: चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर पर बड़ा खतरा मंडराया!
Sun, Oct 22, 2023
नई दिल्ली.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन चंद्रयान-3, फिलहाल चंद्रमा पर निष्क्रिय अवस्था में है। मिशन, जो 23 अगस्त को चंद्रमा पर उतरा और रोवर तैनात करने के साथ-साथ कई प्रयोग किए, को हमेशा के लिए स्लीप मोड में डाल दिया गया है। इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा है कि विक्रम लैंडर अपना काम बहुत अच्छे से करने के बाद चंद्रमा पर खुशी से सो रहा है। लेकिन, इस वक्त विक्रम और रोवर पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इसके पीछे का कारण चांद पर हो रही घुसपैठ है।
इसरो ने 23 अगस्त को इतिहास रचते हुए चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफलतापूर्वक लैंडिंग कराई। लैंडिंग के बाद अगले 14 दिनों तक रोवर ने चांद पर कई चीजों की खोज की। भारत ऐसा कारनामा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन चुका है। अंतरिक्ष में अपनी धाक जमाने के बाद इसरो नए मिशन की तरफ आगे बढ़ रहा है। हालांकि इस बीच चंद्रयान-3 के रोवर और विक्रम पर संकट के नए बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान को निष्क्रिय कर दिया गया है। लेकिन, चांद पर हो रही घुसपैठ से रोवर और विक्रम खतरे में हैं। इसरो वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा पर उनके सामने सबसे बड़ा खतरा सूक्ष्म उल्कापिंड प्रभावों का है जो चंद्रमा की सतह पर गिरते रहते हैं। इसरो के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों माइक्रोमीटरोइड्स से प्रभावित हो सकते हैं जो चंद्रमा की सतह पर उल्कापिंड गिराते रहते हैं। अतीत में कई मिशनों को भी इसी तरह का नुकसान उठाना पड़ा है, जिसमें अपोलो अंतरिक्ष यान भी शामिल था जो चंद्रमा की सतह पर रह गया था।
लंबी और ठंडी रातों में खतरा ज्यादा
मणिपाल सेंटर फॉर नेचुरल साइंसेज के प्रोफेसर और निदेशक डॉ. पी. श्रीकुमार ने बताया कि चूंकि चंद्रमा पर कोई वायुमंडल या ऑक्सीजन नहीं है, इसलिए अंतरिक्ष यान के क्षरण का कोई खतरा नहीं है। हालाँकि, जो देखा जाना बाकी है वह सूक्ष्म उल्कापिंड प्रभाव हैं जो लंबी चंद्र रात के ठंडे तापमान के अलावा अंतरिक्ष यान को और नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा, "चूंकि चंद्रमा पर कोई वायुमंडल नहीं है इसलिए सूर्य से लगातार विकिरण बमबारी भी हो रही है। इससे कुछ नुकसान भी हो सकता है । हालांकि, हमें अभी तक पता नहीं है कि क्या होगा क्योंकि इसके आसपास ज्यादा डेटा नहीं है।"
चांद की धूल से भी खतरा
चंद्रमा की धूल भी लैंडर और रोवर की सतह तक पहुंच जाएगी। पृथ्वी की धूल के विपरीत, चंद्रमा पर हवा की अनुपस्थिति के कारण चंद्रमा की धूल चिपक सकती है। यह देखने के लिए डेटा उपलब्ध है कि चंद्र अंतरिक्ष यान पर धूल कैसे जगह घेरती है? जैसा कि अपोलो मिशन के दौरान देखा गया था।
अपोलो मिशन में भी ऐसा ही देखने को मिला
डॉ. पी. श्रीकुमार ने कहा कि अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा चंद्रमा की सतह पर छोड़े गए चंद्र परावर्तकों को ढंकते हुए धूल की परतें देखी गई हैं। "तो हमें इसके बारे में कुछ पता है।" हालाँकि, इसरो वैज्ञानिक संतुष्ट हैं क्योंकि अंतरिक्ष यान अपना वो काम कर चुका है जो उसे चंद्रमा पर करने के लिए बनाया गया था और निष्क्रिय होने से पहले वह अपना 14-दिवसीय लंबा मिशन पूरा कर चुका है।
चंद्रयान-3 ने क्या पता लगाया?
