: गठबंधन के लिए फांस बनी बिजावर सीट, शेयरिंग पर नहीं बनी बात
Mon, Oct 16, 2023
भोपाल
मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना खत्म हो चुकी हैं। दरअसल, रविवार सुबह कांग्रेस ने 144 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की। इसमें से 4 ऐसी सीटों पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं जिन पर सपा ने पहले ही अपने उम्मीदवार का ऐलान कर रखा था। कांग्रेस की लिस्ट के बाद रविवार शाम में ही सपा ने 9 प्रत्याशियों की एक और लिस्ट जारी कर गठबंधन के कयासों पर पूर्ण विराम लगा दिया। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव के लिए INDIA गठबंधन बनने के बावजूद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और सपा ने स्पष्ट किया था कि MP में तीनों अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी। चूंकि सपा सूबे में सभी सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारेगी इस वजह से कयास लगाया जा रहा था कि कांग्रेस के साथ सियासी जुगत बैठ सकती है।
कांग्रेस और सपा के बीच जिन चार सीटों को लेकर बात बिगड़ी है वो चितरंगी, मेहगांव, भांडेर और राजनगर सीट हैं। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मेहगांव, भांडेर और राजनगर सीट जीती थी। हालांकि सपा आलाकमान इन सीटों से ज्यादा कांग्रेस द्वारा छतरपुर जिले के बिजावर से उम्मीदवार उतारने से सबसे ज्यादा नाखुश है। दरअसल 2018 में सपा ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी और ऐसा माना जा रहा था कि कांग्रेस इस सीट से किसी को नहीं उतारेगी लेकिन पहली ही लिस्ट में कांग्रेस ने बिजावर से चरण सिंह यादव को मैदान में टिकट देकर अटकलों को दूर कर दिया। कांग्रेस की पहली लिस्ट के रिएक्शन के तौर पर सपा ने लिस्ट में बिजावर से डॉ मनोज यादव को टिकट दे दिया।
मध्य प्रदेश के सपा प्रदेश अध्यक्ष रामायण सिंह पटेल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि "कांग्रेस के साथ गठबंधन की सभी संभावनाएं खत्म हो गई हैं। कांग्रेस नेतृत्व के साथ हमारी कुछ बातचीत हुई थी लेकिन रविवार को सब कुछ विफल हो गया। हम अपने दम पर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और अगले साल चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेंगे।”
ऐसे कैसे चलेगा गठबंधन
अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले एक सीनियर नेता ने आरोप लगाया, ''कांग्रेस को भाजपा को हराना चाहती ही नहीं है।'' पार्टी पदाधिकारी ने कहा, “हमने कांग्रेस नेतृत्व के साथ बातचीत की लेकिन वे भाजपा को हराने के लिए गठबंधन करने में दिलचस्पी नहीं रखते थे। ऐसा लगता है कि उनका प्राथमिक उद्देश्य भाजपा को नहीं बल्कि सपा को हराना है। कांग्रेस के साथ हमारा गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए होगा लेकिन मध्य प्रदेश में हम अकेले चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस नेतृत्व से बातचीत हुई थी और हम 10 सीटें चाहते थे। वे कम सीटों की पेशकश कर रहे थे और अचानक उन्होंने हमें बताए बिना इतने सारे उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। गठबंधन इस तरह काम नहीं करता।''
कितने सीटों पर लड़ेगी सपा ?
