: PM मोदी के तेलंगाना दौरे से पहले BJP और BRS के बीच छिड़ा पोस्टरवार
Sun, Oct 1, 2023
हैदराबाद
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आज तेलंगाना (Telangana) के दौरे पर आने वाले हैं, लेकिन उससे पहले भारत राष्ट्र समिति (BRS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच पोस्टरवार छिड़ गया है। दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर पोस्टर के जरिए निशाना साधा है।
BRS-BJP के बीच पोस्टरवार
दरअसल, सत्तारूढ़ बीआरएस ने पोस्टर लगाकर पीएम मोदी (PM Modi) से पिछले 10 साल के दौरान तेलंगाना से किए गए वादों को पूरा नहीं करने को लेकर सवाल उठाया है। वहीं, भाजपा ने पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (K Chandrasekar Rao) को हर पांच साल में तेलंगाना का सबसे बड़ा विधायक खरीदार बताया है।
'मोदी जी, आपके वादे का क्या हुआ'
बीआरएस कार्यकर्ताओं ने शमशाबाद एयरपोर्ट के पास कई पोस्टर चिपकाए हैं। यहीं पर पीएम मोदी महबूबनगर जाने से पहले उतरेंगे। जो पोस्टर बीआरएस समर्थकों की तरफ से चिपकाए गए हैं, उनमें से एक में लिखा है- मोदी जी का स्वागत है। पलामुरु-रंगारेड्डी परियोजना को राष्ट्रीय दर्जा देने के आपके वादे का क्या हुआ?
पीएम मोदी के खिलाफ लगाए गए पोस्टर
एक अन्य पोस्टर में कहा गया है- सौतेला व्यवहार। मोदी को महबूबनगर जाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। वहीं, दूसरे पोस्टर में तेलंगाना के लोगों से किए गए प्रधानमंत्री के वादों पर प्रकाश डाला गया है। इनमें आईटीआईआर, टेक्सटाइल पार्क, डिफेंस कॉरिडोर, काजीपेट कोच फैक्ट्री, मिशन भगीरथ फंड, बय्याराम स्टील प्लांट, हल्दी बोर्ड, मेडिकल कॉलेज और आइआइएम का जिक्र किया गया है।
बीआरएस ने एक अन्य पोस्टर में कहा कि तेलंगाना का अपमान करने के बाद मोदी को यहां आने का कोई अधिकार नहीं है। पोस्टर में तेलंगाना गठन के बारे में अलग-अलग मौकों पर संसद में बोलते हुए प्रधानमंत्री की चार अलग-अलग तस्वीरें हैं। इस पोस्टर में उनके इस कथन का भी जिक्र किया गया है कि बच्चे को बचाने के लिए मां को मार डाला गया।
: मणिपुर हिंसा में दो देशों के आतंकियों ने रची साजिश!
Sun, Oct 1, 2023
इंफाल
मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। मणिपुर के पहाड़ी जिले चुराचांदपुर में एक संदिग्ध आतंकवादी को गिरफ्तार किया है। आरोपी को बांग्लादेश और म्यांमार के आतंकवादी सरगनाओं से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साजिश मामले में देश की शीर्ष आतंकवाद विरोधी एजेंसी ने गिरफ्तार किया है। संदिग्ध को पूछताछ और आगे की जांच के लिए दिल्ली लाया जा रहा है। आतंकवाद रोधी एजेंसी ने एक बयान में कहा कि आरोपी और म्यांमार और बांग्लादेश में उसके नेटवर्क ने मणिपुर संकट का फायदा उठाने की कोशिश की।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि आतंकी आरोपी, सेमिनलुन गंगटे, "मणिपुर में जातीय अशांति का फायदा उठाकर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए म्यांमार और बांग्लादेश स्थित आतंकी संगठनों के नेतृत्व के साथ साजिश में सहायक है। पुलिस सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि गंगटे 22 जून को मणिपुर के क्वाक्टा में हुए कार बम विस्फोट का भी मुख्य आरोपी है।