मिशन का प्राथमिक उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र का पता लगाना था, जो पानी की बर्फ से समृद्ध क्षेत्र है जो संभावित रूप से ऑक्सीजन, ईंधन और पानी का स्रोत हो सकता है। रोवर को चंद्रमा पर अपनी ड्राइविंग क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जबकि लैंडर को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित और धीरे से उतरने के लिए इंजीनियर किया गया था। प्रज्ञान रोवर को चंद्र सतह का रासायनिक विश्लेषण करने का काम सौंपा गया था । रोवर ने दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रमा की सतह पर सल्फर की मौजूदगी की पुष्टि की, जिसे वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण माना है। एल्यूमीनियम, कैल्शियम, लोहा, क्रोमियम, टाइटेनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन जैसे अन्य तत्वों का भी पता लगाया गया है।
: हिजबुल्ला की धमकी-गाजा की जमीन पर कदम रखा तो बुरा होगा अंजाम
Sun, Oct 22, 2023
नई दिल्ली.
लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला ने कहा है कि इजराइल और हमास के युद्ध में उसकी अहम भूमिका है और यदि इजराइल गाजा पट्टी पर जमीनी हमले शुरू करता है, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। हिजबुल्ला के उपनेता शेख नईम कासिम का यह बयान उस वक्त आया जब इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में बमबारी तथा ड्रोन से हमले किए और हिजबुल्ला ने इजराइल की ओर रॉकेट और मिसाइलें दागीं। हिजबुल्ला ने कहा कि हमले में शनिवार को उसके छह लड़ाके मारे गए जो दो सप्ताह पहले शुरू हुए युद्ध के बाद एक दिन में मारे गए लोगों की सबसे बड़ी संख्या है।
कासिम ने कहा कि लेबनान-इजराइल सीमा पर तनाव पैदा करने का हिजबुल्ला के लिए एक स्पष्ट उद्देश्य है। उसने कहा, ''हम इजराइली दुश्मन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें बता रहें है कि हम तैयार हैं।" वहीं, हमास ने कहा है कि अगर इजराइल गाजा में जमीनी हमले शुरू करता है तो हिजबुल्ला युद्ध में शामिल हो जाएगा।
हमास के आतंकवादियों द्वारा दक्षिणी इजराइल के शहरों पर सात अक्टूबर को हमले किए जाने के बाद इजराइल ने गाजा पट्टी की घेराबंदी कर दी और कई जवाबी हवाई हमले किए। मिस्र और गाजा के बीच की सीमा शनिवार को खोल दी गई, जिसके बाद लगभग दो सप्ताह से जारी इजराइली घेराबंदी की वजह से भोजन, दवा और पानी की कमी से जूझ रहे फलस्तीनियों के लिए सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
सहायताकर्मियों के मुताबिक केवल 20 ट्रक को गाजा में जाने की अनुमति दी गई, जो जबरदस्त मानवीय संकट से निपटने के लिए अपर्याप्त है। गाजा जाने के लिए 200 से अधिक ट्रक लगभग 3,000 टन सहायता सामग्री लिए कई दिनों से सीमा पर खड़े थे। अस्पतालों का कहना है कि पूरे क्षेत्र में बिजली कटौती के कारण उनके पास चिकित्सा आपूर्ति और आपातकालीन जनरेटर के लिए ईंधन की कमी हो गई है।