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी संभवत: मध्य प्रदेश में कुल 30-35 उम्मीदवार उतारेगी। जिस चीज ने एसपी नेतृत्व को "आहत" किया है, वह बिजावर है, जहां चरण सिंह यादव को मैदान में उतारने के कांग्रेस के फैसले ने उसे और भी अधिक परेशान कर दिया है। चरण सिंह बुन्देलखण्ड में सपा के वरिष्ठ नेता दीप नारायण यादव के चचेरे भाई हैं।
गठबंधन की फांस बनी बिजावर सीट
पार्टी के आलाकमान के एक नेता ने कहा “यह दुखद है कि उन्होंने उस सीट पर एक उम्मीदवार की घोषणा की है जिसे हमने 2018 में जीता था और हम चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने हमसे इस बारे में राय नहीं ली न ही हमसे बात की और अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया।''
गौरतलब हो बिजावर में बड़ी संख्या में यादव और ब्राह्मण आबादी है और 2018 में सपा के राजेश कुमार शुक्ला ने जीत दर्ज की थी। जिन्हें "बबलू भैया" के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन 2020 में कमल नाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के पतन के बाद भाजपा में चले गए। सपा का दावा है कि यह ऐसी सीट है जहां वह अच्छा प्रदर्शन करेगी।
वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता पीयूष बबेले ने कहा है कि सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान को करना है। कांग्रेस के एक अन्य नेता ने कहा कि सपा अपनी क्षमता से अधिक सीटों के लिए उतावली है। उन्होंने कहा, ''मध्य प्रदेश में उनका कोई आधार नहीं है। वे इतनी अधिक सीटों की उम्मीद कैसे कर रहे हैं? और जिस सीट को लेकर वो परेशान हैं... उनके विधायक बीजेपी में शामिल हो गए। उम्मीद है कि कुछ काम किया जा सकता है, लेकिन एसपी को ऐसे राज्य में जमीनी हकीकत को समझने की जरूरत है, जहां उनका कोई आधार नहीं है।"
: TMC सांसद महुआ मोइत्रा की सदस्यता खतरे में
Mon, Oct 16, 2023
नई दिल्ली.
पश्चिम बंगाल में जहां कई तृणमूल सदस्य व मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे हैं, वहीं अब पार्टी की लोकसभा सदस्य महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) पर न सिर्फ गंभीर भ्रष्टाचार का, बल्कि सदन की गरिमा गिराने और विशेषाधिकारों के हनन का आरोप लगा है। उन पर पैसे और गिफ्ट के बदले विदेश में बसे एक उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी के हितों के लिए संसद में सवाल पूछने का आरोप लगा है।
गंभीर हैं महुआ मोइत्रा पर लगे आरोप
बता दें कि यह बहुत ही गंभीर आरोप है और 2005 में ऐसे ही एक मामले में कई सदस्यों की सदस्यता चली गई थी। वे नेता फिर लौटकर संसद नहीं पहुंचे।
महुआ मोइत्रा ने पूछे उद्योगपति से जुड़े सवाल
पिछले कुछ वर्षों में महुआ मोइत्रा ने अपने आक्रामक लहजे के कारण फायरब्रैंड नेता की छवि बनाई थी। रविवार को भाजपा सदस्य निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर सीधा आरोप लगाया कि महुआ ने अब तक सदन में 61 सवाल पूछे हैं, जिसमें से 50 उक्त उद्योगपति के कारोबार से जुड़ा रहा है।
दिल्ली के अधिवक्ता ने की पूरी पड़ताल
निशिकांत ने लोकसभा अध्यक्ष को बताया कि दिल्ली के एक अधिवक्ता जय अनंत देहाद्रई ने पूरी पड़ताल की है, लोकसभा में महुआ की ओर से पूछे गए सवालों की लिंक अटैच की है और साथ ही यह भी बताया है कि पूछे गए सवाल किस तरह एक ही उद्योगपति के संबंधित थे।
रोचक पहलू यह भी है कि कुछ सवालों को अदाणी समूह से जोड़ा जाता था, जिसके खिलाफ महुआ के उद्योगपति मित्र हीरानंदानी की कंपनी संघर्ष कर रही होती थी। निशिकांत ने पूरी जांच कमेटी बिठाने और कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि फायरब्रांड छवि तैयार करने वाली सच्चाई में पैसे लेकर सवाल पूछने वाली निकलीं। उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ संसद की अवमानना और विशेषाधिकार हनन है बल्कि दंड संहिता के 120 ए के तहत अपराध भी है।
