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: कार्यशाला के बाद भी एनपीएस-ओपीसी को लेकर भ्रम , चयन के विकल्प पर इंद्रावती-महानदी भवन में हुई कार्यशाला

Admin

Sat, Feb 11, 2023
रायपुर | राज्य में नवीन पेंशन योजना (एनपीएस) और ओल्ड पेंशन योजना (ओपीएस) के चयन को लेकर कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बरक़रार है | गुरुवार को राज्य मंत्रालय (महानदी भवन)  और संचालनालय (इंद्रावती भवन) के अधिकारी-कर्मचारियों की शंका दूर करने कार्यशाला का आयोजन किया गया | इस कार्यशाला में अधिकारियों-कर्मचारियों के मन में उठ रहे शंका का समाधान करने की कोशिश की गई | बावजूद इसके अधिकारी-कर्मचारी विकल्प के चयन को लेकर दुविधा की स्थिति में नजर आ रहे हैं | उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 1 नवम्बर 2004 से 31 मार्च 2022 के बीच नियुक्त शासकीय सेवकों के लिए एनपीएस और ओपीएस में रहने के लिए विकल्प प्रस्तुत किया है | विकल्प चयन के लिए 24 फरवरी 2023 की तिथि निर्धारित की गई है कार्यशाला में वरिष्ठ कोषालय अधिकारी आलोक राय, आरपीएस चौहान और मोहम्मद इमरान खान ने तकनीकी पहलुओं की अधिकारी कर्मचारियों को जानकारी दी | मालूम हो की आगामी सोमवार और मंगलवार को एक बार फिर मंत्रालय में कार्यशाला आहूत की गई है | मंत्रालय संघ का दावा- ओपीएस 1 नवंबर 2004 से होगा लागू कार्यशाला के बाद राज्य मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष महेंद्र सिंह राजपूत ने एक बयान जारी कर दावा किया कि ओल्ड पेंशन योजना (ओपीएस)पूर्व से प्रचलित पेंशन योजना (ओपीएस) पूर्व से प्रचलित पेंशन नियम, 1976 से ही शासित होगी 1 नवंबर, 2004 से ही लागू होगी | उन्होंने बताया कि नियमित कर्मचारी जिस दिन शासकीय सेवा में प्रथम नियुक्त हुए है, उनकी पेंशन योग्य सेवा की गणना उसी विधि से की जायेगी | उन्होंने यह भी बताया कि नियमित सेवा के बाद कर्मचारी को पेंशन की पात्रता होगी | राज्य शासन को केवल शासकीय अंशदान लौटना है, कर्मचारी को अपना अंशदान उसे ही प्राप्त होगा, जो पीएफआरडीए के नियमानुसार होंगे | संघ ने यह भी दावा किया की पेंशन योग्य गणनीय सेवा के पहले का कोई भी अंशदान नहीं लौटना पड़ेगा ओपीएस में परिवार पेंशंकी भी पात्रता रहेगी | हालांकि संघ के दावे के बाद भी कर्मचारी वित्त विभाग के निर्देशों की तुलना कर रहे हैं |

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