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: बच्चों के प्रति सहज व सरल रहें शिक्षक,, डॉ रजनी नेल्सन आरटीई एक्ट 2009 के अनुच्छेद 17 पर विस्तृत चर्चा

Admin

Mon, Aug 5, 2024
बालोद। जिला शिक्षा अधिकारी बालोद एवं जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय बाल अधिकार संरक्षण कार्यशाला का आयोजन जिला पंचायत बालोद के सभागार में सोमवार को किया गया। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली के प्रयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में आरटीई एक्ट 2009 के तहत विस्तृत चर्चा की गई। इस एक्ट के अनुच्छेद 17 में निहित प्रावधानों को सभी शिक्षकों को बताया गया। आयोजित कार्यशाला में बालोद जिला के पांचों ब्लॉक के प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल के संस्था प्रमुख 122 की संख्या में उपस्थित हुए। कार्यशाला में जानकारी देने वक्ता के रूप में राज्य श्रोत सदस्य डॉक्टर रजनी नेल्सन, जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान दुर्ग की प्राचार्य डॉक्टर शिशिरकाला भट्टाचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी पीसी मरकले, जिला नोडल अधिकारी सत्येंद्र शर्मा वक्ता के रूप में मौजूद रहे। कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत बालोद के सीईओ संजय कन्नौजे मौजूद रहे। विशेषज्ञ वक्ताओं ने बताया कि इस एक्ट के तहत उल्लेखित किया गया है, कि बच्चों को उनकी स्थिति के आधार पर शिक्षा देनी है। उनके साथ व्यवहार सरलतापूर्वक करना है। किसी भी बच्चे को दंड नहीं दिया जा सकता। इसके अलावा 6 से 14 वर्ष के बच्चों को हर हाल में शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। बॉक्स,,, अध्यापन रणनीतियों पर दिया बल आयोजित कार्यशाला के प्रथम सत्र में कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए जिला पंचायत बालोद के सीईओ संजय कन्नौजे ने शिक्षक की अध्यापन रणनीतियों, समावेशी शिक्षा पर सीखने के प्रतिफलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक रणनीति बनाकर अध्यापन का कार्य करें तो निश्चित रूप से कक्षा के सारे बच्चों को इसका सही लाभ मिलेगा। सीईओ कन्नौजे ने कार्यशाला में उपस्थित सभी शिक्षकों से अपील की कि यहां से जो सिख कर जाएं अपने व्यवहार में जरूर लाएं। बॉक्स,,, स्कूल में संयमित रहें शिक्षक कार्यशाला को संबोधित करती हुई पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी एवं पूर्व डाइट प्राचार्य तथा राज्य मुख्य स्रोत शिक्षक डॉ रजनी नेल्सन ने शिक्षकों को संयमित रहने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों की वैयक्तिक भिन्नता पर ध्यान रखने पर बल दिया। पूरे कार्यशाला में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने आरटीई 2009 के 17 आर्टिकल को बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हम शिक्षक होने के नाते जहां अपने कर्तव्य का पालन करने सजग रहें वही हमें व्यावहारिक भी होना पड़ेगा। किसी भी बच्चे को हम कमजोर या अच्छा साबित नहीं कर सकते। हमें उनकी स्थिति और परिस्थिति का आकलन करते हुए अध्यापन का कार्य करना है और कमजोर बच्चों को भी अच्छे बच्चे के समकक्ष बनाना है। बॉक्स,,, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली के निर्देशानुसार आयोजन जिला नोडल अधिकारी सत्येंद्र शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला स्तरीय कार्यशाला आरटीई एक्ट 2009 के अनुच्छेद 17 पर चर्चा करने के लिए जिला दुर्ग में दिनांक 3 अगस्त 2024 एवं जिला बालोद में 5 अगस्त 2014 आयोजित किया गया, इसमें संबंधित विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। उपस्थित शिक्षकों ने भी अपने विचार खुलकर रखे। विशेष रूप से उपस्थित वक्ताओं द्वारा सरल भाषा में विस्तृत जानकारी दी गई। आयोजन पूरी तरह सफल रहा। बॉक्स,,,, बच्चों के परिवेश पर ध्यान देने की जरूरत डाइट दुर्ग की प्राचार्य डॉक्टर शिशिरकला भट्टाचार्य ने बच्चों के परिवेश पर ध्यान देने की बात कही। आगे कहा कि वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के समाजीकरण और उन्हें मुख्य धारा में लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सही दिशा देने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है। इसलिए हम समाज के विशेष वर्ग से आते हैं हमें इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए। हमारे कार्यों से कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए इस बात का भी हमें ध्यान रखना होगा। बॉक्स,,, आरटीई का उल्लंघन ना हो कार्यशाला में जिला शिक्षा अधिकारी ने आरटीई के उल्लंघन न करने शिक्षकों को चेताया और शारीरिक दंड के वर्गीकरण को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों का मन कोमल होता है। सभी जानते हैं उसे हम जिस रूप में ढालें ढाल सकते हैं। हमारा दायित्व है प्रत्येक बच्चा अच्छा नागरिक बने इसलिए हमें उनके साथ अच्छा व्यवहार करना होगा। बॉक्स,,, शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार में शामिल कार्यशाला के समन्वयक व्याख्याता सत्येंद्र शर्मा ने कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डाला और आगे बताया कि बाल शिक्षा का अधिकार हमारे मौलिक अधिकार में शामिल है। जो सभी वर्ग को समान रूप से मिला है जिसके अंतर्गत हम शिक्षा जगत से जुड़े हुए शिक्षाविदों का उत्तरदायित्व है कि बच्चों को शालाओं में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनका संरक्षण करना है। कार्यक्रम का संचालन डाइट से डॉक्टर वंदना सिंह, समग्र शिक्षा से लेख राम साहू एपीसी एवं श्रीमती सुषमा हिरवानी व्याख्याता ने किया।

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