: मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मलिमथ ने किया शुभारंभ
Fri, Dec 22, 2023
भोपाल
मध्यप्रदेश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमथ ने आज मप्र हाई कोर्ट में आम नागरिकों की सहूलियत के लिये अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी व्यवस्थाओं का शुभारंभ किया। उच्च न्यायालय जबलपुर में वीडियो निगरानी प्रणाली और कोर्ट रूम लाइव ऑडियो विजुअल स्ट्रीमिंग सिस्टम-क्लास परियोजनाएं प्रारंभ हो गई हैं। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालय, जबलपुर के अधिकारी उपस्थित थे। यह देश में पहली बार है, जब किसी राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा राज्य में सभी जिला और तहसील अदालतों के लिए कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था की गई है।
सुरक्षित अदालत परिसरों की ओर बढ़ते हुए, हाईकोर्ट ने एकीकृत वीडियो निगरानी प्रणाली (आईवीएसएस) और कोर्ट रूम लाइव ऑडियो विजुअल स्ट्रीमिंग सिस्टम (क्लास) शुरू की है।
210 अदालत परिसरों के कोर्ट रूम की लाइव स्ट्रीमिंग होगी
यह अपने आप में देश की एक अग्रणी परियोजना है जो पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों को अपनाती है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने जिम्मेदार नेतृत्व का प्रदर्शन करते हुए अन्य अदालतों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
यह भारतीय न्यायिक प्रणाली के इतिहास में एक अग्रणी तकनीकी परियोजना है जो हाई कोर्ट द्वारा प्रशासित अदालत परिसर को सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगी। नई प्रौद्योगिकी को अपनाने और उनका एकीकरण मध्य प्रदेश न्यायपालिका को डिजिटल युग के लिए तैयार करेगा। यह न्यायमूर्ति रवि मलिमथ की प्रगतिशील दृष्टि और सक्षम नेतृत्व के चलते संभव हुआ है।
अदालत परिसर में न्याय की यात्रा सभी संबंधित पक्षों - न्यायाधीशों, वकीलों और अधिवक्ताओं, अदालत के कर्मचारियों, पुलिस जैसी सुरक्षा एजेंसियों और बड़े पैमाने पर जनता के लिए सुरक्षित होनी चाहिए। अदालत परिसरों में व्यवधान की कई घटनाएं हुई हैं । अदालत परिसरों को सुरक्षित बनाने के लिए सिस्टम तैनात करना और तंत्र स्थापित करना महत्वपूर्ण कदम है।
आईवीएसएस और क्लास क्या है?
इस व्यवस्था में शामिल है -
1. एकीकृत वीडियो प्रबंधन प्रणाली।
2. कोर्ट रूम ऑडियो-विज़ुअल रिकॉर्डिंग सिस्टम।
3. संग्रह और लाइव के साथ-साथ ऑन-डिमांड स्ट्रीमिंग सेट-अप।
4. जबलपुर में डेटा सेंटर एवं कमांड एवं कंट्रोल सेंटर की स्थापना।
5. इंदौर में डिजास्टर रिकवरी सेट-अप।
6. सुविधा प्रबंधन सेवाएँ और संचालन एवं रखरखाव।
5 वर्ष की अवधि के लिए प्रणाली. परियोजना की कुल लागत रु. 189.25 करोड़ होगी.
