जाने का अभ्यास कर रहे हैं, उन्होंने खुद से ही मैदान तैयार किए हैं। तैयारी के लिए उपयोग में आने वाले संसाधन भी जुगाड़ से बनाए हैं। बस जरूरत है कि प्रशासन की नजर इन युवाओं पर पड़े, ताकि इन्हें जरूरत पड़ने वाले सभी संसाधन मुहैया कराए जा सकें, जिससे और भी युवा प्रेरित हों।
: छत्तीसगढ़: सेक्शन कमांडर और आरपीसी सीएनएम सदस्य ने किया सरेंडर
Thu, Jan 25, 2024
बीजापुर.
बीते दिनों बीजापुर पुलिस के प्रयासों से भैरमगढ़ एरिया प्लाटून सेक्शन कमांडर और आरपीसी सीएनएम सदस्य ने सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति से प्रभावित होते हुए नक्सल पंथ से तौबा कर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उक्त दोनों नक्सली कई महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल थे। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को भैरमगढ़ एरिया कमेटी के प्लाटून नंबर 13 बी सेक्शन कमांडर रोनी पदम उर्फ जैनी पति अनिल पदम उर्फ छोटू उम्र 32 निवासी पुनेम पारा पालनार थाना गंगालूर - पालनार आरपीसी सीएनएम सदस्य अनिल पदम पिता कोवा उम्र 24 निवासी पालनार पटेलपारा थाना गंगालूर ने बीजापुर पुलिस अधीक्षक आंजनेय वाष्णेय व पुलिस के आला अफसरों के समक्ष राज्य सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, रोनी पदम को वर्ष 2004 में बाल संगम सदस्य के रूप में भर्ती किया गया। वर्ष 2005 में सीएनएम सदस्य के रूप में कार्य किया। वर्ष 2006 में पालनार जीआरडी सदस्य के रूप में कार्य किया। वर्ष 2007 में उसूर एलओएस पीएलजीएस सदस्य के रूप में काम किया। वर्ष 2010 से 2014 तक सीआरबी दलम के प्लाटून नंबर 22 में पीपीएम के पद व प्लाटून नम्बर 22 बी सेक्शन के कमांडर के रूप में काम किया। रोनी वर्ष 2009 में नीलमडगू पुलिस नक्सली मुठभेड़ की घटना में शामिल थी।
वहीं वर्ष 2013 में कोकरा के मुठभेड़ की घटना और वर्ष 2015 में बेचापाल मुठभेड़ की घटना में शामिल रही। दूसरी तरफ अनिल पदम वर्ष 2007 से 2010 तक ग्राम पालनार का बाल संगम सदस्य के पद पर संगठन में भर्ती किया गया। वर्ष 2011 में बाल संगम सदस्य के पद से पालनार आरपीसी सीएनएम सदस्य के पद पर पदोन्नत किया गया।
वर्ष 2023 तक पालनार आरपीसी सीएनएम सदस्य के पद पर पालनार आरपीसी भूमकाल मिलिशिया सदस्यों के साथ संत्री ड्यूटी करता था। अनिल पदम वर्ष 2020 में पुलिस पार्टी को नुकसान पहुचाने गंगालूर मार्ग में प्रेशर आईईडी लगाने और ब्लास्ट की घटना में शामिल रहा। वर्ष 2020 गंगालूर से चेरपाल जाने वाली सड़क पर गड्डा खोदकर मार्ग अवरुद्ध करने की घटना में शामिल था। उक्त नक्सली दंपति को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने पर इन्हें उत्साहवर्धन के लिए शासन की आत्मसमर्पण व पुर्नवास नीति के तहत 25 -25 हजार रुपये नगद प्रोत्साहन राशि दी गई है।
: Chhattisgarh: राज्य में नहीं खुलेगी एक भी नई शराब की दुकान
Thu, Jan 25, 2024
रायपुर.
छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने बुधवार को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आबकारी नीति को मंजूरी दे दी और फैसला किया कि राज्य में कोई नई शराब की दुकानें नहीं खोली जाएंगी। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक बुधवार देर शाम खत्म हुई। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने सम्बोधित किया.
उन्होंने कहा की कहा कि कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ आबकारी नीति 2024-25 को मंजूरी दे दी है और फैसला किया है कि राज्य में कोई नई शराब की दुकानें नहीं खोली जाएंगी। उन्होंने बताया कि नयी विधान सभा के दूसरे सत्र (बजट सत्र) के लिए राज्यपाल के अभिभाषण के प्रारूप को भी मंजूरी दे दी गयी।बजट सत्र 5 फरवरी से शुरू होने वाला है।
साय कैबिनेट के निर्णय -----
0-
छत्तीसगढ़ के षष्ठम् विधानसभा के द्वितीय सत्र फरवरी-मार्च 2024 हेतु माननीय राज्यपाल के अभिभाषण के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
0-
तृतीय अनुपूरक अनुमान वर्ष 2023-2024 का विधानसभा में उपस्थापन हेतु छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
0-
बजट अनुमान वर्ष 2024-25 का विधानसभा में उपस्थापन के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
0-
छत्तीसगढ़ आबकारी नीति वित्तीय वर्ष 2024-25 का अनुमोदन किया गया है। यह निर्णय लिया गया है कि कोई भी नई मदिरा दुकान नहीं खोली जाएगी।
0-
छत्तीसगढ़ सिविल न्यायालय (संशोधन) विधेयक-2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है। इस संशोधन में ‘जिला न्यायाधीश‘ को ‘प्रधान जिला न्यायाधीश‘ और ‘अपर जिला न्यायाधीश‘ को ‘जिला न्यायाधीश‘ करने का प्रावधान रखा गया है।
0-
इसी तरह ‘व्यवहार न्यायाधीश प्रथम वर्ग‘ को ‘व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी‘ और ‘व्यवहार न्यायाधीश द्वितीय वर्ग‘ को ‘व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी‘ और ‘जिला न्यायालय‘ को ‘प्रधान जिला न्यायालय‘ से प्रतिस्थापित करने का प्रावधान रखा गया है।
0-
उच्च न्यायालय बिलासपुर में ज्वाईंट रजिस्ट्रार (एम) के 5 पद आकस्मिकता निधि से सृजित करने का निर्णय लिया गया है।