इस बात की अटकलें हैं कि ईरान समर्थित हिजबुल्ला उत्तरी इजराइल पर व्यापक पैमाने पर हमले कर इजराइल-हमास युद्ध में एक नया मोर्चा खोलने की कोशिश कर सकता है। हिज्बुल्ला के पास हजारों रॉकेट और मिसाइलों के अलावा विभिन्न प्रकार के ड्रोन हैं। कासिम ने कहा कि उनके संगठन ने लेबनान-इजराइल सीमा पर तनाव पैदा कर इजराइली सेना को उलझा रखा है ताकि वह गाजा पर हमले की तैयारी के बजाय उत्तरी क्षेत्र में व्यस्त रहें। उसने कहा, ''आपको क्या लगता है कि यदि आप फलस्तीनी प्रतिरोध को कुचलने की कोशिश करेंगे, तो क्षेत्र के अन्य लड़ाके कार्रवाई नहीं करेंगे? इस युद्ध में आज हमारी भी अहम भूमिका हैं।''
लेबनान की सरकारी नेशनल न्यूज एजेंसी ने बताया कि एक इजराइली ड्रोन ने इजराइल सीमा से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर में सेजौड क्षेत्र में एक घाटी पर मिसाइल दागी। हिजबुल्ला ने तुरंत हमले की पुष्टि नहीं की, लेकिन अगर यह सच है तो यह एक बड़ी घटना होगी क्योंकि यह लेबनान का भीतरी इलाका है जो सीमा से बहुत दूर है।
: LAC पर चीन की बड़ी तैयारी, बढ़ा रहा परमाणु हथियार
Sun, Oct 22, 2023
वाशिंगटन
अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने अपनी नई रिपोर्ट में चौंकाने वाली जानकारी दी है। इसमें कहा गया है कि चीन भारत से लगी सीमा LAC (Line of Actual Control) पर बड़े स्तर पर जंग की तैयारी कर रहा है।
पेंटागन की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन LAC पर अपने सैन्य जमावड़े को कम नहीं कर रहा है। इसके बदले वह अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है। वह सीमा पर इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है। परमाणु हथियार से लेकर लॉन्ग रेंज बैलिस्टिक मिसाइल की क्षमता में इजाफा कर रहा है। चीन LAC के पास अंडरग्राउंड स्टोरेज सुविधा, सड़क, दोहरे इस्तेमाल वाले गांव, एयर फिल्ड और हेलीपैड बना रहा है।
सेना को आधुनिक बना रहा चीन
चीन युद्ध के सभी डोमेन में अपनी सेना को सक्रिय रूप से आधुनिक बना रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग का लक्ष्य 2049 तक चीन की सेना को विश्व-स्तरीय बनाने का है। चीन ने 3,488 किलोमीटर लंबे LAC के पास अपनी सेना को 2023 में भी तैनात रखा।
चीन ने LAC के पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख) में शिनजियांग और तिब्बत सैन्य जिलों के डिवीजनों द्वारा समर्थित सीमा रेजिमेंटों को तैनात किया है। ये बल टैंक, तोपखाने, एयर डिफेंस मिसाइल और अन्य हथियारों से लैस हैं। इसके अतिरिक्त, चीन ने पूर्वी (सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश) और सेंट्रल (उत्तराखंड, हिमाचल) क्षेत्रों में लाइट-टू-मेडियम संयुक्त-आर्म्स ब्रिगेड (CABS) को तैनात किया है। चीन के डोकलाम के पास भूमिगत भंडारण सुविधाएं तैयार की है। वह LOC के पास नई सड़कें बना रहा है। चीन ने भूटान में विवादित क्षेत्रों में नए गांव बसाए हैं। उसने पंगोंग झील पर दूसरा पुल तैयार किया है। इसके साथ ही हवाई अड्डे और कई हेलीपैड तैयार किए हैं।
बता दें कि भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद को लेकर तनाव है। दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में LAC पर टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम, तोपखाने और अन्य हथियारों को तैनात किया है। सैनिकों की भारी तैनाती है।