मुख्य बिन्दु -
अदालत कक्ष की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए वीडियो निगरानी कैमरों का उपयोग प्रत्येक अदालत परिसर और प्रत्येक अदालत कक्ष के भीतर वीडियो निगरानी प्रणाली - द्वारों, आंगन (पार्किंग स्थानों), भवन प्रवेश बिंदुओं, अदालत कक्ष प्रवेश द्वार, अदालत कक्ष, मार्ग और अन्य सार्वजनिक सभा की 24x7 निगरानी उन्नत मेगापिक्सेल आईपी कैमरों के उपयोग उच्च न्यायालय में वर्तमान में उपयोग में आने वाले आईवीएसएस, क्लास और केस ट्रैकिंग और प्रबंधन प्रणाली का एकीकरण किया गया है।
अलार्म मॉनिटरिंग, ऑन-डिमांड वीडियो मॉनिटरिंग और ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग अभिलेख के साथ-साथ आपदा रिकवरी सेट-अप के लिए जबलपुर में एक अत्याधुनिक कमांड और कंट्रोल सेंटर और डेटा सेंटर के साथ-साथ इंदौर में स्थानीय और जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किए गए हैं। स्थानीय/दूरस्थ सुरक्षा कैमरों की निगरानी की जायेगी।
न्यायाधीशों के कक्षों और डेटा केंद्रों के लिए बायोमेट्रिक (चेहरे) पहुंच नियंत्रण, आगंतुकों की स्क्रीनिंग के लिए डोर फ्रेम और हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टरों का उपयोग प्रमुख हैं।
अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग से आएगी पूरी पारदर्शिता ।
वर्तमान स्थिति में, वर्चुअल कोर्ट रूम एक वास्तविक आवश्यकता है और यह परियोजना उस दिशा में एक कदम है। लाइव स्ट्रीमिंग के साथ-साथ मामलों की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग कानून की शिक्षा में एक शक्तिशाली उपकरण होगी और आने वाले दशकों में लाखों कानून के छात्रों को लाभ पहुंच सकती है - किसी भी अदालत कक्ष को इंटरनेट पर लाइव देखा जा सकता है।
ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को मामलों में टैग किया जाएगा और भविष्य में संदर्भ और सीखने के लिए संग्रहित किया जाएगा। यह पेपर रहित अदालतों की दिशा में भी एक कदम है। उच्च-रिजोल्यूशन वाले कैमरों का उपयोग न्याय के मंदिरों के भीतर गैर-कानूनी इरादों की गतिविधियों को रोकने में किया जायेगा। घटना के बाद की जांच के दौरान एक प्रभावी उपकरण के रूप में भी काम करेगी।
पायलट चरण के तहत, जबलपुर में एक केंद्रीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र (सीसीसी) और इंदौर में आपदा रिकवरी साइट स्थापित की गई है । जबलपुर के जिला न्यायालय और पाटन और सिहोरा के तहसील न्यायालयों में एकीकृत वीडियो निगरानी प्रणाली (आईवीएसएस) चालू की गई है। इसी प्रकार, जबलपुर जिला न्यायालय के एक न्यायालय कक्ष और पाटन और सिहोरा के प्रत्येक तहसील न्यायालय के एक न्यायालय कक्ष में कोर्ट रूम लाइव ऑडियो विजुअल स्ट्रीमिंग सिस्टम (क्लास) का कार्यान्वयन पूरा हो गया है। परियोजना के राज्यव्यापी क्रियान्वयन के बाद के चरण दिसंबर 2024 तक पूरे होने की उम्मीद है। आईवीएसएस एवं क्लास परियोजना के क्रियान्वयन से न्यायालयों की सुरक्षा मजबूत होगी।
: भगवान से आशा भी करते है और संदेह भी
Fri, Dec 22, 2023
रायपुर
भगवान से आशा भी करते है और संदेह भी, संसार के लोग सवा लाख लड्डू चढ़ाकर अपनी मन्नत मांगते है भगवान से, संसारी लोग पाने के लिए सीढ़ी समझते है, भगवान को। भगवान की चरणों में जिस दिन भक्ति मांगेंगे उस दिन जो नहीं मांगा है वो सब मिल जाएगा। तत्व के ज्ञान को समझ गए तो भक्ति अपने आप आ जाएगाी।
श्रीराम कथा प्रसंग में मैथिलीशरण भाईजी ने श्रद्धालुओं को बताया कि मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने बार-बार एक बात कही है कि भरत जी के समान और दूसरा कोई नही। भरत चरित्र में पृथ्वीलोक के जीवन चक्र को जोड़कर उन्होंने कई बातें बताई। सारी दुनिया राम-राम जपती है लेकिन स्वयं भगवान राम, भरत जी का नाम जपते है। भगवान की चरणों में रति के लिए जो आपको वैराग्य दे रहा है उसे कभी ये न बोले कि तुमझे ऐसी आशा नहीं थी। उसके प्रहार से विरक्ति मिली उससे बड़ी बात और क्या। ऐसे लोगों की कभी निंदा न करें जो आपको भगवान की चरणों में ले जा रहे है। भरत समेत सबने केकैयी की निंदा की है पर लक्ष्मण ने कभी नहीं की। दोनों की भावना का केंद्र राम है, लेकिन लक्ष्मण जी को राम मिल गए और भरत से चले गए। इस व्याख्या को समझें सुख में भगवान के नाम की विस्मृति हो गई तो दुख और दुख के क्षण में स्मृति रह गई तो यह सुख का परिणाम है। भक्त और ज्ञानी में कोई भेद नहीं है जैसे दशरथ और जनक। जिस दिन तत्व के ज्ञान को समझ लिया भक्ति अपने आप आ जाएगी।