इस विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। 22 जून को एक छोटे पुल के पास खड़ी एक स्कॉर्पियो एसयूवी में विस्फोट हो गया था। इसके बाद हिंसा में गंभीर वृद्धि देखी गई थी। उसी समय आशंका जताई गई थी कि इस हमले में प्रशिक्षित आतंकवादियों का हाथ हो सकता है। एनआईए ने यह नहीं बताया है कि गैंगटे का संबंध किस आतंकी समूह से है।
लगभग 25 कुकी विद्रोही समूहों ने केंद्र, राज्य और सेना के साथ त्रिपक्षीय ऑपरेशन निलंबन (एसओओ) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से ज्यादातर समूह चुराचांदपुर में स्थित हैं। समझौते के तहत विद्रोहियों को निर्दिष्ट शिविरों में रहना होगा और उनके हथियारों को निगरानी भंडार में रखा जाएगा। हालांकि, आरोप हैं कि SoO समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले समूहों के कुछ विद्रोही मणिपुर हिंसा में भाग ले रहे हैं। एनआईए ने जुलाई में अपनी तरफ से यह मामला दर्ज किया था।
: पति-पत्नी का काम नहीं हो रहा था झगड़ा, कोर्ट को करना पड़ा नामकरण
Sun, Oct 1, 2023
कोच्चि
न्याय की रक्षा करने वाली अदालत माता-पिता की भूमिका निभा रहे हैं। इसका ताजा सबूत केरल हाईकोर्ट से मिला है, जहां पति-पत्नी के झगड़े के बीच अदालत को बच्चे का नामकरण करना पड़ा। कोर्ट का कहना है कि बच्चे के कल्याण के लिए नाम होना बेहद जरूरी है। खास बात है कि बच्चे का नाम रखने की प्रक्रिया में कोर्ट ने माता-पिता की सिफारिश को भी माना है।
मामला केरल का है। यहां पति-पत्नी के बीच बच्चे का नाम रखने को लेकर विवाद हो गया था। मामला ने तब तूल पकड़ा, जब बच्चा शिक्षा हासिल करने के लिए तैयार हुआ और स्कूल ने बगैर नाम का जन्म प्रमाण पत्र स्वीकार करने से मना कर दिया था। अब इसे लेकर पत्नी ने एक नाम सुझाया और बच्चे के पिता की तरफ से भी सुझाव आया। नतीजा यह हुआ कि दोनों में विवाद हो गया और कोर्ट को दखल देना पड़ा।
कोर्ट में क्या हुआ
केरल हाईकोर्ट का कहना था कि पैरेंट्स के बीच जारी विवाद को सुलझाने में समय लगेगा और यह बच्चे के लिए ठीक नहीं है। बच्चे के नाम करण के लिए कोर्ट ने पैरेंस पैट्रिया अधिकार का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा, 'इस अधिकार का इस्तेमाल करते समय माता-पिता के अधिकार के बजाए बच्चे के कल्याण को सबसे ऊपर रखा जाता है।'
बेंच ने कहा, 'कोर्ट को बच्चे के नाम का चुनाव करना ही होगा। नाम का चुनाव करते समय बच्चे का कल्याण, सांस्कृतिक विचार, माता-पिता के हित जैसी चीजों का ध्यान रखना होगा। इसका सबसे बड़ा मकसद बच्चे का कल्याण है। ऐसे में कोर्ट पैरेंस पैट्रिया ज्यूरिडिक्शन का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर है।'
माता-पिता के अलग सुझाव
मां बच्चे का नाम 'पुण्य नायर' रखना चाह रही थी। इसके लिए उन्होंने रजिस्ट्रार का भी रुख किया, लेकिन रजिस्ट्रार ने माता-पिता दोनों की मौजूदगी की मांग की। अब अलग हो चुके माता-पिता इस मुद्दे पर एक राय नहीं बना सके। यहां पिता की इच्छा थी कि बच्चे का नाम 'पद्म नायर' रखा जाए।
यहां कोर्ट ने कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बच्चे का नाम 'पुण्य बालगंगाधरन नायर' या 'पुण्य बी. नायर' रखने का फैसला किया।