: गाजा के राहत शिविर पर इजरायल ने किया अटैक, कम से कम 30 की मौत
Sun, Nov 5, 2023
गाजा सिटी.
इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध में अब तक 11000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इसी बीच शनिवार को इजारयली सेना ने गाजा में एक शरणार्थी शिविर पर हमला कर दिया जिसमें कम से कम 30 लोग मारे गए। इसके अलावा हमास का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के एक स्कूल पर भी अटैक किया गया जिसमें एक दर्जन की जान चली गई। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अब तक गाजा में 9480 लोग मारे गए हैं जिसमें लगभग आधे बच्चे हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अशरफ अल कुद्रा ने कहा, अल अक्सा शहीद अस्पताल में 30 ज्यादा शवों का लाया गया था। सेंट्रल गाजा पट्टी के पास में अल मगाजी कैंप पर यह हमला किया गया। वहीं हमास ने भी टेलीग्राम पर कहा है कि इजरायल आम लोगों के घरों को निशाना बना रहा है। इसके अलावा मरने वालों में सबसे ज्यादा बच्चे और महिलाएं हैं। एक 37 साल के पत्रकार ने कहा, मेरा घर कैंप के पास में ही था। एयरस्ट्राइक के बाद मेरा घर भी गिर गया है। एक अन्य ने एएफपी से कहा, इजरायल के हमले में 13 साल और 4 साल के दो बेट मारे गए। इसके अलावा उनके भाई, भाई की पत्नी और दो अन्य बच्चे बुरी तरह घायल हो गए हैं। वहीं इजरायली सेना के प्रवक्ता का कहना है कि अभी यह देखा जा रहा हैकि उस इलाके में इजरायल की सेना गई भी थी या नहीं। इजरायल का कहना है कि गाजा के आतंकी संगठन भी कई बार चूक की वजह से या जानबूझकर अपने नागरिकों को निशाना बना देते हैं।
अमेरिका पर दबाव बना रहे अरब देश
गाजा में सीजफायर के लिए अब अरब देश अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं। इजरायल, गाजा के बाद जॉर्डन पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन पर जॉर्डन और एजिप्ट दोनों ने ही प्रेशर बनाने की कोशिश की कि वह इजरायल की तरफ से हो रहे हमले बंद करवाए। वहीं इजरायल ने कसम खा ली है कि वह हमास को पूरी तरह खत्म कर देगा। हालांकि गाजा में हमास को खत्म करने के आगे सुरंगें बहुत बड़ी चुनौती है। हमास के लड़ाकों ने महीनों का राशन और गोला बारूद इन सुरंगों में जमा कर रखा है। इसके अलावा वे अचानक निकलकर इजरायल के सैनिकों पर हमला कर देते हैं।
: पाकिस्तानी सेना 'मिशन खेती' से दूर करेगी खाद्य संकट
Sun, Nov 5, 2023
नई दिल्ली.
पड़ोसी देश पाकिस्तान खाद्य संकट की वजह से दाने-दाने को मोहताज हो गया है। इसलिए, अब पाक सेना ने वहां खेती करने का फैसला किया है। इसके लिए पाक आर्मी ने बड़े भूखंड को लीज पर लिया है। पाकिस्तान के अखबार द न्यूज इंटरनेशनल के मुताबिक, सितंबर में, पाकिस्तान पंजाब में सेना को 400,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर 30 साल का पट्टा देने के लिए एक समझौता हुआ। यह भूखंड दिल्ली के आकार से तीन गुना क्षेत्र के बराबर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस महीने की शुरुआत में इसी तरह के एक और समझौते पर सेना ने हस्ताक्षर किए हैं।
इसके तहत सेना अशांत दक्षिण वजीरिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 17,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती करेगी। अब इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि दक्षिण वजीरिस्तान में सेना द्वारा ली गई जमीन जटिल पहाड़ियों और चोटियों वाला एक ऊबड़-खाबड़ इलाका है, जहां भीषण गर्मी और सर्दियों में भीषण ठंड पड़ती है और जहां सिंचाई की कोई व्यवस्था भी नहीं है, वहां सेना बड़े पैमाने पर खेती कैसे कर सकेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र की कृषि उत्पादकता बढ़ाने और खाद्य आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए पाक सेना शुरुआत में 1,000 एकड़ भूमि पर खेती करेगी और फिर दक्षिण वज़ीरिस्तान के ज़रमलम क्षेत्र में 41,000 एकड़ (17,000 हेक्टेयर) भूखंड पर उसका विस्तार करेगी। यह भूखंड वर्षों से बंजर है। यह क्षेत्र अफगानिस्तान सीमा के करीब भी स्थित है और यहां आतंकवादी हमलों में वृद्धि देखी गई है, खासकर सेना के जवानों को निशाना बनाया जाता रहा है। बता दें कि 75 वर्षों के पाकिस्तान के इतिहास में सेना ने आधे से अधिक समय तक शासन किया है और वहां सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में उसकी मजबूत पकड़ रही है। ऐसे में अर्थव्यवस्था और कृषि में सेना के इस कदम ने कई लोगों की भौंहें चढ़ा दी हैं। खाद्य संकट की चपेट में आया पाकिस्तान 2023 के वैश्विक भूख सूचकांक में 125 देशों में से 102वें स्थान पर है। पाकिस्तान वर्तमान में एक ऐसे परिदृश्य का सामना कर रहा है, जहां बड़े पैमाने पर खाद्य संकट है और रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और बढ़ती गरीबी से त्रस्त हताश जनता मुफ्त आटा पाने के लिए अक्सर हजारों की संख्या में सरकारी वितरण केंद्रों पर इकट्ठा होती है। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जब आटा जैसी चीजों के लिए पाकिस्तान में भगदड़ मची है और दर्जनों लोग हताहत हुए हैं।
