: ट्विटर का मालिक बनने के बाद डूबी एलन मस्क की 100 अरब डॉलर की रकम
Wed, Nov 1, 2023
नई दिल्ली
दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क (Elon Musk) ने काफी विवादों के बाद पिछले साल अक्टूबर के ट्विटर को खरीदा था। लेकिन इस माइक्रोब्लॉगिंग साइट को खरीदना उनके लिए भारी पड़ रहा है। ट्विटर को खरीदने के बाद से पिछले एक साल में मस्क की नेटवर्थ और उनकी कंपनी टेस्ला के मार्केट कैप में 100 अरब डॉलर की गिरावट आई है। इस दौरान मस्क की नेटवर्थ में 19 अरब डॉलर की गिरावट आई है जबकि टेस्ला का 80 अरब डॉलर मार्केट कैप स्वाहा हो चुका है। इतना ही नहीं ट्विटर की वैल्यू भी अब आधी रह गई है। मस्क ने इसे 44 अरब डॉलर में खरीदा था लेकिन अब इसकी वैल्यू 19 अरब डॉलर रह गई है।
मस्क के मालिक बनने के बाद ट्विटर से अधिकांश कर्मचारी निकाले जा चुके हैं या वे खुद ही छोड़कर चले गए हैं। मस्क ने इसका नाम बदलकर X दिया है और कंटेंट रूल्स में भी बदलाव किए हैं। लेकिन इस दौरान कंपनी का एडवरटाइजिंस रेवेन्यू आधे से भी कम रह गया है। कंपनी की कमान मस्क के हाथ में आने के बाद से इसकी सेल्स में 60 फीसदी गिरावट आई है। साथ ही कंपनी को हर साल कर्ज के ब्याज के रूप में 1.2 अरब डॉलर चुकाने पड़ रहे हैं। मस्क का जोर एडवरटाइजिंग के बजाय पेड सब्सक्रिप्शन पर है। लेकिन अब तक मात्र एक परसेंट यूजर्स ने ही मंथली प्रीमियम सर्विस के लिए साइन किया है। इससे कंपनी को सालाना 12 करोड़ डॉलर की ही कमाई होगी।
जकरबर्ग से पिछड़े
ट्विटर की वैल्यूएशन मात्र 19 अरब डॉलर रह गई है जबकि मार्क जकरबर्ग की कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 774.22 अरब डॉलर है। टेस्ला का मार्केट कैप 638.45 अरब डॉलर रह गया है। दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनियों की लिस्ट में फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा सातवें और टेस्ला नौवें नंबर पर है। इस साल सबसे अधिक कमाई के मामले में भी जकरबर्ग ने बाजी मार ली है। इस साल उनकी नेटवर्थ में 63.6 अरब डॉलर की तेजी आई है जबकि मस्क की नेटवर्थ 58 अरब डॉलर बढ़ी है। मस्क 195 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में पहले नंबर पर हैं जबकि जकरबर्ग 109 अरब डॉलर के साथ नौवें नंबर पर हैं।
: नीता अंबानी को ग्लोबल लीडरशिप अवॉर्ड
Tue, Oct 31, 2023
नीता अंबानी को ग्लोबल लीडरशिप अवॉर्ड
नई दिल्ली
रिलायंस फाउंडेशन की फाउंडर एवं चेयरपर्सन नीता अंबानी को ग्लोबल लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यूएस इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) द्वारा दिल्ली में आयोजित एक समारोह में फोरम के अध्यक्ष जॉन चैंबर्स ने नीता अंबानी को अवार्ड दिया। कार्यक्रम में भारत सरकार के शीर्ष अधिकारी और बिजनेस लीडर्स शामिल थे।
श्रीमती अंबानी ने कहा, “मैं पुरस्कार पाकर बेहद सम्मानित महसूस कर रही हूं। मैं रिलायंस फाउंडेशन का प्रतिनिधित्व करती हूं, जिसके जरिए हमने 7 करोड़ 10 लाख से अधिक लोगों के जीवन को छुआ है। ‘कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ के मानक बनने से बहुत पहले, रिलायंस ‘कॉर्पोरेट मोरल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ को पूरा करती आ रही है।“
यूएस इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम ने वक्तव्य जारी कर बताया कि नीता अंबानी सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने वाली एक बिजनेस लीडर हैं, जिनके नेतृत्व में रिलायंस फाउंडेशन ने शिक्षा, कला, खेल और स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से लाखों भारतीयों के जीवन को प्रभावित किया है। उनका काम विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण और बच्चों के हितों के लिए होता है। लिंग विभाजन को पाटने और भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था में महिलाओं के योगदान को बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कला और संस्कृति में नीता एम. अंबानी के महत्वपूर्ण योगदान को हाल ही में मान्यता मिली जब वह मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट, न्यूयॉर्क के बोर्ड में मानद ट्रस्टी के रूप में चुनी गईं। पिछले वर्ष, नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (एनएमएसीसी) मुंबई में खोला गया, जिसे काफी सराहना मिली। रिलायंस फाउंडेशन ने खलों के लिए भी बेहतरीन काम किया है। भारत में युवा एथलीटों को जमीनी स्तर पर और साथ ही वैश्विक स्तर पर चमकाने में फाउंडेशन ने सहायता की है।
अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) में भारत के प्रतिनिधि के रूप में नीता अंबानी ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया, जिसने चार दशकों के बाद भारत में 141वें आईओसी सत्र की मेजबानी का अधिकार मिला। यह आयोजन अक्टूबर 2023 में मुंबई में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। इससे 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी का अधिकार हासिल करने की भारतीय उम्मीदों को बल मिला है।
नीता अंबानी को अवार्ड पर यूएसआईएसपीएफ के चेयरमैन जॉन चैंबर्स ने कहा: “जो लोग जीवन में सफल हुए हैं उनके लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वे दूसरों को सफल होने मदद करें। ऐसी ही एक शख्सियत हैं नीता एम. अंबानी, जो परोपकारिता का उदाहरण हैं और उन्होंने रिलायंस फाउंडेशन में कला, खेल, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय काम किया है।'
