: कनाडा में खालिस्तानियों ने हिंदुओं पर की पत्थरबाजी, नहीं रास आई दिवाली
Tue, Nov 14, 2023
ओटावा
कनाडा में खालिस्तानी संगठनों ने एक बार फिर उपद्रव करने की हिमाकत की है। कनाडा में हिंदुओं और अन्य भारतीयों का दिवाली मनाना खालिस्तानियों को रास नहीं आया और वे गाली-गलौज, पत्थरबाजी पर उतर आए। जानकारी के मुताबिक कनाडा के क्यूबेक प्रांत के ब्रॉम्पटन बोरो में दिवाली उत्सव के दौरान खालिस्तान समर्थकों ने हिंदुओं पर हमला कर किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस तरह के उपद्रव के दौरान कनाडा की पुलिस ने भी उनपर ऐक्शन नहीं लिया। उपद्रवी खालिस्तान का पीला झंडा लेकर उत्सव स्थल पर पहुंचे थे।
सूत्रों का कहना है कि कनाडा की पुलिस ने उस उपद्रव को अंतर सामुदायिक लड़ाई बताया और कहा कि दो धर्मों के लोगों में झड़प हुई है। भारत सरकार के एक अधिकारी का कहना है कि खालिस्तानियों की हरकतों को देखने के बाद भी जस्टिन ट्रूडो की सरकार मूक दर्शक बनी हुई है। वह अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर खालिस्तानी संगठनों को बढ़ावा देती है। हिंदुओं के त्योहारों के दौरान हमला करना और भी चौकाने वाला है। उन्होंने कहा कि राजनयिक रास्ते से इस मुद्दे को उठाया जाएगा।
बता दें कि यूएन के मानवाधिकार परिषद की बैठक में भी भाजपा ने कनाडा को जमकर लताड़ लगाई और आईना दिखाया। भारत ने कहा कि कनाडा में आतंकियों का समर्थन किया जा रहा है और उनके हौसले बढ़ रहे हैं। वहीं विशेष धर्म के पूजा स्थलों पर हमला हो रहा है जिसपर सरकार कोई ऐक्शन नहीं ले रही है।बता दें कि निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में भारत पर आरोप लगा दिया था। इसके बाद भारत ने भी उनके बयान को बेहूदा और बेतुका करार दिया और आरोपों को खारिज कर दिया।
बता दें कि कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भी गुरुवार को दिवाली मनाई थी और नया डाक टिकट भी जारी किया था। बीते पांच सालों से यह परंपरा चल रही है। 2017 में पहली बार कनाडा ने दिवाली पर स्टैंप जारी किया था। बता दें कि कनाडा में रहने वाले बौद्ध, सिख और जैन समदुया के लोग दिवाली मनाते हैं।
: राष्ट्रपति जिनपिंग और जो बाइडेन की आज मुलाकात
Tue, Nov 14, 2023
नई दिल्ली
दुनिया में इस वक्त जंग का माहौल बना हुआ है. इजरायल-हमास की जंग जारी है. कोल्ड वार की आहट है और इसी बीच 14 नवंबर की तारीख एक बड़ी घटना का गवाह बनने जा रही है. खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग APEC शिखर सम्मेलन के मौके पर आज आमने-सामने बैठकर मुलाकात करेंगे. ये मुलाकात दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर क्या और कितना असर डालेगी, इससे क्या निष्कर्ष निकलेगा, विशेषज्ञ इसका आंकलन करने पर जुटे हुए हैं.
इंडोनेशिया मीटिंग के ठीक एक साल बाद मिलेंगे दोनों नेता
व्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सप्ताह एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) शिखर सम्मेलन के मौके पर मुलाकात करेंगे और संचार को मजबूत करने और प्रतिस्पर्धा के प्रबंधन पर चर्चा करेंगे. बुधवार को सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र में आमने-सामने होने वाली दोनों राष्ट्रपति की यह मुलाकात इंडोनेशिया में हुई मीटिंग के ठीक एक साल बाद हो रही है.
दोनों नेताओं की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर
इन दोनों नेताओं की मीटिंग APEC शिखर सम्मेलन का केंद्र बिंदु नहीं है, लेकिन इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है क्योंकि हाल के वर्षों में अमेरिका और चीन के संबंधों में कुछ हद तक तना-तनी रही है. इस बैठक में दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव को कम करने के उद्देश्य से हाई लेवल की कूटनीतिक बातचीत होगी. जनवरी 2021 में बाइडन के पदभार संभालने के बाद से यह दोनों नेताओं के बीच केवल दूसरी व्यक्तिगत बैठक होगी.
बुनियादी मसलों पर चर्चा की उम्मीद
व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने संवाददाताओं से कहा कि बाइडेन का मानना है कि जटिल संबंधों को मैनेज करने के लिए आमने-सामने की कूटनीति का कोई विकल्प नहीं है. सुलिवन ने कहा, "हमें उम्मीद है कि नेता यूएस-पीआरसी द्विपक्षीय संबंधों के कुछ सबसे बुनियादी तत्वों पर चर्चा करेंगे, जिसमें संचार की खुली लाइनों को मजबूत करने और प्रतिस्पर्धा को जिम्मेदारी से मैनेज करने का निरंतर महत्व शामिल है ताकि यह संघर्ष में न बदल जाए."