अखंड को देखकर स्मृति और खंड को देखकर विस्मृति हो जाती है। स्वरुप की स्मृति ज्ञान और विस्मृति अज्ञान, जिस दिन इस के स्वरुप को समझ लिया आपका आनंद कभी खंडित नहीं होगा। सद को आने से असद को नहीं, यही तो विवेक की जागृत अवस्था है। बिना सत्संग के विवेक नहीं मिलता। रामजी के मिलने पर सुख और न मिलने पर दुख का अनुभव तभी जीवन का कल्याण है, यदि दूसरे की सुख के लिए कार्य कर रहे है तो भला हमें दुख कैसे मिलेगा।
सुगम अगम मृदु मंजु कठोरे ।
अरशु अमित अति आखर थोरे ।।
राम को वनवास के बाद सब चाह रहे थे कि भरत राजकाज सम्हाल ले लेकिन भरत ने मना कर दिया, फिर भी लोग नाराज नहीं हुए, इसलिए कि उन्हें मालूम है भरत जी के लिए भगवान की इच्छा से बढ़कर कोई दूसरा है ही नहीं।
घर-परिवार को टूटने न दें-
कथा प्रसंग के बीच में भाईजी ने बताया कि आज घरों में पिता और बेटे के बीच तक इतनी दूरियां बढ़ गई है कि उनका अहंकार टकराता है। कम उम्र में बच्चे घर छोड़कर भाग रहे है। पिता चाहता है हमारी बात चले और बेटा चाहता है हमारी। अहम का तिरष्कार कर दें, स्वभाव और प्रभाव में बड़प्पन लाए तो घर-परिवार को बिखरने से बचाया जा सकता है।
: 18 लाख आवास बनाने का दावा जनता से दगाबाजी : बैज
Fri, Dec 22, 2023
रायपुर
जिस तरह से 2 करोड़ रोजगार हर साल, 100 दिन में महंगाई कम करने और हर खाते में 15-15 लाख रुपए आने का वादा जुमला साबित हुआ, उसी तरह से विधानसभा चुनाव के मोदी की गारंटी के नाम पर किए गए दावे भी जुमले साबित हुए हैं। पीएम आवास योजना 2015 में लागू हुई तब केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी की सरकार थी। 2011 के जनगणना को आधार मानकर छत्तीसगढ़ के लिए कल 18 लाख आवास का लक्ष्य तय किया गया था। 2015 से 18 तक रमन सरकार के दौरान मात्र 237000 ग्रामीण पीएम आवास तथा 19000 शहरी पीएम आवास बने। 2018 से 23 तक भूपेश सरकार ने 10 लाख से अधिक पीएम आवास बनाएं। शेष लगभग 7 लाख आवास बनाने के लिए भूपेश बघेल सरकार ने विगत बजट में 3234 करोड़ का प्रावधान किया तथा 7 लाख आवासहीनो के लिये मकान बनाने के लिये पहली किश्त अक्टूबर में ही भूपेश सरकार ने डाल दिया था। मुख्यमंत्री और भाजपा बताये 18 लाख आवास किनके लिये बना रहे उनकी सूची सार्वजनिक किया जाये। अनुपूरक बजट में पीएम आवास के लिए सिर्फ 3799 करोड़ का प्रावधान है इतनी राशि में 18 लाख आवास कैसे बनेगा इसका जवाब भाजपा दे।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता बताएं कि 18 लाख पीएम आवास के लिए राज्यांश की राशि कितनी होती है? 3799 करोड़ अनुपूरक बजट में स्वीकृत की गई है उस से 18 तो क्या 5 लाख आवास भी नहीं बनाई जा सकती हैं। असलियत यह है कि केंद्रीय योजनाओं में लक्ष्य तय करने का अधिकार राज्य को नहीं होता। 2011 के बाद से केंद्र की मोदी सरकार जनगणना के दायित्व से भाग रही है ताकि इरादतन षडयंत्र पूर्वक नए हितग्राहियों को लाभ से वंचित रखा जा सके। अपनी नाकामी पर पदेर्दारी करने मोदी सरकार के द्वारा जनगणना नहीं कराए जाने से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब वर्ग का हुआ है। नए हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें आवास देने के लिए कांग्रेस की सरकार ने छत्तीसगढ़ में आवास न्याय योजना शुरू की जिसकी प्रथम किस्त भी सितंबर महीने में जारी की जा चुकी है, जिसे बंद करने का षडयंत्र भी भाजपा सरकार रच रही है। भारतीय जनता पार्टी को अपने झूठ, जुमले और वादाखिलाफी के लिए छत्तीसगढ़ की जनता से माफी मांगनी चाहिए।