ई-कॉमर्स वार्ता में क्रिप्टो करेंसी पर चर्चा करें डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश : जीटीआरआई
नई दिल्ली
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देशों को ई-कॉमर्स क्षेत्र पर वार्ता में क्रिप्टो करेंसी के मुद्दे को शामिल करना चाहिए। शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने यह सुझाव दिया है।
जीटीआरआई ने कहा कि अब क्रिप्टो बाजार वैश्विक स्तर पर ध्यान खींच रहा है। वहीं डब्ल्यूटीओ के ई-कॉमर्स ढांचे के तहत इसका वर्गीकरण अब भी अस्पष्ट है।
इसमें कहा गया है कि बहस इस बात पर केंद्रित होनी चाहिए कि क्या क्रिप्टो-मुद्रा का आदान-प्रदान ई-कॉमर्स के तहत 'इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन' के अंतर्गत आता है।
जीटीआरआई के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि मौजूदा डब्ल्यूटीओ वार्ता के नतीजे वैश्विक डिजिटल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि क्रिप्टो करेंसी को शामिल करने या बाहर करने और प्रभावशाली देशों का रुख भविष्य की अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीतियों को आकार देगा।
आईथिंक लॉजिस्टिक्स का फेडएक्स से करार
मुंबई
प्रौद्योगिकी संचालित लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप आईथिंक लॉजिस्टिक्स ने सीमापार सामान भेजने के लिए फेडएक्स के साथ करार किया है।
आईथिंक लॉजिस्टिक्स ने सोमवार को बयान में कहा कि इस रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतरने वाले ई-कॉमर्स विक्रेताओं को शिपिंग समाधान और पर्याप्त लागत बचत प्रदान करना है।
इस महीने की शुरुआत में लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप ने देश के दूरदराज के हिस्सों में ई-कॉमर्स डिलिवरी के लिए इंडिया पोस्ट के साथ गठजोड़ किया था।
कंपनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान भेजने की जटिलताएं कई बार मध्यम आकार की ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए मुश्किलें पैदा करती हैं। इसकी वजह उपभोक्ता मांग और सीमा शुल्क नियमनों की विविधता है।
यह गठजोड़ फेडएक्स के गहन परिवहन नेटवर्क को उसके व्यापक एसएएएस समाधान से जोड़कर इन चुनौतियों को हल करने का प्रयास करेगा। इसके जरिये सभी आकार की कंपनियां फेडएक्स की दरों पर सीमापार सामान भेजने की अपनी जरूरत को पूरा कर सकेंगी।
: चीन की दादागिरी होगी खत्म....भारत बनाने जा रहा है सेमीकंडक्टर...
Tue, Oct 24, 2023
नई दिल्ली
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का हब बन चुके भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट का काम शुरू हो गया है और यहां बनने वाले सेमीकंडक्टर यानि छोटे चिपसेट कई मामलों में देश के लिए फायदेमंद साबित होंगे। भारत में सेमीकंडक्टर बनने से स्मार्टफोन, कार समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स के दाम कम हो सकते हैं, वहीं सेमीकंडक्टर के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना होगा। दरअसल बिना सेमीकंडक्टर के किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कल्पना नहीं की जा सकती। सरल शब्दों में कहें तो सेमीकंडक्टर चिप एक तरह से हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का दिल है।इस विशेष क्षेत्र में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने सेमीकॉन इंडिया 2023 समिट के जरिए देश और दुनिया के सामने अपना विजन रखा। भारत में सेमीकंडक्टर की खपत 2026 तक 80 बिलियन डॉलर और 2030 तक 110 बिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है। इससे स्पष्ट होता है कि चिप निर्माण भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत के लिए क्या मायने रखता है, लेकिन, सवाल है कि इस दिशा में अब तक भारत में क्या तैयारी हुई है, कौन-सी कंपनियां सेमीकंडक्टर निर्माण में लगी हुई हैं, क्या-क्या चुनौतियां हैं, चूंकि सेमीकंडक्टर की आपूर्ति के लिए पूरी दुनिया चीन, ताइवान और साउथ कोरिया पर निर्भर है।चीन की इसी दादागीरी को खत्म करने के लिए भारत ने मोबाइल मेड इन इंडिया मुहित के तहत मोबाइल की लोकल मैन्युफैक्चरिंग शुरू की। इसका नतीजा यह रहा है कि आज भारत मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बन चुका है। मौजूदा वक्त में 3.5 लाख करोड़ रुपये के सालाना मोबाइल बना रहा है। साथ ही इस साल 2023 यह आंकड़ा 4 से 4.5 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। इसके अलावा मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग कर रहा है।हाल ही में मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गूगल फॉर इंडिया इवेंट में बताया कि भारत के पहले सेमीकंडक्टर प्लांट का निर्माण शुरू हो गया है, जो अगले कुछ सालों में चिपसेट का निर्माण शुरू कर देगा। भारत में सेमीकंडक्टर बनने से स्मार्टफोन, कार समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट के दाम कम हो सकते हैं। वही सेमीकंडक्टर के लिए दूसरे देशों पर नहीं निर्भर रहना होगा, क्योंकि एक्सपर्ट सलाह दे रहे थे कि अगर भारत का चीन के साथ युद्ध होता है या फिर टेंशन बढ़ती है, तो चीन सेमीकंडक्टर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट की सप्लाई रोककर भारत की इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री को तबाह कर सकता है।