बीते साल ताइवान दौरे पर गई थीं स्पीकर नैंसी पेलोसी
बता दें कि चीन ने पिछले साल अमेरिकी सदन की तत्कालीन स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मिलिट्री टु मिलिट्री कम्यूनिकेशन काट दिया था. ताइवान पर पर चीन अपना दावा करता है, जबकि यह लोकतांत्रिक रूप से शासित द्वीप है. इसके बाद इस तनावपूर्ण संबंध में तब और खटास आ गई जब फरवरी में अमेरिका के ऊपर से उड़ान भरने वाले एक संदिग्ध चीनी जासूसी गुब्बारे को मार गिराया गया था.
फरवरी में संदिग्ध जासूसी गुब्बारे पर अटैक से और बिगड़े थे संबंध
बाइडन के आदेश के बाद दोनों देशों के बीच संबंध खराब हो गए थे. हालांकि बाइडन प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने तब से बीजिंग का दौरा किया है और संचार और विश्वास के पुनर्निर्माण के लिए अपने समकक्षों से मुलाकात की है. उन्होंने कहा, "हम देखेंगे कि सैन फ्रांसिस्को में क्या होता है और राष्ट्रपति बैठक के बाद रिपोर्ट दे सकेंगे कि क्या वास्तव में हमने मिलिट्री टु मिलिट्री कम्यूनिकेशन बहाल करने में प्रगति की है.
इन मुद्दों पर भी हो सकती है बातचीत
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, बाइडन-शी जिनपिंग की बैठक में इजरायल-हमास युद्ध से लेकर यूक्रेन पर रूस के आक्रमण, उत्तर कोरिया के रूस के साथ संबंध, ताइवान, इंडो-पैसिफिक, मानवाधिकार, फेंटेनाइल उत्पादन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक संबंधों जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है.
: इजरायल ने गाजा के सबसे बड़े शिफा अस्पताल में रात-भर गिराए बम
Mon, Nov 13, 2023
येरुसलम/नई दिल्ली.
इजराइल ने गाजा पट्टी के सबसे बड़े शिफा अस्पताल के पास लड़ाई तेज कर दी है। इजरायली सैनिकों और हमास चरमपंथियों के बीच यहां भीषण लड़ाई जारी है। शनिवार की पूरी रात और रविवार सुबह बड़े पैमाने पर इजरायली रक्षा बलों ने यहां हवाई हमले किए और सैंकड़ों गोले बरसाए। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में बिजली आपूर्ति ठप पड़ने और जरूरी सामग्री की उपलब्धता कम होने से हजारों अस्पताल कर्मी औ मरीज फंसे हुए हैं।
इस हमले से पहले इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध विराम की मांग को फिर ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि गाजा पट्टी में हमास आतंकियों के खिलाफ उनकी लड़ाई पूरी ताकत के साथ जारी रहेगी। टेलीविजन पर दिए संबोधन में इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि युद्ध विराम तभी संभव है, जब गाजा में चरमपंथियों द्वारा बंधक बनाए गए सभी 240 लोगों को मुक्त किया जाएगा। इजराइल ने गाजा में हमास के 16 साल के शासन को पूरी तरह से खत्म करने संकल्प लिया है। उसने क्षेत्र में फंसे 23 लाख फिलस्तीनियों पर युद्ध से पड़ने वाले असर के लिए हमास को दोषी ठहराया है।
अस्पताल में चल रहा हमास का दफ्तर
गाजा शहर के रहने वालों ने शिफा अस्पताल के आसपास के क्षेत्रों में रात भर चले हवाई हमले और गोलाबारी की जानकारी दी। वहीं, इजराइल का आरोप है कि हमास ने अस्पताल परिसर के अंदर और नीचे एक कमान पोस्ट बना रखी है। वहीं, हमास और अस्पताल के कर्मचारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल में शरण लिए अहमद अल-बोरश नाम के व्यक्ति ने कहा, ‘हमने उनके आने के इंतजार में घबराहट में रात बिताई। वे बाहर हैं, लेकिन ज़्यादा दूर नहीं हैं।’
अभी अस्पताल के ताजा हालात
अस्पताल और उसके आसपास की स्थिति का पता लगाना संभव नहीं है। लेकिन, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि शिफा में अब भी 1500 मरीज हैं। साथ ही 1500 चिकित्सा कर्मी और 15000 से 20000 लोग आश्रय लिए हुए हैं। हजारों लोग शिफा और अन्य अस्पतालों से भाग गए हैं। चिकित्सकों ने कहा कि हर किसी के लिए बाहर निकलना असंभव है।
गाजा के दो अस्पतालों में काम बंद
उधर, फलस्तीनी रेड क्रिसेंट बचाव सेवा ने कहा कि गाजा सिटी का दो अस्पतालों ने ईंधन की कमी से काम करना बंद कर दिया है। रविवार को अन्य अस्पताल, अल-कुद्स अब बंद हो गया है क्योंकि यहां ईंधन खत्म हो गया है। गाजा के एकमात्र बिजली संयंत्र को एक महीने पहले इजरायल ने जबरन बंद कर दिया था। इजराइल ने इसके पीछे यह तर्क दिया है कि हमास ईंधन का इस्तेमाल सैन्य अभियानों के लिए कर रहा है।
रेड क्रिसेंट के प्रवक्ता नेबल फरसाख ने कहा कि इजरायली हमलों से विस्थापित परिवारों, मरीजों और चिकित्सा कर्मियों समेत 6000 लोग अस्पताल में फंसे हुए हैं।