हीरानंदानी को फायदा पहुंचाते थे मोइत्रा के सवाल
अधिवक्ता अनंत ने 38 पेज की विस्तृत जानकारी दी है और उसमें यह बताया है कि महुआ के सवाल किस तरह हीरानंदानी को फायदा पहुंचाते थे। यानी सवाल हीरानंदानी के होते थे और संसद में मंत्री से वह सवाल महुआ पूछती थीं और परोक्ष रूप से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करती थी।
मई 2019 में लोकसभा पहुंचीं महुआ
महुआ मोइत्रा मई 2019 में चुनकर लोकसभा पहुंची। आठ अगस्त 2019 को उन्होंने पेट्रोलियम मंत्रालय से पारादीप पोर्ट ट्रस्ट से जुड़ा सवाल पूछा। अनंत के अनुसार, पारादीप के साथ 2018 में हीरानंदानी को समझौता हुआ था। 18 नवंबर को महुआ ने फिर से पेट्रोलियम से जुड़ा सवाल पूछा और अदाणी को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। निशिकांत ने बताया कि पूछे गए 61 में से 50 सवाल हीरानंदानी के लिए थे।
2005 में ऐसा ही मामला आया था सामने
गौरतलब है कि 2005 में जब ऐसा ही एक मामला स्टिंग के जरिए सामने आया था तो तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष ने पवन बंसल की अध्यक्षता में जांच कराई थी। महज 23 दिन के अंदर रिपोर्ट आई थी और एकमत से सदन से इसकी इसकी आलोचना करते हुए सदस्यता खारिज कर दी गई थी। महुआ पर भी इसका खतरा आसन्न है। यूं तो अलग अलग कारणों से कई सदस्यों पर गिरी गाज को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, लेकिन महुआ के साथ खड़ा होना किसी भी राजनीतिक दल के लिए मुश्किल होगा।
: सीहोर विधानसभा सीट की चाबी युवा मतदाताओं के पास
Mon, Oct 16, 2023
सीहोर.
विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही सबकी नजर प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों पर टिकी है, लेकिन संभावित उम्मीदवारों की नजर युवा मतदाताओं पर है, जो इस बार हार-जीत में सबसे बड़ी भूमिका अदा करेंगे। जिले के कुल मतदाताओं में से करीब 56 प्रतिशत मतदाता युवा है। जिनकी उम्र 18 से 39 साल है, जो जिले के चारों विधायक चुनने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। आगामी विधानसभा चुनावों के तहत जारी मतदाता सूची के अनुसार जिले में कुल मतदाताओं की संख्या इस बार 9 लाख 97 हजार 660 है।
5 लाख से अधिक मतदाता युवा
मतदाताओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया तो रोचक तथ्य सामने आया कि इस बार इन वोटरों में सबसे अधिक 5 लाख 59 हजार 105 मतदाता युवा है। जिनकी उम्र 18 से महज 39 साल तक है, जो कुल मतदाताओं का 56 फीसदी है। मतलब जिले के कुल मतदाताओं के आधे से भी ज्यादा युवा मतदाता है। इनमें 18 से 19 साल के 47 हजार 217 मतदाता, 20 से 29 साल के 2 लाख 71 हजार 589 और 30 से 39 साल के 2 लाख 40 हजार 301 मतदाता है। यानी कुल मिलाकर 18 से 39 साल के मतदाताओं की संख्या कुल मतदाताओं से भी ज्यादा हैं। यह वर्ग युवा मतदाताओं में माना जाता है।
80 साल पार के मतदाता भी सर्वाधिक आष्टा में
मतदाताओं की उम्र पर गौर करें तो 18 से 39 आयु वर्ग के मतदाताओं की तादाद सबसे ज्यादा आष्टा में है। 2 लाख 77 हजार 021 मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में 1 लाख 49 हजार 433 मतदाता 39 वर्ष तक के हैं। जो कि जिले में सर्वाधिक युवा मतदाता है। वहीं इससे उलट उम्रदराज मतदाताओं की बात करे तो आष्टा विधानसभा क्षेत्र इस मामले में सबसे आगे है। यहां 5 हजार 159 मतदाता ऐसे हैं, जो 80 की उम्र पार कर चुके हैं। यह तादाद जिले में सभी विधानसभा क्षेत्रों से ज्यादा है।
उम्र के हिसाब से जानिए कहां कितने वोटर
उम्र
बुदनी
आष्टा
इछावर
सीहोर
18-19
11,637
13,860
11,313
10,407
20-29
73,266
74,877
63,124
60,322
30-39
68,345
60,696
55,238
55,932
40-49
51,339
51,648
38,499
39,516
50-59
35,480
38,619
26,840
28,041
60-69
20,633
21,667
17,781
16,333
70-79
9,596
10,495
8,431
7,806
80-89
3,159
3,940
2,994
2,512