माना जा रहा है कि पाक सेना ने स्थिति को सुधारने और जनता की नज़र में अपनी छवि को दुरुस्त करने की कोशिश में ये नई भूमिका तलाशी है। पिछले छह महीनों में सैन्य नेतृत्व ने देश की खराब अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की कोशिश में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर देश की विशेष निवेश सुविधा परिषद के सदस्य हैं, जिसे जून में एक सर्वोपरि निर्णय लेने वाले मंच के रूप में स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था के भीतर आवश्यक संरचनात्मक सुधारों का नेतृत्व करना था। इसी कोशिश में पाक सेना ने बंजर भूमि पर खेतीबारी करने खाद्य उत्पादन में देश को तेजी से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास में यह कदम उठाया है। सेना की इसी मंशा को देखते हुए कार्यवाहक सरकार खेती के लिए सैकड़ों हजारों एकड़ भूमि सेना को सौंपने पर सहमत हुई है।
: गाजा में युद्ध विराम के मुद्दे पर US और अरब देशों में भिड़ंत
Sun, Nov 5, 2023
नई दिल्ली.
गाजा पट्टी में इजरायल की भीषण बमबारी से अब तक करीब 9500 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इनमें अधिकांश बच्चे और महिलाएं हैं। वहां हताहतों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बीच, गाजा पट्टी में युद्ध विराम पर बातचीत के लिए शनिवार को जॉर्डन की राजधानी अम्मान में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और अरब देशों के विदेश मंत्रियों के बीच एक बैठक हुई, जो बेनतीजा रही। इस बैठक में संयुक्त राज्य अमेरिका और अरब वर्ल्ड के सहयोगी देशों के बीच गहरे मतभेद बने रहे।
जॉर्डन के विदेश मंत्री द्वारा बुलाए गए शिखर सम्मेलन में अमेरिकी विदेश मंत्री के अलावा मिस्र, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के शीर्ष राजनयिकों के साथ-साथ फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) के महासचिव भी शामिल हुए। शिखर सम्मेलन में, अरब नेताओं ने गाजा में तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया, लेकिन ब्लिंकन ने उसका यह कहते हुए विरोध किया कि गाजा पट्टी में युद्ध विराम से हमास को फिर से संगठित होने और इजरायल पर एक और हमला शुरू करने का समय मिल जाएगा।
इससे पहले जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफ़ादी और मिस्र के विदेश मंत्री समेह हसन शौकरी ने अमेरिका के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया थै कि इजरायल को आत्मरक्षा का अधिकार है। सफ़ादी ने कहा, "हम यह स्वीकार नहीं करते कि यह आत्मरक्षा है। इसे किसी भी बहाने से उचित नहीं ठहराया जा सकता और इससे ना तो इज़रायल को सुरक्षा मिलेगी और ना ही क्षेत्र में शांति नहीं आएगी।"
मिस्र के विदेश मंत्री समेह शौकरी ने कहा, "इजरायल निर्दोष नागरिकों, चिकित्सा सुविधाओं और पैरामेडिक्स को निशाना बनाकर सामूहिक सजा दे रहा है। इसके अलावा फिलिस्तीनियों को अपनी भूमि छोड़ने और पलायन करने को मजबूर करने की कोशिश कर रहा है। इसी किसी भी सूरत में वैध आत्मरक्षा नहीं कहा जा सकता है और न ही वैध ठहराया जाना चाहिए। शिखर सम्मेलन के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन किनारे में खड़े रहे। उस संवाददाता सम्मेलन में भी जॉर्डन और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने फिर से तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया और गाजा में इजरायली हमले की कड़ी निंदा की। तब, ब्लिंकन ने फिर से इजरायल से नागरिक हताहतों को रोकने के लिए "हर संभव उपाय करने" का आह्वान किया। ब्लिंकन ने शुक्रवार को भी तेल अवीव में इसी तरह का आह्वान किया था।
ब्लिंकन गाजा में नागरिकों की दुर्दशा को कम करने की कोशिशों में जुटे हैं। एक दिन पहले ही उन्होंने इजराइल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भी बातचीत की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक हमास द्वारा बंधक बनाए गए सभी बंधकों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक कोई अस्थायी संघर्ष विराम नहीं हो सकता। इस बीच, गाजा में फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि शनिवार रात मध्य गाजा में मघाजी शरणार्थी शिविर पर इजरायली बमबारी में 30 से अधिक लोग मारे गए। हमास-शासित क्षेत्र के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अब तक इज़रायल की बमबारी में कम से कम 9,488 फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं।